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कल्याण समिति करेगी संक्रमित माताओं के बच्चों की देखभाल

Tue, 26 May 2020 10:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 26 May 2020 10:57 PM IST
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CWC will take care of children of infected mothers
बांदा। मां के कोरोना संक्रमण या क्वारंटीन होने के दौरान उनके बच्चों की देखरेख अब बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) करेगी। हालांकि इस संबंध में उन्हें जिलाधिकारी से मांग करना होगी। समिति की दो सदस्यीय टीम इसके लिए तैयार है।
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जिला बाल संरक्षण इकाई के बाल संरक्षण अधिकारी राजीव प्रताप सिंह का कहना है कि यदि किसी महिला की गोद में दुधमुंहा बच्चा है और महिला में कोरोना जैसे लक्षण हैं तो दोनों को क्वारंटीन होना पड़ेगा। जांच में यदि महिला कोरोना पॉजिटिव पाई जाती है तो उसे लंबे उपचार की जरूरत होती है। परिवार में कोई जिम्मेदार न होने पर संबंधित महिला अपने दुुधमुंहे बच्चे की देखभाल के लिए जिलाधिकारी से मांग कर सकती है। समिति बच्चे की समुचित देखभाल के लिए शिशु गृह या किसी सामाजिक संस्था को सौंप देगी। बालक को बाल गृह और बालिका को बालिका गृह में देखभाल के लिए भेजा जाएगा।
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उन्होंने बताया कि बाल अधिकारों की रक्षा और उनके संरक्षण के लिए ही बाल संरक्षण आयोग का गठन किया गया है। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम- 2000 के तहत भी बच्चों के समुचित देखभाल और संरक्षण का अधिकार आयोग को प्राप्त है। इसके तहत दो ऐसे निकाय हर जिले में स्थापित किए गए हैं जिसमें जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) शामिल हैं। हालांकि इस एक्ट में वर्ष 2015 में कुछ बदलाव भी किए गए। इसी के तहत प्रत्येक जिले में बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए चार सदस्यीय बाल कल्याण समिति का गठन किया गया है। उधर, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष राम कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल अभी तक जनपद में इस तरह का कोई केस नहीं आया है। ऐसा होने पर बाल कल्याण समिति बच्चे की देखरेख की पूरी जिम्मेदारी लेगी।
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उधर, कोरोना वायरस के इस दौर में तमाम माताएं बच्चों को जन्म दे रही हैं। ऐसे में गर्भवती महिलाओं और जच्चा-बच्चा को संक्रमण से बचाने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि मां संक्रमित हो तो बच्चे को तब तक दूर रखा जाए जब तक वह स्वस्थ नहीं हो जाती। आईसीएमआर के अनुसार यदि गर्भवती को सर्दी-खांसी व बुखार या सांस लेने में तकलीफ है अथवा संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने का संदेह है तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। हमेशा मॉस्क पहनें। शिशु को छूने से पहले हाथ जरूर धोएं। गर्भवती और प्रसूताएं कम लोगों के संपर्क में रहें। साझंा बाथरूम होने पर इस्तेमाल से पूर्व उसे सैनिटाइज जरूर करें।
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