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‘अन्न खाना चाहते हैं पर किसानी करना नहीं चाहते’
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 07 Jan 2015 11:30 PM IST
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‘अन्न सभी खाना चाहते हैं, पर किसानी कोई नहीं करना चाहता।’ यह बात फिल्म निर्देशक और कवि निलय उपाध्याय ने कही। वह डीसीडीएफ परिसर में बुधवार को जनवादी लेखक संघ के तत्वावधान में आयोजित ‘किसान आंदोलन में लेखकों की भूमिका’ परिचर्चा पर बोल रहे थे।
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उन्होंने कहा कि लेखक और किसान एक ही प्रक्रिया से जूझ रहे हैं। उन्होंने गंगोत्री से गंगा सागर तक की गई अपनी साइकिल यात्रा के अनुभव भी बताए। इस मौके पर जनवादी किसान और लोक कवि मानबहादुर सिंह को स्मृति सम्मान दिए जाने की घोषणा भी की गई।
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परिचर्चा में बुंदेलखंड में किसानों की समस्याओं और आत्महत्याओं का मुद्दा छाया रहा। किसान पुष्पेंद्र भाई ने बुंदेलखंड में किसानों की दिन ब दिन गहराती समस्याओं और आत्महत्याओं के बीच चलाए गए कुछ अभियानों की चर्चा की। कहा कि जल, जंगल और पानी को बचाने के लिए किसानों को आगे आना होगा।
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प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह ने कहा कि किसान सजीव खेती से अन्न पैदा करें। सरकारी सुविधाओं की तरफ मुंह ताकना बंद करें। बेल्जियम से आए किसान किम और पीटर ने बताया कि बेल्जियम में अनाज बहुत महंगा है। ज्यादातर किसान युवा हैं। वहां नौकर नहीं हैं। लोग अपने काम खुद करते हैं।
दिल्ली से आए आलोचक अविनाश मिश्र ने कहा कि उन्होंने राजधानी में 80 लाख रुपये कीमत के फ्लैट मेें बैठे उस लेखक को देखा है जो खुद को किसान का लोक कवि और लेखक कहता है। संतोष चतुर्वेदी ने कहा कि किसान अपने मूल बीज से हट गया है। उसकी रुचि पर हमला किया जा रहा है।
परिचर्चा में लेखकों ने किसान आंदोलन और साहित्य दोनों को एक साथ लेकर चलने का संकल्प लिया। प्रवास सोसायटी के आशीष सागर ने बुंदेलखंड में 1995 में से अब तक किसानों की आत्महत्याओं का वर्षवार ब्योरा बताया। काव्य सत्र में कवि केशव तिवारी, सीपी दीक्षित ललित, निलय, नारायन दास गुप्ता और अविनाश ने किसान धर्मी कविताएं पढ़ीं।
इस अवसर पर एक बरगद का पौधा लगाकर प्रकृति का सुंदर और स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया गया। इस मौके पर डीसीडीएफ अध्यक्ष सुधीर सिंह, प्रो.रामगोपाल गुप्ता, दिनकर अवस्थी, प्रो.लक्ष्मी त्रिपाठी, प्रमोद दीक्षित (अतर्रा), रामाशीष तिवारी (रिसौरा), यशवंत पटेल (नरैनी), अनुराग गुप्ता, चंद्रपाल कश्यप, प्रद्युम्न सिंह, हरिशरण सिंह, राघवेंद्र मिश्रा, नागेश मिश्रा, नागेश खरे आदि उपस्थित रहे।