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बाघों में भी लगाए जाएंगे जीपीएस कॉलर
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बांदा। बुंदेलखंड में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में गिद्धों के बाद अब वनराज यानी बाघ (टाइगर) को भी जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) कॉलर से लैस किया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों की मंजूरी मिलने के बाद वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने इसके लिए हरी झंडी भी दे दी है।
पिछले दो दिनों से पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में ये कार्य शुरू भी हो गया है। यहां कुल 14 बाघों को जीपीएस सैटेलाइट कॉलर लगाए जाएंगे। जीपीएस कॉलर लगाने के बाद बाघों की गतिविधियों पर पार्क प्रशासन पूरी नजर रखेगा।
पार्क प्रशासन के मुताबिक, अब तक एक अवयस्क बाघिन को टीम ने कॉलर लगाया है। इसके अलावा चार बाघों को जीपीएस लगाने वाली टीम ने कॉलर से लैस कर दिया है। दिसंबर की शुरुआत में पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में गिद्धों को रेडियो टैग लगाए गए थे। गिद्धों पर यह कार्य देश में पहली बार हो रहा है।
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इसके पीछे वन विभाग की मंशा है कि टैगिंग के जरिए गिद्धों की गतिविधियों और उनके स्थलों, प्रवास तथा लैंड स्केप में उपस्थिति आदि के बारे में जानकारी मिलती रहेगी। अब पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में बाघों पर यह कार्य शुरू हो गया है, जो देश में यह पहली बार हो रहा है।
इस बाबत वन विभाग का कहना है कि जीपीएस कॉलर लगाए जाने के बाद पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के अधिकारियों और कर्मचारियों को बाघों की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा। जीपीएस कॉलर लगा होने की वजह से उनकी लोकेशन हर समय पार्क प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों को मिलती रहेगी। उधर, बाघों के बस्ती या आबादी के नजदीक पहुंचने की भी लोकेशन मिलते ही पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क की टीम अलर्ट हो जाएगी।
पन्ना टाइगर्स का आकर्षण है केन नदी
बुंदेलखंड के पन्ना और छतरपुर (मध्यप्रदेश) के जनपदों में स्थित है पन्ना राष्ट्रीय उद्यान (पन्ना नेशनल रिजर्व टाइगर)। इसे 1981 में वन्य जीव अभ्यारण्य के रूप में घोषित किया गया था। इसका क्षेत्रफल 542.67 वर्ग किलोमीटर है। 25 अगस्त 2011 को इसे बायोस्फीयर रिजर्व के लिए भी नामित किया गया था।
इस पार्क को वर्ष 2007 में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने देश के सर्वश्रेष्ठ रखरखाव वाले राष्ट्रीय उद्यान के रूप में उत्कृष्टता का पुरस्कार दिया था। पन्ना टाइगर्स का खास आकर्षण केन नदी है। कहा जाता है कि पांडवों ने अपना अधिकांश समय पन्ना में बिताया था। महाभारत में इसका उल्लेख भी है।
जीपीएस बताती है पोजिशन
पन्ना रिजर्व टाइगर पार्क में दुर्लभ वन्य जीव और पक्षियों को संरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार और वन मंत्रालय की कोशिशें जारी हैं। विलुप्त हो रहे गिद्धों को पिछले पखवाड़े रेडियो टैगिंग लगाकर यहां संरक्षित किया गया है। अब दूसरे चरण में बाघों की बारी है। पन्ना टाइगर बाघ का भी मुख्य अड्डा कहा जाता है। जीपीएस यानी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम कॉलर से इनकी किसी भी पोजिशन का पता चलता रहेगा।
हाल के दिनों में कई बाघों की हुई है मौत
बाघों को जीपीएस कॉलर सिस्टम लगाने की सुध की शायद यह भी वजह रही हो कि हाल के कुछ दिनों में पन्ना टाइगर रिजर्व में कई बाघों की मौत हुई है। अगस्त में वेटिंग के दौरान यहां बाघों के बीच हुए संघर्ष में एक युवा बाघ घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई थी। तीन दिन बाद आठ किलोमीटर दूर पाठा क्षेत्र में केन नदी में उसका शव मिला था। कॉलर सिस्टम से इन घटनाओं पर भी काफी हद तक लगाम लगाई जा सकेगी।
6 फीसदी की दर से वृद्धि, देश में 2967 बाघ
बाघ (टाइगर) बेहद दुर्लभ वन्य जीव है। पूरे देश में इनकी मौजूदा संख्या करीब 2967 है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा कई वर्षों से संरक्षण के लिए की जा रही कवायदों से संख्या में इजाफा हो रहा है। हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने बाघों पर एक रिपोर्ट स्टेटस ऑफ टाइगर्स- कोप्रिडेटर्स एंड प्रे इन इंडिया जारी की है।
जिसमें बताया गया कि वर्ष 2006 में देश में कुल 1411 बाघ थे। 2010 में ये बढ़कर 1706 और 2014 में 2226 हो गए। पिछली गणना में संख्या 2967 पहुंच गई। बाघों की संख्या में हर साल औसतन 6 फीसदी की दर से बढ़ोतरी हो रही है। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, दुनिया के 70 फीसदी बाघ भारत के जंगल में पाए जाते हैं। इनमें पन्ना टाइगर भी शामिल है।
मध्य प्रदेश है बाघों का राज्य
देश में सबसे ज्यादा बाघ मध्य प्रदेश में हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, यहां लगभग 526 बाघ हैं। राज्य में एक बाघिन ऐसी है जो अब तक 29 शावकों को जन्म दे चुकी है। मध्य प्रदेश को बाघ राज्य का दर्जा मिला हुआ है।
पहनाए जा रहे जीपीएस कॉलर में सैटेलाइट सिस्टम है। सैटेलाइट के जरिए बाघों के स्वभाव, बायलॉजी, मूवमेंट समझा जा सकेगा। पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में 14 बाघ हैं, इनमें आठ बाघ फिलहाल पार्क में हैं। शेष छह बाघ सीमा से बाहर चले गए हैं। उनके मूवमेंट की जानकारी का भी प्रयास किया जा रहा है। दो दिन पूर्व पन्ना का अमानगंज बफर बीट में एक अवयस्क बाघिन को टीम ने कॉलर पहनाई है। अन्य बाघों की भी तलाश जारी है।
-उत्तम शर्मा, फील्ड डायरेक्टर, पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क।
दो साल में सात बाघ और तेंदुओं की मौत
चित्रकूट। यूपी और एमपी क्षेत्र में दो साल में सात बाघों और तेंदुओं की मौत हो चुकी है। अकेले इसी साल पांच बाघ और तेंदुओं की मौत हो चुकी है। जिले की सीमा से सटे मप्र के जंगलों में पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के बाघ व तेंदुए जंगलों में घूमते रहते हैं। इसी साल दिसंबर में एमपी क्षेत्र में एक तेंदुआ व एक बाघ की मौत हो गई।
यूपी क्षेत्र के मारकुंडी क्षेत्र मे रेलवे ट्रैक पर एक बाघ मृत मिला था। मानिकपुर क्षेत्र के जंगल में भी एक बाघ का शव मिला था। पिछले साल मानिकपुर क्षेत्र के गढ़चपा रेंज में दो बाघों के शव मिले थे।
रानीपुर वन्य जीव विहार क्षेत्र के वन्य प्रतिपालक जीडी मिश्रा ने बताया कि ज्यादातर बाघ व तेंदुओं का मूवमेंट चित्रकूट के जंगलों में रहता है, लेकिन यह सब पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र से आते हैं और कुछ दिनों बाद लौट जाते हैं।
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पिछले दो दिनों से पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में ये कार्य शुरू भी हो गया है। यहां कुल 14 बाघों को जीपीएस सैटेलाइट कॉलर लगाए जाएंगे। जीपीएस कॉलर लगाने के बाद बाघों की गतिविधियों पर पार्क प्रशासन पूरी नजर रखेगा।
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पार्क प्रशासन के मुताबिक, अब तक एक अवयस्क बाघिन को टीम ने कॉलर लगाया है। इसके अलावा चार बाघों को जीपीएस लगाने वाली टीम ने कॉलर से लैस कर दिया है। दिसंबर की शुरुआत में पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में गिद्धों को रेडियो टैग लगाए गए थे। गिद्धों पर यह कार्य देश में पहली बार हो रहा है।
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इसके पीछे वन विभाग की मंशा है कि टैगिंग के जरिए गिद्धों की गतिविधियों और उनके स्थलों, प्रवास तथा लैंड स्केप में उपस्थिति आदि के बारे में जानकारी मिलती रहेगी। अब पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में बाघों पर यह कार्य शुरू हो गया है, जो देश में यह पहली बार हो रहा है।
इस बाबत वन विभाग का कहना है कि जीपीएस कॉलर लगाए जाने के बाद पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के अधिकारियों और कर्मचारियों को बाघों की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा। जीपीएस कॉलर लगा होने की वजह से उनकी लोकेशन हर समय पार्क प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों को मिलती रहेगी। उधर, बाघों के बस्ती या आबादी के नजदीक पहुंचने की भी लोकेशन मिलते ही पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क की टीम अलर्ट हो जाएगी।
पन्ना टाइगर्स का आकर्षण है केन नदी
बुंदेलखंड के पन्ना और छतरपुर (मध्यप्रदेश) के जनपदों में स्थित है पन्ना राष्ट्रीय उद्यान (पन्ना नेशनल रिजर्व टाइगर)। इसे 1981 में वन्य जीव अभ्यारण्य के रूप में घोषित किया गया था। इसका क्षेत्रफल 542.67 वर्ग किलोमीटर है। 25 अगस्त 2011 को इसे बायोस्फीयर रिजर्व के लिए भी नामित किया गया था।
इस पार्क को वर्ष 2007 में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने देश के सर्वश्रेष्ठ रखरखाव वाले राष्ट्रीय उद्यान के रूप में उत्कृष्टता का पुरस्कार दिया था। पन्ना टाइगर्स का खास आकर्षण केन नदी है। कहा जाता है कि पांडवों ने अपना अधिकांश समय पन्ना में बिताया था। महाभारत में इसका उल्लेख भी है।
जीपीएस बताती है पोजिशन
पन्ना रिजर्व टाइगर पार्क में दुर्लभ वन्य जीव और पक्षियों को संरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार और वन मंत्रालय की कोशिशें जारी हैं। विलुप्त हो रहे गिद्धों को पिछले पखवाड़े रेडियो टैगिंग लगाकर यहां संरक्षित किया गया है। अब दूसरे चरण में बाघों की बारी है। पन्ना टाइगर बाघ का भी मुख्य अड्डा कहा जाता है। जीपीएस यानी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम कॉलर से इनकी किसी भी पोजिशन का पता चलता रहेगा।
हाल के दिनों में कई बाघों की हुई है मौत
बाघों को जीपीएस कॉलर सिस्टम लगाने की सुध की शायद यह भी वजह रही हो कि हाल के कुछ दिनों में पन्ना टाइगर रिजर्व में कई बाघों की मौत हुई है। अगस्त में वेटिंग के दौरान यहां बाघों के बीच हुए संघर्ष में एक युवा बाघ घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई थी। तीन दिन बाद आठ किलोमीटर दूर पाठा क्षेत्र में केन नदी में उसका शव मिला था। कॉलर सिस्टम से इन घटनाओं पर भी काफी हद तक लगाम लगाई जा सकेगी।
6 फीसदी की दर से वृद्धि, देश में 2967 बाघ
बाघ (टाइगर) बेहद दुर्लभ वन्य जीव है। पूरे देश में इनकी मौजूदा संख्या करीब 2967 है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा कई वर्षों से संरक्षण के लिए की जा रही कवायदों से संख्या में इजाफा हो रहा है। हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने बाघों पर एक रिपोर्ट स्टेटस ऑफ टाइगर्स- कोप्रिडेटर्स एंड प्रे इन इंडिया जारी की है।
जिसमें बताया गया कि वर्ष 2006 में देश में कुल 1411 बाघ थे। 2010 में ये बढ़कर 1706 और 2014 में 2226 हो गए। पिछली गणना में संख्या 2967 पहुंच गई। बाघों की संख्या में हर साल औसतन 6 फीसदी की दर से बढ़ोतरी हो रही है। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, दुनिया के 70 फीसदी बाघ भारत के जंगल में पाए जाते हैं। इनमें पन्ना टाइगर भी शामिल है।
मध्य प्रदेश है बाघों का राज्य
देश में सबसे ज्यादा बाघ मध्य प्रदेश में हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, यहां लगभग 526 बाघ हैं। राज्य में एक बाघिन ऐसी है जो अब तक 29 शावकों को जन्म दे चुकी है। मध्य प्रदेश को बाघ राज्य का दर्जा मिला हुआ है।
पहनाए जा रहे जीपीएस कॉलर में सैटेलाइट सिस्टम है। सैटेलाइट के जरिए बाघों के स्वभाव, बायलॉजी, मूवमेंट समझा जा सकेगा। पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में 14 बाघ हैं, इनमें आठ बाघ फिलहाल पार्क में हैं। शेष छह बाघ सीमा से बाहर चले गए हैं। उनके मूवमेंट की जानकारी का भी प्रयास किया जा रहा है। दो दिन पूर्व पन्ना का अमानगंज बफर बीट में एक अवयस्क बाघिन को टीम ने कॉलर पहनाई है। अन्य बाघों की भी तलाश जारी है।
-उत्तम शर्मा, फील्ड डायरेक्टर, पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क।
दो साल में सात बाघ और तेंदुओं की मौत
चित्रकूट। यूपी और एमपी क्षेत्र में दो साल में सात बाघों और तेंदुओं की मौत हो चुकी है। अकेले इसी साल पांच बाघ और तेंदुओं की मौत हो चुकी है। जिले की सीमा से सटे मप्र के जंगलों में पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क के बाघ व तेंदुए जंगलों में घूमते रहते हैं। इसी साल दिसंबर में एमपी क्षेत्र में एक तेंदुआ व एक बाघ की मौत हो गई।
यूपी क्षेत्र के मारकुंडी क्षेत्र मे रेलवे ट्रैक पर एक बाघ मृत मिला था। मानिकपुर क्षेत्र के जंगल में भी एक बाघ का शव मिला था। पिछले साल मानिकपुर क्षेत्र के गढ़चपा रेंज में दो बाघों के शव मिले थे।
रानीपुर वन्य जीव विहार क्षेत्र के वन्य प्रतिपालक जीडी मिश्रा ने बताया कि ज्यादातर बाघ व तेंदुओं का मूवमेंट चित्रकूट के जंगलों में रहता है, लेकिन यह सब पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र से आते हैं और कुछ दिनों बाद लौट जाते हैं।