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Banda News: पांच मोबाइल खोलेंगे कोडीन सिरप तस्करी के नेटवर्क का राज
Fri, 04 Sep 2026 11:46 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 04 Sep 2026 11:46 PM IST
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बांदा। कोडीनयुक्त सिरप की अवैध तस्करी के मामले में गिरफ्तार आरोपियों के पास मिले पांच मोबाइल फोन अब पुलिस की जांच का अहम आधार बन गए हैं।
पुलिस ने मोबाइल फोन का डाटा खंगालना शुरू कर दिया है। साथ ही आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) भी निकलवाई जा रही है। बिसंडा क्षेत्र में कोडीनयुक्त सिरप की 30 हजार शीशी की खेप पकड़े जाने के बाद पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है। पुलिस का मानना है कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क होगा।
केवल चार लोग इतने बड़े स्टॉक को नहीं खपा सकते हैं। ऐसे में पुलिस पूछताछ में आरोपियों से मिली जानकारी के साथ उनके पास से मिले पांच मोबाइलों की सीडीआर भी खंगाल रही है। पुलिस का मानना है कि मोबाइल डाटा से तस्करी के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जुड़ सकती हैं। इसके आधार पर संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
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दिल्ली से आती थी सिरप, बांदा में बदलता था ठिकाना
गिरोह का नेटवर्क दिल्ली से शुरू होकर बुंदेलखंड तक फैला था। दिल्ली से कोडीन कफ सिरप डीसीएम में लादकर भेजी जाती थी। दिल्ली में आखिरी लोकेशन मिलने और फोन बंद होने से एसटीएफ का शक और गहरा गया है। टीम दिल्ली में सिरप की खरीद, फर्जी बिल तैयार कराने और खेप को बांदा तक पहुंचाने वाले नेटवर्क को जोड़कर तफ्तीश कर रही है।
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कोडीन सिरप के सेवन से नुकसान
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विनीत सचान ने बताया कि कोडीनयुक्त दवा डॉक्टर की सलाह और निर्धारित मात्रा में ही ली जानी चाहिए। इसका गलत या अधिक सेवन नींद, चक्कर, उल्टी, कब्ज और सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकता है। अधिक मात्रा में सेवन से बेहोशी, सांस की गति धीमी होने और गंभीर स्थिति में जान जाने का खतरा भी रहता है। लगातार गलत इस्तेमाल से इसकी आदत पड़ सकती है।
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नमूने फेल हुए तो निर्माता-विक्रेता पर भी मुकदमा
औषधि निरीक्षक ने बरामद कोडीनयुक्त सिरप के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं। अब रिपोर्ट का इंतजार है। जांच में सिरप मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो औषधि निरीक्षक की ओर से निर्माता और विक्रेता के खिलाफ अलग से मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। इसके अलावा दवा के लाइसेंस और उसकी बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
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दो आरोपी दवा कारोबार करते थे, लाइसेंस की भी जांच
औषधि निरीक्षक दिव्यप्रकाश मौर्य भी मामले की जांच में जुटे हैं। गिरफ्तार आरोपियों में अतर्रा के लखन कॉलोनी निवासी प्रवीण उर्फ लकी और रामलीला मैदान निवासी रोहित के दवा व्यवसाय से जुड़े होने की बात सामने आई है।
दोनों अतर्रा में थोक दवा का कारोबार कर रहे थे लेकिन उनके नाम से कोई दवा लाइसेंस जारी नहीं मिला है। पुलिस इस कारोबार की जड़ तक पहुंचने के लिए चित्रकूट, हमीरपुर, सतना समेत अन्य जिलों से भी संपर्क साधने में लगी है। इन जिलों में सिरप की खरीद-बिक्री और संभावित नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।
औषधि निरीक्षक यह पता कर रहे हैं कि दोनों ने किसी दूसरे व्यक्ति या फर्म के नाम पर लाइसेंस लेकर कारोबार किया था या बिना लाइसेंस के ही दवाओं का व्यापार कर रहे थे। संबंधित फर्म का नाम सामने आने पर लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई भी की जाएगी।
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फरार दवा कारोबारी की तलाश में दो टीमें
नशीली दवा की तस्करी के मामले में आरोपी अतर्रा के दवा कारोबारी प्रियांशु गुप्ता पुलिस के रडार पर है। उसकी गिरफ्तारी के लिए दो टीमें लगाई गईं हैं। एसटीएफ भी उसकी तलाश में जुटी है। स्थानीय पुलिस उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। उसका मेडिकल स्टोर फिलहाल बंद है।
मामले में बिसंडा के नहर पुरवा निवासी धीरेंद्र पुत्र भगवत प्रसाद, अतर्रा के प्रवीण उर्फ लकी, रोहित और हापुड़ के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के भैना गांव निवासी डीसीएम चालक शेखर पुत्र राजकुमार को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शुक्रवार को चारों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
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पुलिस ने मोबाइल फोन का डाटा खंगालना शुरू कर दिया है। साथ ही आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) भी निकलवाई जा रही है। बिसंडा क्षेत्र में कोडीनयुक्त सिरप की 30 हजार शीशी की खेप पकड़े जाने के बाद पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है। पुलिस का मानना है कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क होगा।
केवल चार लोग इतने बड़े स्टॉक को नहीं खपा सकते हैं। ऐसे में पुलिस पूछताछ में आरोपियों से मिली जानकारी के साथ उनके पास से मिले पांच मोबाइलों की सीडीआर भी खंगाल रही है। पुलिस का मानना है कि मोबाइल डाटा से तस्करी के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जुड़ सकती हैं। इसके आधार पर संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
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दिल्ली से आती थी सिरप, बांदा में बदलता था ठिकाना
गिरोह का नेटवर्क दिल्ली से शुरू होकर बुंदेलखंड तक फैला था। दिल्ली से कोडीन कफ सिरप डीसीएम में लादकर भेजी जाती थी। दिल्ली में आखिरी लोकेशन मिलने और फोन बंद होने से एसटीएफ का शक और गहरा गया है। टीम दिल्ली में सिरप की खरीद, फर्जी बिल तैयार कराने और खेप को बांदा तक पहुंचाने वाले नेटवर्क को जोड़कर तफ्तीश कर रही है।
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कोडीन सिरप के सेवन से नुकसान
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विनीत सचान ने बताया कि कोडीनयुक्त दवा डॉक्टर की सलाह और निर्धारित मात्रा में ही ली जानी चाहिए। इसका गलत या अधिक सेवन नींद, चक्कर, उल्टी, कब्ज और सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकता है। अधिक मात्रा में सेवन से बेहोशी, सांस की गति धीमी होने और गंभीर स्थिति में जान जाने का खतरा भी रहता है। लगातार गलत इस्तेमाल से इसकी आदत पड़ सकती है।
नमूने फेल हुए तो निर्माता-विक्रेता पर भी मुकदमा
औषधि निरीक्षक ने बरामद कोडीनयुक्त सिरप के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं। अब रिपोर्ट का इंतजार है। जांच में सिरप मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो औषधि निरीक्षक की ओर से निर्माता और विक्रेता के खिलाफ अलग से मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। इसके अलावा दवा के लाइसेंस और उसकी बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
दो आरोपी दवा कारोबार करते थे, लाइसेंस की भी जांच
औषधि निरीक्षक दिव्यप्रकाश मौर्य भी मामले की जांच में जुटे हैं। गिरफ्तार आरोपियों में अतर्रा के लखन कॉलोनी निवासी प्रवीण उर्फ लकी और रामलीला मैदान निवासी रोहित के दवा व्यवसाय से जुड़े होने की बात सामने आई है।
दोनों अतर्रा में थोक दवा का कारोबार कर रहे थे लेकिन उनके नाम से कोई दवा लाइसेंस जारी नहीं मिला है। पुलिस इस कारोबार की जड़ तक पहुंचने के लिए चित्रकूट, हमीरपुर, सतना समेत अन्य जिलों से भी संपर्क साधने में लगी है। इन जिलों में सिरप की खरीद-बिक्री और संभावित नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।
औषधि निरीक्षक यह पता कर रहे हैं कि दोनों ने किसी दूसरे व्यक्ति या फर्म के नाम पर लाइसेंस लेकर कारोबार किया था या बिना लाइसेंस के ही दवाओं का व्यापार कर रहे थे। संबंधित फर्म का नाम सामने आने पर लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई भी की जाएगी।
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फरार दवा कारोबारी की तलाश में दो टीमें
नशीली दवा की तस्करी के मामले में आरोपी अतर्रा के दवा कारोबारी प्रियांशु गुप्ता पुलिस के रडार पर है। उसकी गिरफ्तारी के लिए दो टीमें लगाई गईं हैं। एसटीएफ भी उसकी तलाश में जुटी है। स्थानीय पुलिस उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। उसका मेडिकल स्टोर फिलहाल बंद है।
मामले में बिसंडा के नहर पुरवा निवासी धीरेंद्र पुत्र भगवत प्रसाद, अतर्रा के प्रवीण उर्फ लकी, रोहित और हापुड़ के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के भैना गांव निवासी डीसीएम चालक शेखर पुत्र राजकुमार को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शुक्रवार को चारों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।