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औषधीय, सुगंध पौधों की खेती करने पर जोर
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बांदा। कृषि विश्वविद्यालय में पुष्प विज्ञान एवं भूदृश्य द्वारा बुंदेलखंड के किसानों की आय दोगुनी करने के लिए औषधीय एवं सुगंध पौधों की वैज्ञानिक खेती के लिए जागरुकता कार्यक्रम किया गया।
कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा अनुसूचित जाति उप योजना के सहयोग से जिले के 50 अनुसूचित जाति के किसानों के लिए किया गया। किसानों को उद्यान महाविद्यालय द्वारा प्रक्षेत्र में तैयार तुलसी, अश्वगंधा एवं अन्य औषधीय व सुगंध पौध वाटिका का भ्रमण कराया गया।
किसानों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों की किट दी गई। कुलपति डॉ. यूएस गौतम ने कहा कि बुंदेलखंड की जमीन एवं जलवायु औषधीय पौधों के लिए उपयुक्त है। इन पौधों को ज्यादा पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती। अन्ना जानवर भी इन्हें नहीं खाते।
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कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. एसवी द्विवेदी ने समूह में औषधीय पौधों की खेती करने पर बल दिया। डॉ. अजय सिंह, केएस तोमर, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. विशाल चुग, डॉ. मंजुल पांडेय, डॉ. ओमप्रकाश आदि मौजूद थे।
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कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा अनुसूचित जाति उप योजना के सहयोग से जिले के 50 अनुसूचित जाति के किसानों के लिए किया गया। किसानों को उद्यान महाविद्यालय द्वारा प्रक्षेत्र में तैयार तुलसी, अश्वगंधा एवं अन्य औषधीय व सुगंध पौध वाटिका का भ्रमण कराया गया।
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किसानों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों की किट दी गई। कुलपति डॉ. यूएस गौतम ने कहा कि बुंदेलखंड की जमीन एवं जलवायु औषधीय पौधों के लिए उपयुक्त है। इन पौधों को ज्यादा पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती। अन्ना जानवर भी इन्हें नहीं खाते।
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कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. एसवी द्विवेदी ने समूह में औषधीय पौधों की खेती करने पर बल दिया। डॉ. अजय सिंह, केएस तोमर, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. विशाल चुग, डॉ. मंजुल पांडेय, डॉ. ओमप्रकाश आदि मौजूद थे।