{"_id":"6159f1cf8ebc3e626b5964e5","slug":"fodder-straw-is-not-available-in-the-cowshed-banda-news-knp6561051134","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोशाला में नहीं मिल रहा चारा-भूसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोशाला में नहीं मिल रहा चारा-भूसा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अतर्रा। तहसील क्षेत्र के महुटा के अंश ग्राम पंचायत तेरा-ब की अस्थायी गोशाला में गोवंशों को चारा-भूसा नहीं मिल रहा। गोशाला कर्मी गोवंशों को जंगलों और खेतों में घास-फूस खिलाने ले जाते हैं। सरकार द्वारा गोवंशों को खिलाने वाले पैसे का बंदरबांट किया जा रहा है।
तेरा-ब की गोशाला में 110 गोवंश संरक्षित हैं। प्रधान व सचिव में यहां इनकी देखभाल के लिए 3 चरवाहे राजू, रामसजीवन व भूरा को रखा हुआ है। गोशाला में चारा-भूसा का इंतजाम न होने से प्रतिदिन सुबह चरवाहे गोवंशों को चराने के लिए आसपास के जंगल और खेतों में ले जाते हैं।
गांव के रोहित, दीपक, मोहित, पप्पू, नत्थू, रामदेव, रज्जू, करण, रामप्रकाश, गुड्डा आदि ने बताया कि संरक्षित गोवंश उनके खेतों की फसल को चट कर रहे हैं। अस्थायी गोशाला नाममात्र के लिए बनी है।
विज्ञापन
गोवंशों के लिए टिनशेड की व्यवस्था न किए जाने गोवंश खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। बारिश होने से गीली मिट्टी में खड़े अन्ना मवेशी मच्छरों के प्रकोप सहित अन्य बीमारियों से भी ग्रसित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने गोशाला की बदहाल व्यवस्था सुधार की मांग की।
विज्ञापन
तेरा-ब की गोशाला में 110 गोवंश संरक्षित हैं। प्रधान व सचिव में यहां इनकी देखभाल के लिए 3 चरवाहे राजू, रामसजीवन व भूरा को रखा हुआ है। गोशाला में चारा-भूसा का इंतजाम न होने से प्रतिदिन सुबह चरवाहे गोवंशों को चराने के लिए आसपास के जंगल और खेतों में ले जाते हैं।
विज्ञापन
गांव के रोहित, दीपक, मोहित, पप्पू, नत्थू, रामदेव, रज्जू, करण, रामप्रकाश, गुड्डा आदि ने बताया कि संरक्षित गोवंश उनके खेतों की फसल को चट कर रहे हैं। अस्थायी गोशाला नाममात्र के लिए बनी है।
विज्ञापन
गोवंशों के लिए टिनशेड की व्यवस्था न किए जाने गोवंश खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। बारिश होने से गीली मिट्टी में खड़े अन्ना मवेशी मच्छरों के प्रकोप सहित अन्य बीमारियों से भी ग्रसित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने गोशाला की बदहाल व्यवस्था सुधार की मांग की।