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ऑक्सीजन लेवल कम तो लेटें पेट के बल
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बांदा। कोरोना संक्रमितों की संख्या में तेजी से हो रहे इजाफे के बीच ऑक्सीजन कमी की भी समस्या हो रही है। ऑक्सीजन स्तर कम होने से पॉजिटिव मरीजों को अस्पताल ले जाना पड़ रहा है। आलम यह है कि समय पर ऑक्सीजन न मिलने से मरीजों की सांसें थम रही हैं। शरीर में आक्सीजन कम होने की समस्या को मरीज पेट के बल लेटकर दूर कर सकते हैं।
पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष कोरोना संक्रमण फेफड़ों पर हमला कर रहा है। संक्रमितों में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से नीचे आ रहा है। सांस फूलने, खांसी, गले में खराश आदि की समस्या हो रही है। ऑक्सीजन का स्तर नीचे गिरने से मरीजों की जान पर बन रही है। तमाम कोरोना संक्रमित होम आइसोलेशन में उपचार कर रहे हैं। ऑक्सीजन की कमी से उन्हें दिक्कत हो रही है। ऐसे में पेट के बल लेटकर ऑक्सीजन की कमी को दूर किया जा सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसके पोस्टर भी जारी किए हैं।
इसके प्रति स्वास्थ्य विभाग लोगों को लगातार जागरूक कर रहा, लेकिन मरीज उपाय किए बगैर अस्पतालों की तरफ भाग रहे हैं। सीएमओ डा. एनडी शर्मा और जिला अस्पताल के चिकित्सक विनीत सचान ने बताया कि ऑक्सीजन स्तर 94 से कम होने पर मरीजों को लेटने की तरीके में थोड़ा बदलाव करना पड़ेगा। 30 मिनट से एक घंटे तक पेट के बल लेटें। एक या दो तकिया सीने के नीचे रख लें। इतनी ही देर दोनों पैर सीधे कर पीठ को किसी जगह टिकाकर बैठने की भी सलाह दी है।
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इंसेट---
ऑक्सीजन कम होने के लक्षण : सांस लेने में दिक्कत। सांस का फूलना। थकान महसूस होना। सीने में दर्द या जलन होना। चलने या उठने में परेशानी।
इंसेट---
ऐसे बढ़ाएं ऑक्सीजन लेवल : ऑक्सीजन लेने में परेशानी होने पर तुरंत पेट के बल लेट जाएं। सिर, कमर, कूल्हे और पैरों के नीचे तकिया रखें। सिर आरामदायक स्थिति में रखें। एक से दो घंटे में लेटने का तरीका बदल लें। समय-समय पर ऑक्सीजन लेवल की जांच करते रहे।
इंसेट---
ऐसे लोग न सोएं पेट के बल : गर्भावस्था के दौरान। गंभीर हृदय रोग से ग्रसित। स्पाइन, फीमर व पेल्विक फ्रैक्चर की स्थिति में। खाने के एक घंटे तक पेट के बल लेटने से बचें।
इंसेट---
घर की रसोई साबित हो रही दवाखाना
चित्रकूट। कोरोना से बचाने के लिए घर की रसोई दवाखाना साबित हो रही है। घरों में अब अजवाइन की भाप ली जा रही है। संक्रमण से बचने को इन दिनों लोग गिलोय, गुरिज, अर्जुन की छाल, काली मिर्च, लौंग, अदरक, अजवाइन आदि का काढ़ा बनाकर सुबह और शाम सेवन कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान आदिकाल से चल रही जड़ी-बूटियों व देसी दवाओं को सुध आ गई है। पतंजलि योग समिति की महिला जिला प्रभारी मंजू केशरवानी ने बताया कि कोरोना संक्रमण बढ़ा तो एलोपैथ के अलावा लोगों को देसी दवाओं की सुध आ गई है। संक्रमण से बचने के लिए घर की रसोई में मौजूद काली मिर्च, अदरक, अजवाइन, लौंग, गुड़, काला नमक समेत देसी दवा गिलोय अर्जुन छाल, गुरिज आदि का काढ़ा बनाकर लोग सुबह-शाम ले रहे हैं। आयुर्वेद चिकित्सक डा. विष्णुदत्त बुधौलिया ने बताया कि कोरोना में अजवाइन को सबसे अधिक कारगर माना जा रहा है। अजवाइन को लोग दिन में कई बार चबा रहे हैं, क्योंकि इससे बलगम साफ हो रहा है। इसके अलावा सांस लेने में दिक्कत नहीं होगी। (संवाद)
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पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष कोरोना संक्रमण फेफड़ों पर हमला कर रहा है। संक्रमितों में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से नीचे आ रहा है। सांस फूलने, खांसी, गले में खराश आदि की समस्या हो रही है। ऑक्सीजन का स्तर नीचे गिरने से मरीजों की जान पर बन रही है। तमाम कोरोना संक्रमित होम आइसोलेशन में उपचार कर रहे हैं। ऑक्सीजन की कमी से उन्हें दिक्कत हो रही है। ऐसे में पेट के बल लेटकर ऑक्सीजन की कमी को दूर किया जा सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसके पोस्टर भी जारी किए हैं।
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इसके प्रति स्वास्थ्य विभाग लोगों को लगातार जागरूक कर रहा, लेकिन मरीज उपाय किए बगैर अस्पतालों की तरफ भाग रहे हैं। सीएमओ डा. एनडी शर्मा और जिला अस्पताल के चिकित्सक विनीत सचान ने बताया कि ऑक्सीजन स्तर 94 से कम होने पर मरीजों को लेटने की तरीके में थोड़ा बदलाव करना पड़ेगा। 30 मिनट से एक घंटे तक पेट के बल लेटें। एक या दो तकिया सीने के नीचे रख लें। इतनी ही देर दोनों पैर सीधे कर पीठ को किसी जगह टिकाकर बैठने की भी सलाह दी है।
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ऑक्सीजन कम होने के लक्षण : सांस लेने में दिक्कत। सांस का फूलना। थकान महसूस होना। सीने में दर्द या जलन होना। चलने या उठने में परेशानी।
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ऐसे बढ़ाएं ऑक्सीजन लेवल : ऑक्सीजन लेने में परेशानी होने पर तुरंत पेट के बल लेट जाएं। सिर, कमर, कूल्हे और पैरों के नीचे तकिया रखें। सिर आरामदायक स्थिति में रखें। एक से दो घंटे में लेटने का तरीका बदल लें। समय-समय पर ऑक्सीजन लेवल की जांच करते रहे।
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ऐसे लोग न सोएं पेट के बल : गर्भावस्था के दौरान। गंभीर हृदय रोग से ग्रसित। स्पाइन, फीमर व पेल्विक फ्रैक्चर की स्थिति में। खाने के एक घंटे तक पेट के बल लेटने से बचें।
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घर की रसोई साबित हो रही दवाखाना
चित्रकूट। कोरोना से बचाने के लिए घर की रसोई दवाखाना साबित हो रही है। घरों में अब अजवाइन की भाप ली जा रही है। संक्रमण से बचने को इन दिनों लोग गिलोय, गुरिज, अर्जुन की छाल, काली मिर्च, लौंग, अदरक, अजवाइन आदि का काढ़ा बनाकर सुबह और शाम सेवन कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान आदिकाल से चल रही जड़ी-बूटियों व देसी दवाओं को सुध आ गई है। पतंजलि योग समिति की महिला जिला प्रभारी मंजू केशरवानी ने बताया कि कोरोना संक्रमण बढ़ा तो एलोपैथ के अलावा लोगों को देसी दवाओं की सुध आ गई है। संक्रमण से बचने के लिए घर की रसोई में मौजूद काली मिर्च, अदरक, अजवाइन, लौंग, गुड़, काला नमक समेत देसी दवा गिलोय अर्जुन छाल, गुरिज आदि का काढ़ा बनाकर लोग सुबह-शाम ले रहे हैं। आयुर्वेद चिकित्सक डा. विष्णुदत्त बुधौलिया ने बताया कि कोरोना में अजवाइन को सबसे अधिक कारगर माना जा रहा है। अजवाइन को लोग दिन में कई बार चबा रहे हैं, क्योंकि इससे बलगम साफ हो रहा है। इसके अलावा सांस लेने में दिक्कत नहीं होगी। (संवाद)