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बारिश में चालक साफ करते शीशे, सवारियां रखतीं छाता
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बांदा डिपो की बस में छाता लगाकर बैठा यात्री। (संवाद)
- फोटो : BANDA
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बांदा। बारिश के मौसम में परिवहन निगम की जर्जर बसों में सफर करना मुश्किल भरा हो गया है। परिवहन निगम की लगभग 25 फीसदी बसें जर्जर और मानक पूरा कर चुकी हैं, फिर भी इन्हें ठोक-पीटकर मुसाफिरों को ढोने में लगाया गया है। कभी भी ये बसें राह में धोखा दे सकती हैं।
बारिश के समय बसों की टपकती छतों की वजह से यात्रियों को छाता लगाकर बैठना पड़ता है। कुछ ऐसा ही नजारा बांदा डिपो की बस में नजर आया। बारिश से यात्रियों का सामान भी भीग जाता है। हालांकि, इन बसों को लंबे रूट पर नहीं भेजा जाता है। चित्रकूटधाम मंडल परिवहन निगम के बेड़े में 404 बसें हैं। मौजूदा समय में 300 रोडवेज बसें सड़कों पर फर्राटा भर रही हैं।
इनमें प्रतिदिन आठ से 10 हजार यात्री सफर करते हैं। इनमें लगभग 25 फीसदी बसें जर्जर और मानक पूरा कर चुकी हैं। इसके बावजूद इन बसों को चलाया जा रहा है। इनमें यात्रा करने वालों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। बसों की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि फर्श-छत, दरवाजे-खिड़कियां सभी से शोर होता है। बसों की बॉडी के शोर से यात्रियों को एक-दूसरे की आवाज सुनना मुश्किल होता है।
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कुछ बसों की छत टपकने से यात्रियों को भीगकर सफर करना पड़ रहा है। यात्रियों को पानी से बचने के लिए बस में छाता लगाकर बैठना पड़ता है। जर्जर बसों में सफर करने वाले यात्री नहीं, बल्कि उनके चालक भी परेशान हैं। चालकों का कहना है कि महोबा, कर्वी, कालिंजर व फतेहपुर मार्ग पर चलने वाली ज्यादातर बसों में वाइपर नहीं है। बारिश के समय हर 50 मीटर चलने के बाद बस रोककर शीशा साफ करना पड़ता है।
वर्कशाप में भी बसों की सही मरम्मत नहीं की जाती। आरोप लगाया कि फोरमैन द्वारा छोटी कमियों को खुद ठीक करा लेने की बात कही जाती है। उधर, बसों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए कहा जाता है। फिर भी आमदनी कम होने पर उन्हें परेशान किया जाता है। निगम अधिकारी चालक-परिचालक का मानेदय रोक देते हैं।
चित्रकूटधाम मंडल के स्टेशन प्रबंधक केपी सिंह का कहना है कि बरसात के पूर्व सभी बसों को दुरुस्त करने के आदेश दिए गए थे। कोई बस सेल्फ स्टार्ट नहीं है या उसमें पानी टपकता है तो जानकारी करने के बाद संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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बारिश के समय बसों की टपकती छतों की वजह से यात्रियों को छाता लगाकर बैठना पड़ता है। कुछ ऐसा ही नजारा बांदा डिपो की बस में नजर आया। बारिश से यात्रियों का सामान भी भीग जाता है। हालांकि, इन बसों को लंबे रूट पर नहीं भेजा जाता है। चित्रकूटधाम मंडल परिवहन निगम के बेड़े में 404 बसें हैं। मौजूदा समय में 300 रोडवेज बसें सड़कों पर फर्राटा भर रही हैं।
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इनमें प्रतिदिन आठ से 10 हजार यात्री सफर करते हैं। इनमें लगभग 25 फीसदी बसें जर्जर और मानक पूरा कर चुकी हैं। इसके बावजूद इन बसों को चलाया जा रहा है। इनमें यात्रा करने वालों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। बसों की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि फर्श-छत, दरवाजे-खिड़कियां सभी से शोर होता है। बसों की बॉडी के शोर से यात्रियों को एक-दूसरे की आवाज सुनना मुश्किल होता है।
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कुछ बसों की छत टपकने से यात्रियों को भीगकर सफर करना पड़ रहा है। यात्रियों को पानी से बचने के लिए बस में छाता लगाकर बैठना पड़ता है। जर्जर बसों में सफर करने वाले यात्री नहीं, बल्कि उनके चालक भी परेशान हैं। चालकों का कहना है कि महोबा, कर्वी, कालिंजर व फतेहपुर मार्ग पर चलने वाली ज्यादातर बसों में वाइपर नहीं है। बारिश के समय हर 50 मीटर चलने के बाद बस रोककर शीशा साफ करना पड़ता है।
वर्कशाप में भी बसों की सही मरम्मत नहीं की जाती। आरोप लगाया कि फोरमैन द्वारा छोटी कमियों को खुद ठीक करा लेने की बात कही जाती है। उधर, बसों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए कहा जाता है। फिर भी आमदनी कम होने पर उन्हें परेशान किया जाता है। निगम अधिकारी चालक-परिचालक का मानेदय रोक देते हैं।
चित्रकूटधाम मंडल के स्टेशन प्रबंधक केपी सिंह का कहना है कि बरसात के पूर्व सभी बसों को दुरुस्त करने के आदेश दिए गए थे। कोई बस सेल्फ स्टार्ट नहीं है या उसमें पानी टपकता है तो जानकारी करने के बाद संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।