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मानसिक रोगियों की बढ़ती संख्या पर जताई चिंता
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बांदा। विश्व मानसिक दिवस पर रविवार को राजकीय मेडिकल कालेज सभागार में गोष्ठी का आयोजन किया गया। आजादी का अमृत महोत्सव के तहत आयोजित गोष्ठी में मानसिक रोगियों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई गई। साथ ही मेंटल एक्ट-2017 की विसंगतियों पर सवाल उठाए गए।
मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव ने मानसिक रोगियों की वैधानिक स्थिति पर चर्चा की। मेडिकल कालेज के मानसिक स्वास्थ्य रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र मिश्रा ने मेंटल एक्ट-2017 की विसंगतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन विसंगतियों से मानसिक रोगियों को दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रश्न चिह्न खड़ा हो रहा है। विसंगतियों का समाधान जल्द होना चाहिए।
बोर्ड के सदस्य डॉ. जर्नादन प्रसाद त्रिपाठी ने आकड़ों के साथ बताया कि जनपद में आत्महत्याओं की घटनाएं बढ़ीं हैं। बोर्ड से संबंधित अन्य जानकारियां भी दीं। कहा कि आत्महत्याएं रोकने के लिए मानसिक रोगियों को विधिक अधिकारों की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम के अंत में डॉ. हिमांशु सिंह ने आभार जताया। इस मौके पर रामप्रताप गुप्त, डीईओ राशिद अहमद व नासिर अहमद, रूबी जैनब, सुमन शुक्ला, बुशरा जैदी, रोहिणी देवी, सुमन, रमेश पाल, अरशद, नदीम, मुसाब, खुर्शीद आदि मौजूद रहे। उधर, तहसील मुख्यालयों में भी अमृत महोत्सव के तहत साहित्य बांटा गया।
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गोष्ठी में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम/प्रभारी सचिव जिला विधिक प्राधिकरण गरिमा सिंह ने बताया कि मानसिक रोगियों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर उनकी सुविधा और संरक्षण के लिए जिला न्यायालय में मानसिक स्वास्थ्य बोर्ड की स्थापना की गई है। जनपद न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित मानसिक स्वास्थ्य बोर्ड में मानसिक रोगियों को कानूनी सहायता और उनकी संपत्ति को संरक्षण के साथ मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
डिप्रेशन से बचना है तो खुश रहें
बांदा। मानसिक रोग और डिप्रेशन से बचना है तो खुश रहना सीखें। आधुनिक जीवनशैली से मनोरोगी बढ़ रहे हैं। खासकर कोरोना के भय ने लोगों के दिमाग पर ज्यादा असर डाला है। इसकी सबसे बड़ी वजह अज्ञानता है। मौजूदा समय में 18 से 40 वर्ष आयु के मानसिक रोगी ज्यादा सामने आ रहे हैं। यह बात जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेष डॉ. हरदयाल ने कही। उनका कहना है कि मानसिक रोग से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी है।
उन्होंने बताया कि खानपान और आधुनिक जीवन शैली ने लोगों की जिंदगी बदल दी है। लोग आरामदायक जीवन जीना चाहते हैं। लेकिन आर्थिक व अन्य समस्या आड़े आने से जीवन पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव उन्हें मानसिक रोगी बना रहा है। क्योंकि बिना पैसे के आरामदायक जीवन जीना संभव नहीं है। पिछले दो सालों में कोरोना ने भी मानसिक रोगी बढ़ा दिए हैं। इसके अलावा मानसिक रोग की अन्य वजहें बेरोजगारी, घर में तनाव, संस्कारों में कमी, शराब, बदली जीवनशैली भी है। मनमुताबिक काम न होने पर लोगों में चिड़चिड़ापन आ रहा है। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में लगभग 20 फीसदी नए मानसिक रोगी बढ़े हैं। कोरोना काल के पहले बमुश्किल 100 मरीज ओपीडी/काउंसलिंग में आते थे। अब इनकी संख्या बढ़कर रोजाना 125-30 पहुंच गई है।
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मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव ने मानसिक रोगियों की वैधानिक स्थिति पर चर्चा की। मेडिकल कालेज के मानसिक स्वास्थ्य रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र मिश्रा ने मेंटल एक्ट-2017 की विसंगतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन विसंगतियों से मानसिक रोगियों को दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रश्न चिह्न खड़ा हो रहा है। विसंगतियों का समाधान जल्द होना चाहिए।
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बोर्ड के सदस्य डॉ. जर्नादन प्रसाद त्रिपाठी ने आकड़ों के साथ बताया कि जनपद में आत्महत्याओं की घटनाएं बढ़ीं हैं। बोर्ड से संबंधित अन्य जानकारियां भी दीं। कहा कि आत्महत्याएं रोकने के लिए मानसिक रोगियों को विधिक अधिकारों की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम के अंत में डॉ. हिमांशु सिंह ने आभार जताया। इस मौके पर रामप्रताप गुप्त, डीईओ राशिद अहमद व नासिर अहमद, रूबी जैनब, सुमन शुक्ला, बुशरा जैदी, रोहिणी देवी, सुमन, रमेश पाल, अरशद, नदीम, मुसाब, खुर्शीद आदि मौजूद रहे। उधर, तहसील मुख्यालयों में भी अमृत महोत्सव के तहत साहित्य बांटा गया।
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गोष्ठी में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम/प्रभारी सचिव जिला विधिक प्राधिकरण गरिमा सिंह ने बताया कि मानसिक रोगियों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर उनकी सुविधा और संरक्षण के लिए जिला न्यायालय में मानसिक स्वास्थ्य बोर्ड की स्थापना की गई है। जनपद न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित मानसिक स्वास्थ्य बोर्ड में मानसिक रोगियों को कानूनी सहायता और उनकी संपत्ति को संरक्षण के साथ मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
डिप्रेशन से बचना है तो खुश रहें
बांदा। मानसिक रोग और डिप्रेशन से बचना है तो खुश रहना सीखें। आधुनिक जीवनशैली से मनोरोगी बढ़ रहे हैं। खासकर कोरोना के भय ने लोगों के दिमाग पर ज्यादा असर डाला है। इसकी सबसे बड़ी वजह अज्ञानता है। मौजूदा समय में 18 से 40 वर्ष आयु के मानसिक रोगी ज्यादा सामने आ रहे हैं। यह बात जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेष डॉ. हरदयाल ने कही। उनका कहना है कि मानसिक रोग से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी है।
उन्होंने बताया कि खानपान और आधुनिक जीवन शैली ने लोगों की जिंदगी बदल दी है। लोग आरामदायक जीवन जीना चाहते हैं। लेकिन आर्थिक व अन्य समस्या आड़े आने से जीवन पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव उन्हें मानसिक रोगी बना रहा है। क्योंकि बिना पैसे के आरामदायक जीवन जीना संभव नहीं है। पिछले दो सालों में कोरोना ने भी मानसिक रोगी बढ़ा दिए हैं। इसके अलावा मानसिक रोग की अन्य वजहें बेरोजगारी, घर में तनाव, संस्कारों में कमी, शराब, बदली जीवनशैली भी है। मनमुताबिक काम न होने पर लोगों में चिड़चिड़ापन आ रहा है। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में लगभग 20 फीसदी नए मानसिक रोगी बढ़े हैं। कोरोना काल के पहले बमुश्किल 100 मरीज ओपीडी/काउंसलिंग में आते थे। अब इनकी संख्या बढ़कर रोजाना 125-30 पहुंच गई है।