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मजार व कब्रिस्तानों में फातिहा, मस्जिदों में इबादत
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गुलाब बाग कब्रिस्तान में मजार पर फातिहा पढ़ते अकीदतमंद। संवाद
- फोटो : BANDA
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बांदा। इस्लामिक कैलेंडर के शाबान माह की 15वीं रात को मनाई जाने वाली शब-ए-बरात पर बीती रात मजारों और कब्रिस्तानों में फातिहा के बीच बीती। मस्जिदों में रात भर इबादतें हुईं। कई जगह दीनी जलसे हुए। इन स्थलों के अलावा मुस्लिम इलाकों में रात भर लोगों की आवाजाही रही।
शाबान की 14वीं का दिन बीतने के बाद सूरज ढलते ही 15वीं शब शुरू हो जाती है। इस्लाम मजहब में इस रात को काफी महत्वपूर्ण और अहम बताया गया है। माना जाता है कि इसी रात ईश्वर अगले पूरे साल में होने वाली मौत व अन्य कामों का फैसला करता है। पूर्वजों की आत्माएं आती हैं।
इसीलिए उनकी कब्रों और मजारों पर जाकर उनके लिए दुआ की जाती है। लोग रातभर मस्जिदों में इबादत कर अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। शहर की कालवनगंज स्थित खानकाह दरगाह, गोल कोठी, जरैली कोठी, मिस्कीन शाह, दरगाह सैय्यद मजहर रब्बानी (बड़े हजरत), दरगाह सैय्यद गाजी रब्बानी (छोटे हजरत), सरांय,
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अतर्रा रोड आदि में स्थित मजारों और कब्रिस्तानों चुहिया का तकिया (प्रागी तालाब), बगिया (ऊंट मोहाल), कच्चा तालाब, गुलाब बाग, जेल रोड, कर्बला, गूलर नाका आदि में विशेष सफाई और बिजली की रोशनी से सजावट की गई थी। रात भर लोग आते-जाते रहे। मजारों और कब्रों पर फूल डाले गए।
नवाबी जामा मस्जिद, कोतवाली रोड मरकज मस्जिद, शेख सरवर मस्जिद, छावनी मस्जिद, हाथीखाना मस्जिद आदि में भी इबादतें होती रहीं। घरों में भी महिलाओं और बच्चों ने रात इबादत में गुजारी। तड़के सहरी की और शनिवार को रोजा रखा। अब 15 दिन बाद ही रमजान शुरू हो जाएगा।
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शाबान की 14वीं का दिन बीतने के बाद सूरज ढलते ही 15वीं शब शुरू हो जाती है। इस्लाम मजहब में इस रात को काफी महत्वपूर्ण और अहम बताया गया है। माना जाता है कि इसी रात ईश्वर अगले पूरे साल में होने वाली मौत व अन्य कामों का फैसला करता है। पूर्वजों की आत्माएं आती हैं।
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इसीलिए उनकी कब्रों और मजारों पर जाकर उनके लिए दुआ की जाती है। लोग रातभर मस्जिदों में इबादत कर अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। शहर की कालवनगंज स्थित खानकाह दरगाह, गोल कोठी, जरैली कोठी, मिस्कीन शाह, दरगाह सैय्यद मजहर रब्बानी (बड़े हजरत), दरगाह सैय्यद गाजी रब्बानी (छोटे हजरत), सरांय,
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अतर्रा रोड आदि में स्थित मजारों और कब्रिस्तानों चुहिया का तकिया (प्रागी तालाब), बगिया (ऊंट मोहाल), कच्चा तालाब, गुलाब बाग, जेल रोड, कर्बला, गूलर नाका आदि में विशेष सफाई और बिजली की रोशनी से सजावट की गई थी। रात भर लोग आते-जाते रहे। मजारों और कब्रों पर फूल डाले गए।
नवाबी जामा मस्जिद, कोतवाली रोड मरकज मस्जिद, शेख सरवर मस्जिद, छावनी मस्जिद, हाथीखाना मस्जिद आदि में भी इबादतें होती रहीं। घरों में भी महिलाओं और बच्चों ने रात इबादत में गुजारी। तड़के सहरी की और शनिवार को रोजा रखा। अब 15 दिन बाद ही रमजान शुरू हो जाएगा।