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कोरोना का खौफ: 50 फीसद घटी रोडवेज व रेलवे की आमदनी
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बांदा। यह अच्छी बात है कि अब तक जनपद में कोरोना का कोई संक्रमित मरीज नहीं मिला है। अलबत्ता बाहर से आए कुछ युवाओं की एहतियात के तौर पर मेडिकल जांच की गई है। लेकिन कोरोना का खौफ चौतरफा नजर आ रहा है। कारोबार में काफी गिरावट आई है। रेल और बसों में यात्रियों की संख्या आधी रह गई है। दोनों ही विभागों को लाखों रुपये राजस्व का रोजाना नुकसान हो रहा है। रेलवे में 50 फीसद और रोडवेज में 25 प्रतिशत यात्री घटे हैं।
कोरोना को लेकर हर व्यक्ति सतर्क और सशंकित है। यथा संभव बचाव और परहेज भी हो रहे हैं। मौजूदा सीजन में ट्रेनें और यात्री बसें खचाखच भरी रहती थीं। लेकिन कोरोना नजारा पलट दिया है। ट्रेनों की स्थिति यह है कि मंडल मुख्यालय बांदा से आम दिनों में करीब 9 हजार यात्री रोजाना आते-जाते थे। अब इनकी तादाद सिमट कर लगभग 4000 रह गई है। इसका असर रेलवे की आमदनी में पड़ा है। टिकटों से आने वाला साढ़े 9 लाख रुपये का राजस्व अब मात्र साढ़े 4 लाख रुपये आ रहा है। जिन ट्रेनों में हफ्तों और महीनों पूर्व आरक्षण नहीं मिल पाता था उनमें बड़ी संख्या में सीटें खाली जा रही हैं।
कमोवेश यही स्थिति रोडवेज की है।
एआरएम परमानंद ने बताया कि कोरोना के पूर्व डिपो से रोजाना लगभग 7000 यात्री आते-जाते थे। उनसे चार लाख रुपये राजस्व मिलता था। अब 5000 के आसपास यात्री और लगभग तीन लाख रुपये राजस्व आ रहा है। बसों का डीजल खर्च भी निकालना मुश्किल हो रहा है। बताया कि बसों को रोजाना सेनेटाइज किया जा रहा है। स्टैंड में कर्मचारियों व यात्रियों को हाथ धोने के लिए सेनेटाइजर रखाया गया है। यात्रियों को कोरोना के बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
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कोरोना को लेकर हर व्यक्ति सतर्क और सशंकित है। यथा संभव बचाव और परहेज भी हो रहे हैं। मौजूदा सीजन में ट्रेनें और यात्री बसें खचाखच भरी रहती थीं। लेकिन कोरोना नजारा पलट दिया है। ट्रेनों की स्थिति यह है कि मंडल मुख्यालय बांदा से आम दिनों में करीब 9 हजार यात्री रोजाना आते-जाते थे। अब इनकी तादाद सिमट कर लगभग 4000 रह गई है। इसका असर रेलवे की आमदनी में पड़ा है। टिकटों से आने वाला साढ़े 9 लाख रुपये का राजस्व अब मात्र साढ़े 4 लाख रुपये आ रहा है। जिन ट्रेनों में हफ्तों और महीनों पूर्व आरक्षण नहीं मिल पाता था उनमें बड़ी संख्या में सीटें खाली जा रही हैं।
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कमोवेश यही स्थिति रोडवेज की है।
एआरएम परमानंद ने बताया कि कोरोना के पूर्व डिपो से रोजाना लगभग 7000 यात्री आते-जाते थे। उनसे चार लाख रुपये राजस्व मिलता था। अब 5000 के आसपास यात्री और लगभग तीन लाख रुपये राजस्व आ रहा है। बसों का डीजल खर्च भी निकालना मुश्किल हो रहा है। बताया कि बसों को रोजाना सेनेटाइज किया जा रहा है। स्टैंड में कर्मचारियों व यात्रियों को हाथ धोने के लिए सेनेटाइजर रखाया गया है। यात्रियों को कोरोना के बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
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