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Banda News: 12 साल बाद मिले बर्खास्त फरार सिपाही, मुचलके पर छोड़े गए
Sat, 06 Dec 2025 12:35 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 06 Dec 2025 12:35 AM IST
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बांदा। करीब 18 साल पुराने मामले में हिरासत से मुल्जिम के फरार होने के दोषी पाए गए दो बर्खास्त सिपाहियों को एसीजेएम रेलवे कोर्ट के न्यायाधीश दिव्यकांत सिंह ने एक-एक साल की सजा सुनाई। दोनों सिपाहियों की वृद्धावस्था को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें निजी मुचलके पर छोड़ दिया। वहीं, एक माह के भीतर फैसले के विरुद्ध अपील करने का अवसर भी प्रदान किया है।
गैंगस्टर कोर्ट झांसी से मुल्जिम वसीम खान को दो सिपाही वर्ष 2007 में बांदा लेकर आ रहे थे। तभी वसीम खान दोनों सिपाहियों से हथकड़ी छुड़ाकर फरार हो गया था। जीआरपी थानाध्यक्ष शिवबाबू के अनुसार फरारी के बाद वसीम खां ने खुद आत्मसमर्पण कर दिया था, किंतु बाद में उसकी मृत्यु हो गई थी। जांच में सिपाहियों की गंभीर लापरवाही सामने आने पर कानपुर नगर के सेन पश्चिम पारा के तिरमा गांव निवासी सिपाही सुरेश तिवारी और कानपुर नगर के कल्याणपुर क्षेत्र के शिवनगर नई बस्ती निवासी विजय पाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
जांच के दौरान दोनों के घर का पता भी गलत मिला था। जिसके चलते जीआरपी को लगभग 12 वर्षों तक खोजबीन करती रही। विभागीय जांच में दोष सिद्ध होने पर दोनों को पहले ही सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। वहीं, कोर्ट ने अब दोनों को सजा सुनाई लेकिन वृद्धावस्था को देखते हुए निजी मुचलके पर छोड़ने का आदेश भी किया। जीआरपी थानाध्यक्ष शिवबाबू ने बताया कि न्यायालय ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें अपील का अवसर भी प्रदान किया है।
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गैंगस्टर कोर्ट झांसी से मुल्जिम वसीम खान को दो सिपाही वर्ष 2007 में बांदा लेकर आ रहे थे। तभी वसीम खान दोनों सिपाहियों से हथकड़ी छुड़ाकर फरार हो गया था। जीआरपी थानाध्यक्ष शिवबाबू के अनुसार फरारी के बाद वसीम खां ने खुद आत्मसमर्पण कर दिया था, किंतु बाद में उसकी मृत्यु हो गई थी। जांच में सिपाहियों की गंभीर लापरवाही सामने आने पर कानपुर नगर के सेन पश्चिम पारा के तिरमा गांव निवासी सिपाही सुरेश तिवारी और कानपुर नगर के कल्याणपुर क्षेत्र के शिवनगर नई बस्ती निवासी विजय पाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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जांच के दौरान दोनों के घर का पता भी गलत मिला था। जिसके चलते जीआरपी को लगभग 12 वर्षों तक खोजबीन करती रही। विभागीय जांच में दोष सिद्ध होने पर दोनों को पहले ही सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। वहीं, कोर्ट ने अब दोनों को सजा सुनाई लेकिन वृद्धावस्था को देखते हुए निजी मुचलके पर छोड़ने का आदेश भी किया। जीआरपी थानाध्यक्ष शिवबाबू ने बताया कि न्यायालय ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें अपील का अवसर भी प्रदान किया है।
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