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बुंदेलखंड में दलहन की ब्रांडिंग से ही बढ़ेगी आय

Mon, 10 Feb 2020 11:33 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 10 Feb 2020 11:33 PM IST
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In Bundelkhand, branding of pulses will increase income
बांदा में आयोजित अरहर सम्मेलन में उपस्थित महिला किसान/ समूह की महिलाएं। - फोटो : BANDA
कालिंजर (बांदा)। बुंदेलखंड के किसानों की आय में दस गुना तक की कमी आई है। यहां पर फसलों की पैदावार बढ़ने पर भी किसानों की आय नहीं बढ़ी है। लिहाजा जरूरत है कि किसान खेती को व्यावसायिक स्वरूप दें। अरहर और को ब्रांड के रूप में स्थापित करें।
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यह नजरिया था अरहर दलहन सम्मेलन में शामिल होने आए विशेषज्ञों का। सोमवार को सम्मेलन का आयोजन ऐतिहासिक पर्यटन स्थल कालिंजर दुर्ग के पास कटरा कालिंजर में हुआ। धान व देसी गेहूं की कई किस्में प्रोत्साहित करने, जड़ी-बूटी व पौधों के संरक्षण के लिए लोकप्रिय मध्यप्रदेश से आए पद्मश्री बाबूलाल दाहिया ने कहा कि अरहर और चने की फसल के लिए बुंदेलखंड की माटी बहुत मुफीद है। इस क्षेत्र में खाद डालने की जरूरत नहीं है। बुंदेलखंड की अरहर का जायका अलग है। इसे प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।
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बिहार के मुजफ्फरपुर में किसान चाची के रूप में मशहूर पद्मश्री राजकुमारी देवी ने किसानों को दलहन उत्पाद प्रोडक्ट के रूप में बेचने की सलाह दी। समझाने वाली शैली में कहा कि दाल सेहत दुरुस्त रखती है। परहेज में डाक्टर तमाम चीजें खाने से रोकते हैं पर दाल को मना नहीं करते। यहां के दलहन को ब्रांड जैसी पहचान दी जानी चाहिए। इसके लिए स्वयं सहायता समूह का रास्ता सुझाते हुए बताया कि कि उन्होंने साइकिल पर भ्रमण कर महिला समूह बनाए, जो अब अपने उत्पादों के दम पर पूरी तरह खुशहाल हैं।
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यूपी के बाराबंकी से आए पद्मश्री रामशरण वर्मा और कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के प्रोफेसर मान सिंह भारती का भी जोर था कि व्यावसायिक नजरिए से खेती करते दलहन और उस पर निर्भर किसानों के अच्छे दिन लाए जा सकते हैं।
वॉलमार्ट के डीजीएम डॉ. अरविंद कुमार ने किसानों को सलाह देते कहा कि सही ब्रांडिंग से आमदनी 10 से 12 फीसदी तक बढ़ जाती है। हैदराबाद के कृषि वैज्ञानिक डाक्टर राजेश नूने, कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र सिंह ने अमर एवं आजाद मटर और नरेंद्र अरहर की प्रजाति का प्रयोग करने पर बल दिया।
सांसद आरके सिंह पटेल ने बुंदेलखंड की सरसों को गुणवत्तापरक बताते हुए अपने ब्रांड के रूप में पेश कर बाजार में लाने को कहा। विधायक राजकरन कबीर ने केसीसी से बैंक कर्ज लेकर खेती बढ़ाने की सलाह दी। सम्मेलन के मेजबान डीएम हीरालाल की कोशिश को मंच से लेकर पंडाल तक सभी ने सराहा। कहा कि आयोजन से मिली सीख किसानों को खेती के आधुनिक तरीकों के लिए प्रोत्साहित करेगी।
कुपोषित बच्चों की सेहत संवारेंगी दालें
जिले में 47 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। इनकी खुराक में दाल बढ़ाकर सेहत सुधारी जा सकती है। जिले के दलहन के साथ तिलहन और नरैनी के गुड़ की खास है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी सिलसिले में अरहर सम्मेलन आयोजित हुआ है।
-हीरालाल, जिलाधिकारी बांदा।
चना-मटर-अरहर के फूलों के गुलदस्ते
सम्मेलन में कृषि वैज्ञानिक के रूप में आए अतिथियों को मंच पर दिए गए बुके (गुलदस्ते) भी आकर्षण का केंद्र रहे। ये परंपरागत फूलों की जगह चना, अरहर, सरसों और मटर आदि के फूल और पत्तियों से बनाए गए थे। डीएम ने अतिथियों और प्रगतिशील किसानों को शाल ओढ़ाकर प्रशस्तिपत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
दाल प्रोसेसिंग यूनिट की भी हुई शुरुआत
अरहर सम्मेलन के साथ ही नरैनी में स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित शुरुवाती ग्रामीण उद्यमिता परियोजना के तहत दाल प्रोसेसिंग यूनिट की शुरुआत भी हो गई। डीएम हीरालाल ने उद्घाटन किया। मशीनों की पूजा की गई। सीडीओ सहित ब्लाक प्रमुख अवधेश सिंह और महिला समूहों की सदस्य इस मौके पर उपस्थित रहीं। महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पादों के स्टॉल अतिथियों ने देखे।
विश्व दलहन दिवस पर हुआ सम्मेलन
संयुक्त राष्ट्र प्रतिवर्ष 10 फरवरी को विश्व दलहन दिवस मनाता है। सम्मेलन आयोजक डीएम हीरा लाल ने बताया कि बुंदेलखंड के बांदा में इस सम्मेलन के लिए खास दिन चुना गया था।
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बांदा जिले में दलहनी फसलें---
-अरहर की खेती 17,753 हेक्टेयर में की जाती है। यह खरीफ के कुल क्षेत्रफल का 15.39 फीसदी है।
-चना की खेती 91,110 हेक्टेयर में होती है। यह रबी की कुल फसल का 35.91 प्रतिशत है।
-मसूर की खेती 24,624 हेक्टेयर में हो रही। यह रबी फसल के क्षेत्रफल का 10 फीसदी है।
-जिले में सरसों की खेती 2706 हेक्टेयर में की जाती है। यह रबी क्षेत्रफल का मात्र 0.9 प्रतिशत।
इन प्रमुख संस्थानों ने की भागीदारी---
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर, भारतीय गन्ना अनुसंधान अनुसंस्थान, लखनऊ, निदेशालय रेपसीड-मस्टर्ड रिसर्च, भरतपुर (राजस्थान), इंटरनेशनल क्राप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फार द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स, हैदराबाद, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा।

किसानों व कृषि विज्ञानी सम्मानित
सम्मेलन परिसर के आसपास मेले जैसा नजारा था। कृषि, खेती-किसानी और बागवानी से संबंधित सभी विभागों और स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, बैंक आदि ने यहां अपने 40 स्टॉल लगाए थे। बुंदेलखंडी व्यंजन का स्टॉल भी लगा था। लगभग 65 किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया।

अरहर सम्मेलन में उपस्थित अधिकारी व किसान।

अरहर सम्मेलन में उपस्थित अधिकारी व किसान।- फोटो : BANDA

बांदा ः महिला समूहों के प्रोडक्ट स्टॉल का निरीक्षण करते डीएम, सीडीओ व अन्य अधिकारी।

बांदा ः महिला समूहों के प्रोडक्ट स्टॉल का निरीक्षण करते डीएम, सीडीओ व अन्य अधिकारी।- फोटो : BANDA

बांदा ः औरैया के किसान राधाकांत चौबे को सम्मेलन में सम्मानित करते डीएम हीरा लाल।

बांदा ः औरैया के किसान राधाकांत चौबे को सम्मेलन में सम्मानित करते डीएम हीरा लाल।- फोटो : BANDA

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