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बर्थ कंट्रोल के लिए अब आई डिवाइस
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sun, 05 Jul 2015 11:06 PM IST
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महिलाएं अब मनचाहे समय पर गर्भ धारण कर सकेंगी। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए नई तकनीक खोज निकाली है। पोस्टमार्टम इंट्रा यूटरन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस (पीआईयूसीडी) विधि से महिलाएं दूसरी संतान अपनी इच्छा के मुताबिक पैदा कर सकेंगी। यह सुविधा सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दी जा रही है। बर्थ कंट्रोल के लिए शासन पहले भी कई योजनाएं लागू कर चुका है। इसमें नसबंदी प्रमुख है।
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लेकिन नसबंदी पद्धति से महिला-पुरुष स्थाई रूप से संतान पैदा करने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसे में लोग नसबंदी विधि अपनाने से कतराते हैं। अब पीआईयूसीडी योजना में महिला को प्रसव के 48 घंटे के अंदर एक डिवाइस लगाई जाएगी। यह डिवाइस 10 वर्षों तक कारगर रहती है। इस दौरान महिला गर्भ धारण नहीं कर सकेगी। अगली संतान हासिल करने के लिए कभी भी इस डिवाइस को हटवाया जा सकेगा।
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चित्रकूटधाम मंडल के चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक डा.एनडी शर्मा ने बताया कि पहली संतान को जन्म देने के बाद अधिकांश महिलाएं दूसरी संतान को कम अवधि में जन्म देने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार नहीं हो पातीं।
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उन्होंने बताया कि बच्चों के पैदा होने के अंतराल को बढ़ाने और अपनी इच्छा के मुताबिक गर्भधारण करने के लिए यह सुविधा आधुनिक और अच्छी है। उन्होंने दावा किया कि इससे कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। बच्चे को जन्म देने के 48 के अंदर इस डिवाइस को लगा दिया जाता है।
इससे महिला को किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं होती। डिवाइस लगाने के लिए महिला और उसके पति की सहमति जरूरी है। डा.शर्मा ने यह भी बताया कि 10 साल बाद भी डिवाइस हटाकर गर्भधारण किया जा सकता है।