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‘अलविदा-अलविदा या शहरुल रमजान’

Fri, 29 Apr 2022 11:18 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 29 Apr 2022 11:18 PM IST
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'Goodbye-Goodbye or Shahrul Ramadan'
'Goodbye-Goodbye or Shahrul Ramadan' - फोटो : BANDA
बांदा। ‘अलविदा-अलविदा या शहरुल रमजान’। रमजान माह के आखिरी जुमा को अलविदा के रूप में अदा किया गया। नमाज में विदाई का खुतबा सुन तमाम रोजेदारों की आंखों में आंसू आ गए। शहर की मुख्य नवाबी जामा मस्जिद सहित पूरे जनपद की मस्जिदों में अलविदा की नमाज में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ी। रोजेदारों और नमाजियों ने मुल्क की तरक्की, अमन और आपसी सद्भाव के लिए दुआ की।
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शुक्रवार को रमजान का चौथा और आखिरी जुमा था। नवाबी जामा मस्जिद में मुख्य नमाज अदा की गई। इसके अलावा शेख सरवर की मस्जिद, मरकज मस्जिद, हाथी खाना रब्बानिया मस्जिद, कचहरी मस्जिद, हैजा खाना मस्जिद, अलीगंज, छावनी, ऊंट मोहाल, कचहरी, पद्माकर चौराहा, जरैली कोठी सहित जनपद के अतर्रा, नरैनी, बबेरू, बदौसा, तिंदवारी, मटौंध कस्बों और हथौरा, छनेहरा, कोर्रही, हरदौली, सबादा, महबरा सहित तमाम गांवों में नमाज अदा की गई।
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रमजान के अब मात्र तीन रोजे शेष हैं। मस्जिदों में विशेष इंतजाम किए गए थे। आसपास के मैदानों में तंबू लगाकर नमाजियों की सफें लगीं। जबरदस्त गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच रोजेदारों ने यह फरीजा अदा किया। शासन-प्रशासन की गाइड लाइन के मुताबिक सड़कों पर नमाज अदा नहीं की गई। बाहर आवाज पहुंचाने वाले लाउडस्पीकरों का भी इस्तेमाल नहीं हुआ। उधर, बीती रात शहर की तमाम मस्जिदों के इंतजामकर्ताओं ने प्रशासन के अनुरोध पर मस्जिदों के बाहर लगे लाउडस्पीकर स्वेच्छा से हटा लिए।
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गरीबों का हक है जकात-फितरा, मुंह न चुराएं
बांदा। जकात और फितरा अदा करना अहम है। इसे ईद की नमाज से पहले गरीब और जरूरतमंदों को तलाश कर उनका यह हक अदा करें। सदका देने से रोजा में जो कमी रह गई है उसकी भरपाई होगी। अपनी जरूरत से ज्यादा कमाई का मात्र ढाई फीसदी जकात गरीबों को देने से यह माल महफूज रहता है और बरकत होती है। इससे मुंह न चुराएं। यह बात शुक्रवार को जुमा की नमाज में मरकज वाली मस्जिद में अपने संबोधन में मौलाना सआद ने कही। उन्होंने कहा कि जकात न अदा करना बहुत बड़ा गुनाह है। जकात में दी जाने वाली चीज अच्छी है। घटिया नहीं। गरीब और मुस्तकीम की तलाश में कुछ वक्त लगाएं। उन्होंने बताया कि सदका परिवार के हर सदस्य की ओर से अदा करना जरूरी है। इस वर्ष इसकी रकम लगभग 35 रुपये (पौने दो किलो गेहूं की कीमत) है।
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