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चुनौती भरा दायित्व है सदन चलाना
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 10 Oct 2015 11:21 PM IST
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उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति गणेश शंकर पांडेय
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का कहना है कि राजनीति के बदलते परिवेश और जन प्रतिनिधियों के बदले
व्यवहार के बीच सदन चलाना चुनौती भरा दायित्व है। उन्होंने उत्तर प्रदेश
विधान परिषद की इस बात की सराहना की कि यहां जनहित के मामलों में पक्ष और
विपक्ष दोनों का ही सहयोग मिलता है।
वे शनिवार को बांदा में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी द्वारा आयोजित चित्रकूटधाम मंडल के हज यात्रियों के सम्मान समारोह में शरीक होने आए थे। इस दौरान उन्होंने ‘अमर उजाला’ संवाददाता से संक्षिप्त बातचीत की। कहा कि सभापति का पद संवैधानिक दायित्वों और पाबंदियों से बंधा होता है।
कोई राजनीतिक मुद्दे पर बोला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रदेश विधान परिषद में सरकार और विपक्ष दोनों का ही उन्हें सहयोग मिल रहा है। परिषद में ज्यादातर जनहित के मुद्दों पर ही चर्चा और बहस होती है। उनकी कोशिश होती है कि सभी सदस्यों को साथ लेकर चलें।
सभापति ने नपीतुली भाषा में सरकार और विपक्ष दोनों को ही सराहा। उन्होंने कहा कि विपक्ष जहां प्रभावी ढंग से जनहित के मुद्दे उठाता है, वहीं सरकार उनके समाधान के लिए सकारात्मक प्रयास करती है। अक्सर विधानसभा में पारित प्रस्ताव या विधेयक विधान परिषद में गिर जाते हैं।
उन्हें प्रवर समिति को भेज दिया जाता है। सभापति ने कहा कि विधानसभा हो या विधानपरिषद यहां संख्या बल का गेम है। उन्होंने कहा कि सदनों की कार्रवाई काफी खर्चीली होती है। जनप्रतिनिधियों को चुनने वाले नागरिक उनसे काफी उम्मीदें रखते हैं।
ऐसे में जनप्रतिनिधियों का भी फर्ज है कि सदन का समय जाया न करें। एक-एक मिनट जनहित के मुद्दों पर बिताएं। सभापति से बड़ी संख्या में यहां बसपा के विधान परिषद सदस्यों ने मुलाकात की। मेजबान नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सभापति और सदस्यों की अगवानी की। लगभग दो घंटा समारोह स्थल पर रुकने के बाद सभापति वापस लखनऊ चले गए।
वे शनिवार को बांदा में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी द्वारा आयोजित चित्रकूटधाम मंडल के हज यात्रियों के सम्मान समारोह में शरीक होने आए थे। इस दौरान उन्होंने ‘अमर उजाला’ संवाददाता से संक्षिप्त बातचीत की। कहा कि सभापति का पद संवैधानिक दायित्वों और पाबंदियों से बंधा होता है।
कोई राजनीतिक मुद्दे पर बोला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रदेश विधान परिषद में सरकार और विपक्ष दोनों का ही उन्हें सहयोग मिल रहा है। परिषद में ज्यादातर जनहित के मुद्दों पर ही चर्चा और बहस होती है। उनकी कोशिश होती है कि सभी सदस्यों को साथ लेकर चलें।
सभापति ने नपीतुली भाषा में सरकार और विपक्ष दोनों को ही सराहा। उन्होंने कहा कि विपक्ष जहां प्रभावी ढंग से जनहित के मुद्दे उठाता है, वहीं सरकार उनके समाधान के लिए सकारात्मक प्रयास करती है। अक्सर विधानसभा में पारित प्रस्ताव या विधेयक विधान परिषद में गिर जाते हैं।
उन्हें प्रवर समिति को भेज दिया जाता है। सभापति ने कहा कि विधानसभा हो या विधानपरिषद यहां संख्या बल का गेम है। उन्होंने कहा कि सदनों की कार्रवाई काफी खर्चीली होती है। जनप्रतिनिधियों को चुनने वाले नागरिक उनसे काफी उम्मीदें रखते हैं।
ऐसे में जनप्रतिनिधियों का भी फर्ज है कि सदन का समय जाया न करें। एक-एक मिनट जनहित के मुद्दों पर बिताएं। सभापति से बड़ी संख्या में यहां बसपा के विधान परिषद सदस्यों ने मुलाकात की। मेजबान नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सभापति और सदस्यों की अगवानी की। लगभग दो घंटा समारोह स्थल पर रुकने के बाद सभापति वापस लखनऊ चले गए।