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महंगा पड़ा यजीद को सौदा हुसैन का
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 23 Oct 2015 11:38 PM IST
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बांदा। यूं ही नहीं जहां में चर्चा हुसैन का, कुछ देख
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कर हुआ है जमाना हुसैन का। सिर दे के दो जहां की हुकूमत खरीद ली, महंगा
पड़ा यजीद को सौदा हुसैन का। शोहदाए कर्बला के शैदाइयों (प्रेमियों) ने
हजरते हसन-हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत वाली रात पूरी शिद्दत से
मनाई।
अधिकांश ने दिन भर रोजा रखा। रात भर इबादत और दुआ में गुजारी। दूसरी तरफ ढाल सवारी के जुलूस रात भर निकले। डेढ़ सौ से ज्यादा स्थानों पर दहकते अंगारे लुटाकर आग का मातम किया। शिया इमामबाड़ों में मजलिसें हुईं। मस्जिदों और घरों में छोटे मासूम बच्चों ने भी जागकर इबादतें कीं और दुआ मांगी।
नौंवी मोहर्रम की रात ही मैदाने कर्बला (इराक) में हक की हिफाजत के लिए इमाम हुसैन और उनके साथियों ने तत्कालीन बादशाह यजीद की फौज से मोर्चा लिया था। इसी रात शहादत मिली। इसकी याद में परंपरा के मुताबिक यहां शुक्रवार की रात इमामबाड़ों और उसके आसपास और रोशनी व बिजली की सजावट की गई।
नौ कुंतल लकड़ी से तैयार हुए दहकते अंगार लुटाकर हर इमामबाड़े में आग का मातम हुआ। अलाव के बाद इमामबाड़ों से ढाल सवारी के जुलूस निकल पड़े। यह पूरी रात शहर में घूमे। रामा का इमामबाड़ा (अलीगंज), अमर टाकीज तिराहा, गूलरनाका, छावनी, मर्दननाका पुलिस चौकी रोड व मुख्तार रहीम बख्श रोड, खुटला, क्योटरा, निम्नीपार, हाथी खाना, परशुराम तालाब, बंगाली टोला आदि में रात भर ढाल सवारियों की गूंज और दर्शकों की भीड़ रही।
कई स्थानों पर चाय आदि के लंगर हुए। ढाल धारण करने वालों और दर्शकों में बड़ी संख्या में हिंदू व अन्य धर्मों के लोग भी शरीक रहे।
अधिकांश ने दिन भर रोजा रखा। रात भर इबादत और दुआ में गुजारी। दूसरी तरफ ढाल सवारी के जुलूस रात भर निकले। डेढ़ सौ से ज्यादा स्थानों पर दहकते अंगारे लुटाकर आग का मातम किया। शिया इमामबाड़ों में मजलिसें हुईं। मस्जिदों और घरों में छोटे मासूम बच्चों ने भी जागकर इबादतें कीं और दुआ मांगी।
नौंवी मोहर्रम की रात ही मैदाने कर्बला (इराक) में हक की हिफाजत के लिए इमाम हुसैन और उनके साथियों ने तत्कालीन बादशाह यजीद की फौज से मोर्चा लिया था। इसी रात शहादत मिली। इसकी याद में परंपरा के मुताबिक यहां शुक्रवार की रात इमामबाड़ों और उसके आसपास और रोशनी व बिजली की सजावट की गई।
नौ कुंतल लकड़ी से तैयार हुए दहकते अंगार लुटाकर हर इमामबाड़े में आग का मातम हुआ। अलाव के बाद इमामबाड़ों से ढाल सवारी के जुलूस निकल पड़े। यह पूरी रात शहर में घूमे। रामा का इमामबाड़ा (अलीगंज), अमर टाकीज तिराहा, गूलरनाका, छावनी, मर्दननाका पुलिस चौकी रोड व मुख्तार रहीम बख्श रोड, खुटला, क्योटरा, निम्नीपार, हाथी खाना, परशुराम तालाब, बंगाली टोला आदि में रात भर ढाल सवारियों की गूंज और दर्शकों की भीड़ रही।
कई स्थानों पर चाय आदि के लंगर हुए। ढाल धारण करने वालों और दर्शकों में बड़ी संख्या में हिंदू व अन्य धर्मों के लोग भी शरीक रहे।