{"_id":"b4ef8f2b713cfa46bb8f691cc56a525b","slug":"ken-betwa-link-at-the-public-hearing-to-oppose-the-plan-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जन सुनवाई में केन-बेतवा नदी गठजोड़ परियोजना का विरोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जन सुनवाई में केन-बेतवा नदी गठजोड़ परियोजना का विरोध
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 25 Dec 2014 12:02 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केन-बेतवा नदी गठजोड़ परियोजना को लेकर केंद्रीय जल विकास अभिकरण की टीम ने मंगलवार को जनसुनवाई आयोजित की। योजना से प्रभावित होने वाले सैकड़ों ग्रामीणों ने इसका यह कहकर विरोध किया कि उन्हें पहले से इसकी सूचना नहीं दी गई और न आज तक परियोजना की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) की प्रति दी गई है।
विज्ञापन
केंद्रीय मंत्री उमा भारती की पहल के बाद एक बार फिर केन-बेतवा लिंक योजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है। पहले से ही लेटलतीफ चल रही 7615 करोड़ की यह परियोजना अगस्त 2005 में बनाई गई थी। इसमें केंद्र सरकार और यूपी व एमपी सरकरों के बीच त्रिपक्षीय करार पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।
विज्ञापन
राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण इस परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट 31 दिसंबर 2008 को पूरी कर चुका है। इस बीच विरोध और सरकारों की ढिलाई से यह परियोजना शुरू ही नहीं हो सकी। अब इसमें फिर तेजी आई है। तीन दिन पहले लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उमा भारती के बीच इस परियोजना पर बातचीत हुई थी।
विज्ञापन
इसी सिलसिले में अभिकरण ने मंगलवार को पन्ना नेशनल पार्क के निकटवर्ती गांव सीलोन में जन सुनवाई की। इसमें शामिल हुए ग्रामीणों ने केंद्र सरकार के अधिकारियों के समक्ष परियोजना की कार्य प्रणाली पर तमाम सवाल उठाए। बुंदेलखंड भविष्य परिषद और केन रीवर ग्रुप के लोगों ने विरोध जताया।
परिषद के वरिष्ठ कार्यकर्ता पुष्पेंद्र भाई की अगुवाई में ग्रामीणों ने कहा कि वह इस जन सुनवाई को नहीं मानते। उन्हें पहले डीपीआर दी जानी चाहिए थी ताकि वह इसका नफा-नुकसान जान सकते। मांग की कि बुंदेलखंड के बांदा, हमीरपुर, छतरपुर और पन्ना के केन नदी किनारे आबाद गांवों के लोगों को डीपीआर अध्ययन रिपोर्ट की प्रति हिंदी में दी जाए।
खरियाली (पन्ना) गांव के किसान और रिटायर्ड बैंक मैनेजर विश्वदत्त मिश्रा और डोढन गांव के मुन्नालाल यादव ने कहा कि परियोजना से विस्थापित किए जा रहे ग्रामीणों को कम से कम 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा मिले, क्योंकि किसानों की जो जमीन ली जा रही है वो बेहद उपजाऊ है।
केंद्र सरकार परियोजना के लिए ले रही जमीन के बदले में सिंचित भूमि पर छह लाख और असिंचित भूमि पर तीन लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दे रही है। सुनवाई में मौजूद छतरपुर के डीएम ने भी ग्रामीणों को जन सुनवाई के पूर्व डीपीआर ग्रामीणों को दिए जाने की वकालत की।
केंद्रीय अभिकरण की टीम अब 27 दिसंबर को पन्ना नेशनल पार्क क्षेत्र के हिनौता गांव में फिर जन सुनवाई करेगी।
डीएम ग्रामीणों के वफादार, विधायक परियोजना के तरफदार
विस्थापित किए जाने से ग्रामीणों के सामने पेश आने वाली दुश्वारियों की जहां अधिकारी वकालत कर रहे हैं वहीं जन प्रतिनिधि परियोजना अधिकारियों के सुर में सुर मिलाकर बोल रहे हैं। जन सुनवाई में छतरपुर डीएम ने विस्थापितों की बसावट के लिए बनाई गई घटिया सड़क और उनकी परेशानियों का मुद्दा उठाया।
दूसरी तरफ यहां के विधायक आरडी प्रजापति (लौड़ी) और पाठक (बिजावर) ने परियोजना के पक्ष में ग्रामीणों को पाठ पढ़ाया। इस पर ग्रामीण भड़क भी उठे। चेतावनी दी कि बांध निर्माण के लिए एक फावड़ा नहीं चलने देंगे। पुष्पेंद्र भाई के साथ सुभाषचंद्र चौरसिया (महोबा), प्रभाकर त्रिपाठी (बांदा), शशिभाल सिंह (चित्रकूट) ने अधिकारियों को लिखित ज्ञापन देकर जनसुनवाइयों से पूर्व विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और समय से सुनवाई की सूचना दिए जाने की मांग की।