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पीएचसी में पर्चे के साथ डाक्टर का विजिटिंग कार्ड
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पीएचसी के पर्चे के साथ डाक्टर द्वारा दिया गया विजिटिंग कार्ड दिखाता मरीज।
- फोटो : BANDA
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तिंदवारी। डाक्टरों के अभाव से जूझ रहे नेशनल हाईवे पर स्थित पीएचसी में इकलौते डाक्टर मरीजों को दवा का पर्चा देने के साथ अपना विजिटिंग कार्ड भी थमा रहे हैं। उनके नजदीक बैठने वाला सहयोगी मरीज को डाक्टर के घर का पता भी समझा देता है।
तिंदवारी कस्बा सहित लगभग 36 गांव के मरीज यहां पीएचसी आते हैं। लेकिन पीएचसी में न तो पर्याप्त डाक्टर हैं और न स्टाफ व दवाएं। नेशनल हाईवे पर आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं के घायलों को भी यहीं लाया जाता है। लेकिन उनको कोई इलाज किए बगैर रेफर कर दिया जाता है। पीएचसी में मात्र डा.एसके यादव मरीजों को देखते हैं।
उनकी खास बात यह है कि पीएचसी के पर्चे पर दवा लिखने के साथ अपना विजिटिंग कार्ड भी देते हैं। वह बांदा शहर में रहते हैं। कस्बे के रामदीन कुशवाहा, संतोषिया, धीरज, मनोज कुमार, संतोष यादव, संजय सिंह और मूंगुस गांव के अजय व विनोद आदि ने बताया कि उन्हें यह कहकर बांदा आने की सलाह दी गई है कि यहां जांच सुविधाएं नहीं हैं।
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उधर, चिकित्साधिकारी डा.एसके यादव का कहना है कि वह किसी भी मरीज को निजी आवास पर हरगिज नहीं बुलाते। बल्कि कोई मरीज या उसका तीमारदार उनका संपर्क नंबर मांगता है तो विजिटिंग कार्ड दे देते हैं। इसमें क्या हर्ज है?
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तिंदवारी कस्बा सहित लगभग 36 गांव के मरीज यहां पीएचसी आते हैं। लेकिन पीएचसी में न तो पर्याप्त डाक्टर हैं और न स्टाफ व दवाएं। नेशनल हाईवे पर आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं के घायलों को भी यहीं लाया जाता है। लेकिन उनको कोई इलाज किए बगैर रेफर कर दिया जाता है। पीएचसी में मात्र डा.एसके यादव मरीजों को देखते हैं।
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उनकी खास बात यह है कि पीएचसी के पर्चे पर दवा लिखने के साथ अपना विजिटिंग कार्ड भी देते हैं। वह बांदा शहर में रहते हैं। कस्बे के रामदीन कुशवाहा, संतोषिया, धीरज, मनोज कुमार, संतोष यादव, संजय सिंह और मूंगुस गांव के अजय व विनोद आदि ने बताया कि उन्हें यह कहकर बांदा आने की सलाह दी गई है कि यहां जांच सुविधाएं नहीं हैं।
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उधर, चिकित्साधिकारी डा.एसके यादव का कहना है कि वह किसी भी मरीज को निजी आवास पर हरगिज नहीं बुलाते। बल्कि कोई मरीज या उसका तीमारदार उनका संपर्क नंबर मांगता है तो विजिटिंग कार्ड दे देते हैं। इसमें क्या हर्ज है?