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खेत का पानी खेत में से दो फसलें ले रहे किसान
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मरका (बांदा)। अधांव गांव के किसान बारिश का पानी बहकर बर्बाद होने से रोकने के लिए हरेक खेत में मेड़ बना रहे हैं। उद्देश्य यह है कि बारिश के पानी को खेत में ही रोक लिया जाए। बहकर बेकार न जाए। किसानों की इस कोशिश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभियान का नाम देकर मन की बात में रविवार को बयां किया।
जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर बबेरू विधान सभा क्षेत्र में अधांव गांव आबाद है। फतेहपुर जनपद का सीमावर्ती है। लगभग तीन हजार आबादी वाले इस गांव में कृषि भूमि का रकबा तकरीबन 3500 बीघा बताया गया है। यूं तो गांव में समगरा पंप केनाल की नहर है, लेकिन गांव के सभी खेतों को पानी पहुंचा पाने में यह नाकाफी है। ज्यादातर किसान बरसाती पानी की खेती पर ही निर्भर हैं। इसमें वह साल में बमुश्किल एक फसल ले पाते हैं। गांव के कुछ किसानों की सोच के नतीजे में यहां बदलाव आ रहा है।
किसानों ने खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में का नारा देते हुए खेतों में मेड़बंदी शुरू कर दी है। आधा सैकड़ा से ज्यादा किसानों ने अपने खेतों में मेड़ बना ली है। नतीजे में बारिश के लगभग तीन महीनों में बरसने वाला पानी बहकर नाले नदियों तक नहीं जा रहा। खेतों में ही ठहर रहा है। मानसूनी मौसम के बाद भी किसानों को काफी दिनों तक यह पानी खेत में नमी दिए रहता है। मेड़बंदी किसानों ने खुद अपने परिश्रम या ग्राम पंचायत की मदद से कराई है। मेड़बंदी वाले खेतों में अब दो फसलों का सिलसिला शुरू होने लगा है। यहां मुख्य फसल गेहूं और धान की है। (संवाद)
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पीएम के मन की बात में जिक्र से ग्रामीण खुश
मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस क्षेत्र के अधांव गांव का जिक्र किए जाने पर गांव के लोग खुश हैं। उनमें यह उम्मीद भी जागी है कि शायद शासन और प्रशासन की कृपा दृष्टि इस पिछड़े गांव पर हो जाए तो पिछड़ापन दूर हो जाए। खेत में पानी ठहरने से गहराई तक नमी बढ़ रही और इसका फायदा फसल उत्पादन में वृद्धि के रूप में मिल रहा है। आमतौर पर यहां किसान एक ही फसल पैदा कर पाते थे। जिन किसानों ने मेड़ बनाकर बारिश का पानी रोका है, वहां अब दो फसलें होने लगीं हैं। मुख्य फसल गेहूं की है। (संवाद)
गांव के किसान शिवबरन यादव 30 बीघा के किसान हैं। उन्होंने 20 बीघा में मेड़बंदी कराई है। ग्राम पंचायत के जरिए मेड़बंदी हुई है। शिवबरन को भरोसा है कि बारिश का पानी बहकर बेकार नहीं जाएगा। खेत में रुकेगा। कहा कि अभी तक वह एक फसल ही कर पा रहे थे। अब उम्मीद बंधी है कि दो फसलें हो जाएं। गांव के एक अन्य किसान हनुमान ने भी अपनी पूरी सात बीघा खेत में ग्राम पंचायत से मेड़बंदी कराई है।
गांव के बुजुर्ग किसान हीरालाल गर्ग 13 बीघा के काश्तकार हैं। इन्होंने अपने 10 बीघा खेत में मेड़बंदी करा ली है। वह बताते हैं कि बारिश का जो पानी बहकर बर्बाद हो जाता था, वह कुछ समय तक भरा रहता है। चार से पांच क्विंटल प्रति बीघा गेहूं और धान की फसल ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात में अधांव गांव की मेड़बंदी की सराहना किए जाने पर ग्रामीणों के साथ ही ग्राम प्रधान सविता देवी भी खुश हैं। उनका कहना है कि गांव की अन्य समस्याओं के बारे में भी शासन और प्रशासन को अवगत कराया जाएगा। साथ ही जो भी किसान मेड़बंदी के इच्छुक हाेंगे ग्राम पंचायत से उन्हें सहयोग दिया जाएगा।
अधिकारी दिखाएं दिलचस्पी
अधांव गांव में सफाई की व्यवस्था अधूरी है। जगह-जगह कूड़े-करकट के ढेर हैं। गलियों में कीचड़ और दलदल है। गांव के युवाओं का कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां के किसानों के कामों को सराहा है, तो अब स्थानीय अधिकारियों को इस गांव की सफाई और विकास के बारे में दिलचस्पी लेनी चाहिए।
पूर्व डीएम ने चलाया था अभियान
गांवों को पानी से सरसब्ज रखने के लिए खेत, तालाब, कुआं अभियान यहां पूर्व जिलाधिकारी हीरालाल (आईएएस) ने अपने कार्यकाल में जोरशोर से चलाया था। खेतों में मेड़बंदी, कुआं-तालाब की सफाई व गहराई में संबंधित विभागों को पूरी तरह जुटाया गया था। मेड़ पर पेड़ अभियान भी शुरू हुआ था। इन कोशिशों के नतीजे भी सामने आए थे। मौजूदा समय में हीरालाल एनआरएचएम के अपर निदेशक हैं। वह मॉडल गांव/गांव घोषणा पत्र पर प्रदेश व्यापी अभियान चला रहे हैं।
अटल भूजल योजना में भी मेड़बंदी
बारिश के पानी का समुचित उपयोग के लिए अटल भूजल योजना चलाई जा रही है। इससे भूजल स्तर भी बढ़ेगा। सरकार बारिश का पानी उसी स्थान पर संचयित करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। योजना के तहत किसान को अपने खेत में मेड़ बनाकर बारिश का पानी एकत्रित करना है। इस पानी से खेत की सिंचाई होगी।
मनरेगा से भी मेड़बंदी
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से भी खेतों में मेड़बंदी का प्रावधान है। भूमि संरक्षण विभाग और ग्राम पंचायतें मनरेगा से मेड़बंदी कराते हैं। इसके लिए शासन हर साल बजट भी देता है।
जल ग्राम जखनी ने भी अपनाया फार्मूला
गांव का पानी गांव में तकनीक को बांदा जनपद के जखनी गांव में भी बखूबी अपनाया गया है। इसे जल ग्राम भी कहा जाने लगा है। गांव में स्थित आधा दर्जन से ज्यादा विशाल तालाब 12 माह पानी से लबरेज रहते हैं। घरों का बेकार पानी भी बेकार नहीं जाता। नालियों के जरिए खेतों में पहुंचाया जा रहा है। जल ग्राम के संयोजक उमाशंकर पांडेय ने बताया कि यह तरकीबें हमारे पूर्वजों की हैं। इन्हें अपना लिया जाए तो जल संकट की नौबत ही न आए। प्रधानमंत्री ने कुछ दिनों पूर्व ग्राम प्रधानों को भेजे पत्र में इसका जिक्र किया था।
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जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर बबेरू विधान सभा क्षेत्र में अधांव गांव आबाद है। फतेहपुर जनपद का सीमावर्ती है। लगभग तीन हजार आबादी वाले इस गांव में कृषि भूमि का रकबा तकरीबन 3500 बीघा बताया गया है। यूं तो गांव में समगरा पंप केनाल की नहर है, लेकिन गांव के सभी खेतों को पानी पहुंचा पाने में यह नाकाफी है। ज्यादातर किसान बरसाती पानी की खेती पर ही निर्भर हैं। इसमें वह साल में बमुश्किल एक फसल ले पाते हैं। गांव के कुछ किसानों की सोच के नतीजे में यहां बदलाव आ रहा है।
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किसानों ने खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में का नारा देते हुए खेतों में मेड़बंदी शुरू कर दी है। आधा सैकड़ा से ज्यादा किसानों ने अपने खेतों में मेड़ बना ली है। नतीजे में बारिश के लगभग तीन महीनों में बरसने वाला पानी बहकर नाले नदियों तक नहीं जा रहा। खेतों में ही ठहर रहा है। मानसूनी मौसम के बाद भी किसानों को काफी दिनों तक यह पानी खेत में नमी दिए रहता है। मेड़बंदी किसानों ने खुद अपने परिश्रम या ग्राम पंचायत की मदद से कराई है। मेड़बंदी वाले खेतों में अब दो फसलों का सिलसिला शुरू होने लगा है। यहां मुख्य फसल गेहूं और धान की है। (संवाद)
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पीएम के मन की बात में जिक्र से ग्रामीण खुश
मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस क्षेत्र के अधांव गांव का जिक्र किए जाने पर गांव के लोग खुश हैं। उनमें यह उम्मीद भी जागी है कि शायद शासन और प्रशासन की कृपा दृष्टि इस पिछड़े गांव पर हो जाए तो पिछड़ापन दूर हो जाए। खेत में पानी ठहरने से गहराई तक नमी बढ़ रही और इसका फायदा फसल उत्पादन में वृद्धि के रूप में मिल रहा है। आमतौर पर यहां किसान एक ही फसल पैदा कर पाते थे। जिन किसानों ने मेड़ बनाकर बारिश का पानी रोका है, वहां अब दो फसलें होने लगीं हैं। मुख्य फसल गेहूं की है। (संवाद)
गांव के किसान शिवबरन यादव 30 बीघा के किसान हैं। उन्होंने 20 बीघा में मेड़बंदी कराई है। ग्राम पंचायत के जरिए मेड़बंदी हुई है। शिवबरन को भरोसा है कि बारिश का पानी बहकर बेकार नहीं जाएगा। खेत में रुकेगा। कहा कि अभी तक वह एक फसल ही कर पा रहे थे। अब उम्मीद बंधी है कि दो फसलें हो जाएं। गांव के एक अन्य किसान हनुमान ने भी अपनी पूरी सात बीघा खेत में ग्राम पंचायत से मेड़बंदी कराई है।
गांव के बुजुर्ग किसान हीरालाल गर्ग 13 बीघा के काश्तकार हैं। इन्होंने अपने 10 बीघा खेत में मेड़बंदी करा ली है। वह बताते हैं कि बारिश का जो पानी बहकर बर्बाद हो जाता था, वह कुछ समय तक भरा रहता है। चार से पांच क्विंटल प्रति बीघा गेहूं और धान की फसल ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात में अधांव गांव की मेड़बंदी की सराहना किए जाने पर ग्रामीणों के साथ ही ग्राम प्रधान सविता देवी भी खुश हैं। उनका कहना है कि गांव की अन्य समस्याओं के बारे में भी शासन और प्रशासन को अवगत कराया जाएगा। साथ ही जो भी किसान मेड़बंदी के इच्छुक हाेंगे ग्राम पंचायत से उन्हें सहयोग दिया जाएगा।
अधिकारी दिखाएं दिलचस्पी
अधांव गांव में सफाई की व्यवस्था अधूरी है। जगह-जगह कूड़े-करकट के ढेर हैं। गलियों में कीचड़ और दलदल है। गांव के युवाओं का कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां के किसानों के कामों को सराहा है, तो अब स्थानीय अधिकारियों को इस गांव की सफाई और विकास के बारे में दिलचस्पी लेनी चाहिए।
पूर्व डीएम ने चलाया था अभियान
गांवों को पानी से सरसब्ज रखने के लिए खेत, तालाब, कुआं अभियान यहां पूर्व जिलाधिकारी हीरालाल (आईएएस) ने अपने कार्यकाल में जोरशोर से चलाया था। खेतों में मेड़बंदी, कुआं-तालाब की सफाई व गहराई में संबंधित विभागों को पूरी तरह जुटाया गया था। मेड़ पर पेड़ अभियान भी शुरू हुआ था। इन कोशिशों के नतीजे भी सामने आए थे। मौजूदा समय में हीरालाल एनआरएचएम के अपर निदेशक हैं। वह मॉडल गांव/गांव घोषणा पत्र पर प्रदेश व्यापी अभियान चला रहे हैं।
अटल भूजल योजना में भी मेड़बंदी
बारिश के पानी का समुचित उपयोग के लिए अटल भूजल योजना चलाई जा रही है। इससे भूजल स्तर भी बढ़ेगा। सरकार बारिश का पानी उसी स्थान पर संचयित करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। योजना के तहत किसान को अपने खेत में मेड़ बनाकर बारिश का पानी एकत्रित करना है। इस पानी से खेत की सिंचाई होगी।
मनरेगा से भी मेड़बंदी
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से भी खेतों में मेड़बंदी का प्रावधान है। भूमि संरक्षण विभाग और ग्राम पंचायतें मनरेगा से मेड़बंदी कराते हैं। इसके लिए शासन हर साल बजट भी देता है।
जल ग्राम जखनी ने भी अपनाया फार्मूला
गांव का पानी गांव में तकनीक को बांदा जनपद के जखनी गांव में भी बखूबी अपनाया गया है। इसे जल ग्राम भी कहा जाने लगा है। गांव में स्थित आधा दर्जन से ज्यादा विशाल तालाब 12 माह पानी से लबरेज रहते हैं। घरों का बेकार पानी भी बेकार नहीं जाता। नालियों के जरिए खेतों में पहुंचाया जा रहा है। जल ग्राम के संयोजक उमाशंकर पांडेय ने बताया कि यह तरकीबें हमारे पूर्वजों की हैं। इन्हें अपना लिया जाए तो जल संकट की नौबत ही न आए। प्रधानमंत्री ने कुछ दिनों पूर्व ग्राम प्रधानों को भेजे पत्र में इसका जिक्र किया था।