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आस्था की डुबकी लगा दान की खिचड़ी
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 15 Jan 2016 12:01 AM IST
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बांदा। मकर संक्रांति दो दिन मनाई जाएगी। गुरुवार को
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बड़ी संख्या में लोगों ने यह पर्व मनाया। अधिकांश लोग शुक्रवार को मनाएंगे।
नदियों में तड़के से ही डुबकी लगाने वालों की भीड़ रही। उधर, नदी किनारे
भूरागढ़ में ऐतिहासिक नटबली मेला लगा। इसे आशिकों का मेला भी कहते हैं।
गुरुवार को केन नदी घाटों में डुबकी लगाने के बाद गरीबों को खिचड़ी बांटी। खिली धूप होने से बच्चों, महिलाओं, युवाओं और पुरुषों ने डुबकी लगाई।
उधर, संकट मोचन, महेश्वरी देवी, बांबेश्वर, काली देवी, सिंहवाहिनी, कटरा शिव मंदिर में भक्तों ने पूजा-अर्चना की और खिचड़ी व तिल के लड्डू चढ़ाए। शुक्रवार को भी यही सिलसिला चलेगा।
उधर, कहा जाता है कि केन नदी को कच्चे सूत पर पार करते समय राजा की बेटी पर दिल लगा बैठा नटबली सूत काट देने से नदी में गिर गया था। उसकी मौत हो गई थी।
यह घटना मकर संक्रांति के दिन हुई। तब से यहां नटबली का मेला लगता है। बड़ी संख्या में आसपास के गांवों के लोग मेले का लुत्फ लेते हैं और खरीददारी करते हैं।
हर साल खिचड़ी का प्रसाद बांटने वाले अमिता वाजपेयी, महमूद हुसैन उर्फ बिल्ला, अनूप रावत अबकी भी सक्रिय रहे। मदन मोहन शर्मा मानव, रतना बाबा ने भी इंतजामों में भागीदारी की।
कालिंजर में तड़के से ही दुर्ग में नीलकंठेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लग गया। खिचड़ी का चढ़ावा कर पूजा-अर्चना की गई। कोटि तीर्थ तालाब और बुड्ढा-बुड्ढी तालाब में डुबकी लगाने के बाद तालाब के पास ने जलाभिषेक किया गया।
किले के नीचे दो दिवसीय मेला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं के लिए परिवहन निगम ने अतिरिक्त बसें नहीं चलाईं। डग्गामार वाहनों की चांदी रही। जल संस्थान ने पानी का इंतजाम नहीं किया। ग्राम पंचायत ने पानी की छोटी टंकी रखवा दी थी।
बबेरू में यमुना नदी औगासी व मरका घाट और सिमौनी गड़रा नदी में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। गरीबों को खिचड़ी बांटी और पुरोहितों को दक्षिणा दी।
मढ़ीदाई मंदिर में दिनभर आस्थावानों की भीड़ रही। अतर्रा में गौरा बाबाधाम और गिरवां में विंध्यवासिनी मंदिर व भूतेश्वरनाथ में आस्थावानों ने पूजा-अर्चना की।
नरैनी के बरूवा स्योढ़ा के रामचंद्र पहाड़ और शिवपुर के रनगढ़ किला घाट पर स्नान कर श्रद्धालुओं ने सूर्यदेव को अर्घ्य देकर खिचड़ी दान की।
रनगढ़ घाट पर सीमावर्ती मध्य प्रदेश के श्रद्धालुओं की भी भीड़ रही। रामचंद्र पहाड़ पर मेला में क्षेत्रीय लोगों की भीड़ रही। उधर, बदौसा, कमासिन, बिसंडा, खप्टिहा कलां, जसपुरा, पैलानी समेत गांवों व कसबों में मकर संक्रांति धूमधाम से मनाई गई।
गुरुवार को केन नदी घाटों में डुबकी लगाने के बाद गरीबों को खिचड़ी बांटी। खिली धूप होने से बच्चों, महिलाओं, युवाओं और पुरुषों ने डुबकी लगाई।
उधर, संकट मोचन, महेश्वरी देवी, बांबेश्वर, काली देवी, सिंहवाहिनी, कटरा शिव मंदिर में भक्तों ने पूजा-अर्चना की और खिचड़ी व तिल के लड्डू चढ़ाए। शुक्रवार को भी यही सिलसिला चलेगा।
उधर, कहा जाता है कि केन नदी को कच्चे सूत पर पार करते समय राजा की बेटी पर दिल लगा बैठा नटबली सूत काट देने से नदी में गिर गया था। उसकी मौत हो गई थी।
यह घटना मकर संक्रांति के दिन हुई। तब से यहां नटबली का मेला लगता है। बड़ी संख्या में आसपास के गांवों के लोग मेले का लुत्फ लेते हैं और खरीददारी करते हैं।
हर साल खिचड़ी का प्रसाद बांटने वाले अमिता वाजपेयी, महमूद हुसैन उर्फ बिल्ला, अनूप रावत अबकी भी सक्रिय रहे। मदन मोहन शर्मा मानव, रतना बाबा ने भी इंतजामों में भागीदारी की।
कालिंजर में तड़के से ही दुर्ग में नीलकंठेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लग गया। खिचड़ी का चढ़ावा कर पूजा-अर्चना की गई। कोटि तीर्थ तालाब और बुड्ढा-बुड्ढी तालाब में डुबकी लगाने के बाद तालाब के पास ने जलाभिषेक किया गया।
किले के नीचे दो दिवसीय मेला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं के लिए परिवहन निगम ने अतिरिक्त बसें नहीं चलाईं। डग्गामार वाहनों की चांदी रही। जल संस्थान ने पानी का इंतजाम नहीं किया। ग्राम पंचायत ने पानी की छोटी टंकी रखवा दी थी।
बबेरू में यमुना नदी औगासी व मरका घाट और सिमौनी गड़रा नदी में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। गरीबों को खिचड़ी बांटी और पुरोहितों को दक्षिणा दी।
मढ़ीदाई मंदिर में दिनभर आस्थावानों की भीड़ रही। अतर्रा में गौरा बाबाधाम और गिरवां में विंध्यवासिनी मंदिर व भूतेश्वरनाथ में आस्थावानों ने पूजा-अर्चना की।
नरैनी के बरूवा स्योढ़ा के रामचंद्र पहाड़ और शिवपुर के रनगढ़ किला घाट पर स्नान कर श्रद्धालुओं ने सूर्यदेव को अर्घ्य देकर खिचड़ी दान की।
रनगढ़ घाट पर सीमावर्ती मध्य प्रदेश के श्रद्धालुओं की भी भीड़ रही। रामचंद्र पहाड़ पर मेला में क्षेत्रीय लोगों की भीड़ रही। उधर, बदौसा, कमासिन, बिसंडा, खप्टिहा कलां, जसपुरा, पैलानी समेत गांवों व कसबों में मकर संक्रांति धूमधाम से मनाई गई।