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मासूम के अपहरण में तीन को आजीवन कारावास
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 03 Oct 2015 11:44 PM IST
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बांदा। मासूम के अपहरण के जुर्म में तीन आरोपियों को अदालत
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ने उम्रकैद और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। बबेरू कोतवाली
क्षेत्र हरदौली गांव में इंद्रपाल यादव ने 15 दिसंबर 2010 को रिपोर्ट दर्ज
कराई थी कि पड़ोसी फरीद पठान के यहां इसी गांव के जलालुद्दीन की रिश्तेदारी
और आना-आना है। उसके साथ दिलीप और चंद्रेश सोनी का उठना-बैठना है। यह
दोनों कहीं बाहर के हैं।
इंद्रपाल ने कहा था कि 13 दिसंबर 2010 को दोपहर उसके पांच वर्षीय पुत्र अखिलेश को जलालुद्दीन और उसके साथी कहीं ले गए हैं। रात में अज्ञात व्यक्ति ने आकर उसके घर में 50 हजार रुपये देने पर ही पुत्र को वापस करने की बात कही।
पुलिस ने 16 दिसंबर को ज्वालागंज (फतेहपुर) निवासी दिलीप सोनी के घर छापा मारकर अखिलेश को बरामद कर लिया। जलालुद्दीन (हरदौली) और चंद्रेश सोनी व दिलीप (अरबपुर, फतेहपुर) को गिरफ्तार कर लिया।
तीन बाइक और तमंचा बरामद हुआ। पुलिस ने विवेचना के बाद तीनों के विरुद्ध अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। एडीजीसी आशुतोष मिश्रा ने पांच गवाह पेश किए।
शनिवार को इस मामले का फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश (डकैती) बृजलाल चौरसिया ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की कैद और होगी। घटना के बाद से तीनों आरोपी जेल में हैं।
फर्जी कागजात बनाकर बस चलवाने वाले बस मालिक और परिचालक को सात-सात वर्ष की कैद और चार-चार हजार रुपये जुर्माने की सजा हुई है। यात्री कर अधिकारी वीपी सिंह ने नरैनी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 13 जून 2002 को दोपहर पनगरा नहर के पास यात्रियों से भरी बस की जांच की तो कागजात फर्जी पाए गए।
थाने मेें बस स्वामी रईसउल्ला पुत्र मसर्रत उल्ला (अलीगंज, बांदा) और परिचालक सलीम पुत्र साहबदीन (खुटला) के विरुद्ध रिपोर्ट हुई। पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए।
इंद्रपाल ने कहा था कि 13 दिसंबर 2010 को दोपहर उसके पांच वर्षीय पुत्र अखिलेश को जलालुद्दीन और उसके साथी कहीं ले गए हैं। रात में अज्ञात व्यक्ति ने आकर उसके घर में 50 हजार रुपये देने पर ही पुत्र को वापस करने की बात कही।
पुलिस ने 16 दिसंबर को ज्वालागंज (फतेहपुर) निवासी दिलीप सोनी के घर छापा मारकर अखिलेश को बरामद कर लिया। जलालुद्दीन (हरदौली) और चंद्रेश सोनी व दिलीप (अरबपुर, फतेहपुर) को गिरफ्तार कर लिया।
तीन बाइक और तमंचा बरामद हुआ। पुलिस ने विवेचना के बाद तीनों के विरुद्ध अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। एडीजीसी आशुतोष मिश्रा ने पांच गवाह पेश किए।
शनिवार को इस मामले का फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश (डकैती) बृजलाल चौरसिया ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की कैद और होगी। घटना के बाद से तीनों आरोपी जेल में हैं।
फर्जी कागजात बनाकर बस चलवाने वाले बस मालिक और परिचालक को सात-सात वर्ष की कैद और चार-चार हजार रुपये जुर्माने की सजा हुई है। यात्री कर अधिकारी वीपी सिंह ने नरैनी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 13 जून 2002 को दोपहर पनगरा नहर के पास यात्रियों से भरी बस की जांच की तो कागजात फर्जी पाए गए।
थाने मेें बस स्वामी रईसउल्ला पुत्र मसर्रत उल्ला (अलीगंज, बांदा) और परिचालक सलीम पुत्र साहबदीन (खुटला) के विरुद्ध रिपोर्ट हुई। पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए।