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गूगल पर अपलोड होगी शौचालयों की फोटो
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 10 Oct 2015 12:03 AM IST
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बांदा। प्रधान और सचिव स्वच्छ शौचालयों के निर्माण
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में झूठी रिपोर्ट भेजकर शासन और अफसरों को गुमराह नहीं कर सकेंगे। शासन ने
गांवों में निर्मित या निर्माणाधीन शौचालयों की फोटो गूगल पर अपलोड करने के
निर्देश दिए हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में नियुक्त स्वच्छता दूत और प्रेरक शौचालयों की फोटो खींचेंगे। जीपीआरएस सिस्टम के जरिये तत्काल गूगल पर अपलोड हो जाएगी। इससे शासन को तुरंत शौचालयों की हकीकत का पता लग जाएगी।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2014-15 में डा. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम योजना में चयनित गांवों में 3909 स्वच्छ शौचालयों के लिए करीब तीन करोड़ रुपये जारी हुए थे। ग्राम पंचायत विभाग ने 100 फीसदी शौचालयों के निर्माण की रिपोर्ट शासन को भेजी थी, जबकि अधिकांश शौचालय अधूरे हैं।
चालू वर्ष 2015-16 के चयनित 28 लोहिया गांवों में 5856 शौचालयों के लिए सात करोड़ दो लाख रुपये अवमुक्त हुए हैं। इसके अलावा अति कुपोषित, अल्पसंख्यक बाहुल्य और सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित गांवों में भी प्रति शौचालय 10 हजार रुपये की लागत से निर्माण कराया जा रहा है।
ग्राम प्रधान व सचिव साठगांठ कर कागजों में शौचालय बनवाकर सरकारी धन का बंदरबांट करते हैं। सरकार बीडीओ और गांवों में तैनात कर्मचारियों के माध्यम से इसकी रिपोर्ट लेती रहती है। कार्रवाई से बचने के लिए अधिकारी और कर्मचारी अधूरे शौचालयों को भी पूर्ण दिखा देते हैं।
शासन ने इस झूठ को पकड़ने के लिए नई व्यवस्था बनाई है। ब्लाकों में तैनात अधिकारियों से कहा है कि वे गांव में नियुक्त स्वच्छता दूत व प्रेरक के जरिये पूर्ण रूप से निर्मित शौचालयों की फोटो सीधे गूगल पर अपलोड कराएं। इसके लिए स्वच्छता दूत व प्रेरकों के मोबाइल में जीपीएस सिस्टम का विशेष साफ्टवेयर लोड किया है।
इस साफ्टवेयर से जैसे ही वे गांव में निर्मित शौचालय की फोटो खींचेंगे, वह स्वत: गूगल पर अपलोड हो जाएगी। फोटो अपलोड होने के साथ ही फोटो खींचे जाने का दिन, समय व स्थान भी प्रदर्शित होगा। फोटो खींचते समय यदि मोबाइल में नेटवर्क नहीं होगा तो नेटवर्क आते ही यह प्रक्रिया खुद-ब-खुद पूरी हो जाएगी।
शासन के इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा। सभी खंड विकास अधिकारियों को ग्राम पंचायतों में तैनात स्वच्छता दूत व प्रेरकों के मोबाइल में जीपीआरएस सिस्टम का विशेष साफ्टवेयर लोड करने के निर्देश दिए गए हैं।
-रणधीर सिंह, डीपीआरओ।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में नियुक्त स्वच्छता दूत और प्रेरक शौचालयों की फोटो खींचेंगे। जीपीआरएस सिस्टम के जरिये तत्काल गूगल पर अपलोड हो जाएगी। इससे शासन को तुरंत शौचालयों की हकीकत का पता लग जाएगी।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2014-15 में डा. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम योजना में चयनित गांवों में 3909 स्वच्छ शौचालयों के लिए करीब तीन करोड़ रुपये जारी हुए थे। ग्राम पंचायत विभाग ने 100 फीसदी शौचालयों के निर्माण की रिपोर्ट शासन को भेजी थी, जबकि अधिकांश शौचालय अधूरे हैं।
चालू वर्ष 2015-16 के चयनित 28 लोहिया गांवों में 5856 शौचालयों के लिए सात करोड़ दो लाख रुपये अवमुक्त हुए हैं। इसके अलावा अति कुपोषित, अल्पसंख्यक बाहुल्य और सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित गांवों में भी प्रति शौचालय 10 हजार रुपये की लागत से निर्माण कराया जा रहा है।
ग्राम प्रधान व सचिव साठगांठ कर कागजों में शौचालय बनवाकर सरकारी धन का बंदरबांट करते हैं। सरकार बीडीओ और गांवों में तैनात कर्मचारियों के माध्यम से इसकी रिपोर्ट लेती रहती है। कार्रवाई से बचने के लिए अधिकारी और कर्मचारी अधूरे शौचालयों को भी पूर्ण दिखा देते हैं।
शासन ने इस झूठ को पकड़ने के लिए नई व्यवस्था बनाई है। ब्लाकों में तैनात अधिकारियों से कहा है कि वे गांव में नियुक्त स्वच्छता दूत व प्रेरक के जरिये पूर्ण रूप से निर्मित शौचालयों की फोटो सीधे गूगल पर अपलोड कराएं। इसके लिए स्वच्छता दूत व प्रेरकों के मोबाइल में जीपीएस सिस्टम का विशेष साफ्टवेयर लोड किया है।
इस साफ्टवेयर से जैसे ही वे गांव में निर्मित शौचालय की फोटो खींचेंगे, वह स्वत: गूगल पर अपलोड हो जाएगी। फोटो अपलोड होने के साथ ही फोटो खींचे जाने का दिन, समय व स्थान भी प्रदर्शित होगा। फोटो खींचते समय यदि मोबाइल में नेटवर्क नहीं होगा तो नेटवर्क आते ही यह प्रक्रिया खुद-ब-खुद पूरी हो जाएगी।
शासन के इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा। सभी खंड विकास अधिकारियों को ग्राम पंचायतों में तैनात स्वच्छता दूत व प्रेरकों के मोबाइल में जीपीआरएस सिस्टम का विशेष साफ्टवेयर लोड करने के निर्देश दिए गए हैं।
-रणधीर सिंह, डीपीआरओ।