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चार बार विधायक, दो बार मंत्री, घर किराए का
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कुछ दिनों पूर्व लखनऊ आवास में बीमारी पर बेड रेस्ट कर रहे पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस का हालचाल ?
- फोटो : BANDA
बांदा। पूरी उम्र सादगी से भरी रही। आजीवन खादी के कपड़े (कुर्ता-धोती) पहना। चार बार विधायक और दो बार कैबिनेट मंत्री रहने के बाद भी जमुना प्रसाद बोस की ईमानदारी की एक बानगी थी कि खुद का निजी मकान नहीं बना पाए। विधायकी और मंत्रित्व काल के अलावा शेष जीवन भी किराए के मकान में गुजारा। अपने परिवार और बेटों को कभी राजनीति में नहीं डाला। इन्हीं सब खूबियों के चलते उन्हें बुंदेलखंड का गांधी कहा जाता था।
बांदा शहर के खिन्नी नाका मोहल्ले में संकरी गली के अंदर छोटे से किराए के मकान में रहकर अन्य नेताओं को सादगी और ईमानदारी का सबक देने वाले जमुना प्रसाद बोस बचपन से ही सामाजिक और क्रांतिकारी मिजाज के थे। 1939 में छात्र कांग्रेस की नींव रखी।
बुंदेलखंड में यह संगठन खड़ा किया। इंदिरा गांधी भी जब कभी बुंदेलखंड आतीं तो बोसजी की खैरियत लेना न भूलतीं। यही स्थिति पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की रही। बोसजी उनके भी बहुत चहेते थे। उसी दौरान मुलायम सिंह यादव से उनकी दोस्ती हुई। मुलायम सिंह यादव बोसजी को बेहद सम्मान देते थे। उनके बांदा आगमन पर अपनी उम्रदराजी के चलते बोसजी उनके कार्यक्रम में न पहुंच पाते तो मुलायम सिंह खुद उनके घर मिलने आते थे।
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राजनीति के साथ बोस जी अच्छे पत्रकार भी थे। इंगलिश के बड़े अखबार के रिपोर्टर रहे। 1975 में देश में इमर्जेंसी लगने पर विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी में बोस जी भी नहीं बचे। उन्हें भी जेल भेजा गया। उनकी इस जेल यात्रा पर उन्हें सपा सरकार में लोकतंत्र रक्षक सेनानी का दर्जा दिया गया। इधर, कुछ दिनों से इस बुजुर्ग नेता ने काफी बीमारी और तकलीफें सहीं।
बांदा स्थित घर में बाथरूम में इसी वर्ष फरवरी माह में गिर जाने से कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। उन्हें लखनऊ ले जाया गया। कई माह बेड पर रहे। पिछले माह बांदा आ गए थे। तबियत बिगड़ने पर उन्हें 2 सितंबर को लखनऊ ले जाया गया था। एक नर्सिंगहोम में जांच के दौरान उन्हें कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इस पर उन्हें वहां कोविड सेंटर डॉ. राममनोहर लोहिया भेज दिया गया। उन्हें निमोनिया और टाइफाइड था।
सोमवार को देर शाम जनपद के हरदिल अजीज बुजुर्ग नेता जमुना प्रसाद बोस के निधन पर चौतरफा शोक श्रद्धांजलियों का तांता लग गया। दलगत राजनीति से परे हर दल के लोगों को उनकी मौत ने गमजदा किया। सभी ने शोक और अफसोस जताया। सपा राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने उनकी मृत्यु को सपा और प्रदेश व बांदा जनपद के लिए अपूर्णनीय क्षति बताया।
सपा जिलाध्यक्ष विजय करन यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी, पूर्व विधायक विशंभर सिंह यादव, इमरान अली राजू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शकील अली, हसनुद्दीन सिद्दीकी सहित भाजपा जिलाध्यक्ष रामकेश निषाद, कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित, बसपा जिलाध्यक्ष गुलाब वर्मा, भाकपा नेता डा.रामचंद्र सरस, समाजसेवी जैद अहमद फारुकी आदि ने शोक जताते हुए श्रद्धांजलि दी।
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बांदा शहर के खिन्नी नाका मोहल्ले में संकरी गली के अंदर छोटे से किराए के मकान में रहकर अन्य नेताओं को सादगी और ईमानदारी का सबक देने वाले जमुना प्रसाद बोस बचपन से ही सामाजिक और क्रांतिकारी मिजाज के थे। 1939 में छात्र कांग्रेस की नींव रखी।
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बुंदेलखंड में यह संगठन खड़ा किया। इंदिरा गांधी भी जब कभी बुंदेलखंड आतीं तो बोसजी की खैरियत लेना न भूलतीं। यही स्थिति पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की रही। बोसजी उनके भी बहुत चहेते थे। उसी दौरान मुलायम सिंह यादव से उनकी दोस्ती हुई। मुलायम सिंह यादव बोसजी को बेहद सम्मान देते थे। उनके बांदा आगमन पर अपनी उम्रदराजी के चलते बोसजी उनके कार्यक्रम में न पहुंच पाते तो मुलायम सिंह खुद उनके घर मिलने आते थे।
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राजनीति के साथ बोस जी अच्छे पत्रकार भी थे। इंगलिश के बड़े अखबार के रिपोर्टर रहे। 1975 में देश में इमर्जेंसी लगने पर विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी में बोस जी भी नहीं बचे। उन्हें भी जेल भेजा गया। उनकी इस जेल यात्रा पर उन्हें सपा सरकार में लोकतंत्र रक्षक सेनानी का दर्जा दिया गया। इधर, कुछ दिनों से इस बुजुर्ग नेता ने काफी बीमारी और तकलीफें सहीं।
बांदा स्थित घर में बाथरूम में इसी वर्ष फरवरी माह में गिर जाने से कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। उन्हें लखनऊ ले जाया गया। कई माह बेड पर रहे। पिछले माह बांदा आ गए थे। तबियत बिगड़ने पर उन्हें 2 सितंबर को लखनऊ ले जाया गया था। एक नर्सिंगहोम में जांच के दौरान उन्हें कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इस पर उन्हें वहां कोविड सेंटर डॉ. राममनोहर लोहिया भेज दिया गया। उन्हें निमोनिया और टाइफाइड था।
सोमवार को देर शाम जनपद के हरदिल अजीज बुजुर्ग नेता जमुना प्रसाद बोस के निधन पर चौतरफा शोक श्रद्धांजलियों का तांता लग गया। दलगत राजनीति से परे हर दल के लोगों को उनकी मौत ने गमजदा किया। सभी ने शोक और अफसोस जताया। सपा राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने उनकी मृत्यु को सपा और प्रदेश व बांदा जनपद के लिए अपूर्णनीय क्षति बताया।
सपा जिलाध्यक्ष विजय करन यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी, पूर्व विधायक विशंभर सिंह यादव, इमरान अली राजू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शकील अली, हसनुद्दीन सिद्दीकी सहित भाजपा जिलाध्यक्ष रामकेश निषाद, कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित, बसपा जिलाध्यक्ष गुलाब वर्मा, भाकपा नेता डा.रामचंद्र सरस, समाजसेवी जैद अहमद फारुकी आदि ने शोक जताते हुए श्रद्धांजलि दी।

बीमारी के दौरान लखनऊ में अस्पताल में भर्ती पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस। (फाइल फोटो)- फोटो : BANDA