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अलविदा सुपर मॉम: पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में बाघों का कुनबा बढ़ाने वाली बाघिन नहीं रही

Tue, 18 Jan 2022 07:11 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Tue, 18 Jan 2022 07:11 PM IST
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Goodbye super mom:  tigress who raised family of tigers in Panna Tiger Reserve Park is no more
अपने शावकों के साथ पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में विचरण करती बाघिन। - फोटो : amar ujala
बुंदेलखंड के विख्यात पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क से दुख भरी खबर आई है। यहां बाघों का कुनबा बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाने वाली ‘सुपर मॉम बाघिन’ की मौत हो गई है। टाइगर रिजर्व पेंच जंगल में इसने अंतिम सांस ली। पार्क प्रशासन ने इसे स्वाभाविक मृत्यु बताया। वन्य कर्मियों ने फूलों से सजी चिता में इसका ससम्मान अंतिम संस्कार किया है।
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और वन मंत्री ने भी शोक जताया है। पेंच टाइगर रिजर्व की बाघिन "क्वीन ऑफ पेंच" का कनेक्शन मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व से भी है। तीन दिन पूर्व पेंच जंगल मे चल बसी विश्व प्रसिद्ध बाघिन की बेटी को बाघ पुनर्स्थापना योजना के तहत 22 जनवरी, 2014 को पन्ना रिजर्व टाइगर लाया गया था।
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लाइट कलर (गोरे रंग) वाली इस बाघिन को पन्ना टाइगर रिजर्व में सबसे सुंदर बाघिन का रुतबा हासिल है। लगभग 11 वर्ष की हो चुकी इस खूबसूरत बाघिन ने पन्ना टाइगर रिजर्व में आकर यहां बाघों की वंश वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस बाघिन ने यहां अब तक 7 बार में 17 शावकों को जन्म दिया है। कॉलर वाली बाघिन ( मृतक) की संतान बाघिन टी-6 पन्ना में अपनी मां की विरासत को आगे बढ़ा रही है।
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पेंच टाइगर रिजर्व के पूर्व फील्ड डॉयरेक्टर विक्रम सिंह परिहार बताते हैं कि अमूमन जंगल में बाघ का जीवन औसतन 12 से 15 साल होता है, लेकिन रणथम्भौर की मछ्ली बाघिन 20 साल तक जीवित रही। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए यह बाघिन खास आकर्षण का केंद्र थी। इसे पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क की धरोहर माना जाता था। बाघों की संख्या बढ़ाने और मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा दिलाने में भी इसकी मुख्य भूमिका रही। 

चर्चित आदिवासी महिला ने दी मुखाग्नि 
सुपर मॉम बाघिन की चिता को मुखाग्नि स्थानीय आदिवासी महिला शांता बाई ने दी। नम आंखों के बीच उन्होंने कहा कि पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क की शान चली गई। हम सभी उसे बहुत याद करेेंगे। शांता बाई यहां की ऐसी चर्चित आदिवासी महिला हैं जिन्होंने अपने गांव कर्माझिरी में शराब पर पाबंदी और शिकार पर रोक लगवाई। दाह संस्कार के दौरान रिजर्व टाइगर के क्षेत्र संचालक अशोक मिश्रा, उप संचालक अधर गुप्ता, सहायक वन संरक्षक बीपीपी तिवारी, परिक्षेत्र अधिकारी आशीष खोबरा गड़े, जिला पंचायत सदस्य रामगोपाल जायसवाल, गाइड और रिसॉर्ट प्रतिनिधि मौजूद रहे। 

सुपर मॉम के 29 शावकों में 23 सही सलामत 
पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क और बाघों पर विशेष दिलचस्पी व नजर रखने वाले विक्रम सिंह परिहार बताते हैं कि इस बाघिन ने अपने तीसरे प्रसव में पांच शावकों को जन्म दिया था। आमतौर पर जन्म के बाद 50 फीसदी शावक जिंदा रहते हैं, लेकिन सुपर मॉम के बच्चों का जीवन दर 80 फीसदी रहा। उसके 29 बच्चों में 23 सही सलामत हैं। इसमें अपने शावकों और इलाके को सुरक्षित रखने की जबरदस्त क्षमता थी। पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि इसने अपना पूरा जीवन जीया। उसके निशान हर कहीं मौजूद हैं। उन्हें मिटाया नहीं जा सकता।

टी-15 था दस्तावेजी नाम
रिजर्व पार्क के अधिकारी बताते हैं कि वर्ष 2008 में इस बाघिन को रेडियो कॉलर पहनाया गया था। इसीलिए वह कॉलर वाली बाघिन कही जाती थी। टी-15 दस्तावेजी नाम दिया गया था। 
 
इस अंदाज में मिली श्रद्धांजलि
इस रानी के शावकों की दहाड़ से मध्य प्रदेश के जंगल सदैव गुंजायमान रहेंगे। यह जंगल सुपर मॉम को हमेशा याद रखेगा। शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश

सुपर टाइग्रेस मॉम कहलाने वाली बाघिन की मृत्यु वन विभाग और वन्य जीव प्रेमियों के लिए अपूर्णनीय क्षति है। वन विभाग अपनी भावांजलि अर्पित करता है। 
कुंवर विजय शाह, वन मंत्री, मध्यप्रदेश 

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