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दलित युवती से दुराचार में सात साल की कैद व जुर्माना
banda
Updated Wed, 24 Jan 2018 11:30 PM IST
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बांदा। दलित युवती से दुराचार के मामले में अदालत ने अभियुक्त को सात साल की कैद व 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना की आधी धनराशि पीड़ित युवती को मिलेगी।
बदौसा थाना क्षेत्र के एक गांव की नवविवाहिता युवती ने थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि थाना क्षेत्र के दुबरिया गांव के मजरा उसरा पुरवा निवासी शब्बीर पुत्र चुन्ना खां 18 नवंबर 2010 को सुबह उसे सड़क में काम के लिए मजदूरी पर ले गया था।
रास्ते में सूना मौका पाकर उसे ज्वार के खेत में घसीट ले गया और दुराचार किया। चिल्लाने पर जातिसूचक शब्दों से अपमानित करते हुए जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद वह भाग निकला। वापस घर आकर उसने परिजनों को आपबीती बताई। पिता उसे लेकर बदौसा थाने गया। यहां पुलिस ने तीन दिन तक दौड़धूप के बाद जिला महिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया।
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इस दौरान थानाध्यक्ष उसे बयान बदलने और परिजनों को सुलह के लिए दबाव डालते रहे। रिपोर्ट दर्ज न होने पर उसने सीजेएम कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत अर्जी दी। 10 फरवरी 2011 को कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने शब्बीर के विरुद्ध आईपीसी की धारा 376, 504, 506 व एससीएसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की।
अदालत में चार्जशीट दाखिल होने के बाद मुकदमें की सुनवाई त्वरित न्यायाधीश प्रथम शाम कुमार की अदालत में हुई। सहायक शासकीय अधिवक्ता शिवपूजन सिंह ने सुनवाई के दौरान चार गवाह पेश किए। बुधवार को दिए फैसले में न्यायाधीश ने अभियुक्त को धारा 376 में दोष सिद्ध पाते हुए सजा सुनाई। अभियुक्त एक साल से जेल में है। जेल में बिताई अवधि सजा में समायोजित होगी। सीएचसी लाए। यहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शिव अक्सर बीमार रहता था। ब्यूरो
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बदौसा थाना क्षेत्र के एक गांव की नवविवाहिता युवती ने थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि थाना क्षेत्र के दुबरिया गांव के मजरा उसरा पुरवा निवासी शब्बीर पुत्र चुन्ना खां 18 नवंबर 2010 को सुबह उसे सड़क में काम के लिए मजदूरी पर ले गया था।
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रास्ते में सूना मौका पाकर उसे ज्वार के खेत में घसीट ले गया और दुराचार किया। चिल्लाने पर जातिसूचक शब्दों से अपमानित करते हुए जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद वह भाग निकला। वापस घर आकर उसने परिजनों को आपबीती बताई। पिता उसे लेकर बदौसा थाने गया। यहां पुलिस ने तीन दिन तक दौड़धूप के बाद जिला महिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया।
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इस दौरान थानाध्यक्ष उसे बयान बदलने और परिजनों को सुलह के लिए दबाव डालते रहे। रिपोर्ट दर्ज न होने पर उसने सीजेएम कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत अर्जी दी। 10 फरवरी 2011 को कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने शब्बीर के विरुद्ध आईपीसी की धारा 376, 504, 506 व एससीएसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की।
अदालत में चार्जशीट दाखिल होने के बाद मुकदमें की सुनवाई त्वरित न्यायाधीश प्रथम शाम कुमार की अदालत में हुई। सहायक शासकीय अधिवक्ता शिवपूजन सिंह ने सुनवाई के दौरान चार गवाह पेश किए। बुधवार को दिए फैसले में न्यायाधीश ने अभियुक्त को धारा 376 में दोष सिद्ध पाते हुए सजा सुनाई। अभियुक्त एक साल से जेल में है। जेल में बिताई अवधि सजा में समायोजित होगी। सीएचसी लाए। यहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शिव अक्सर बीमार रहता था। ब्यूरो