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हत्या में आजीवन कारावास
ब्यूरो/अमर उजाला,बांदा
Updated Thu, 18 Feb 2016 11:41 PM IST
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बांदा। हत्याभियुक्त को दोष सिद्ध पाते हुए अदालत ने
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आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 10 हजार रुपये जुर्माना भी किया गया।
अभियुक्त पांच साल से जेल में है।
बबेरू कोतवाली क्षेत्र के भटौली (मझीवां) गांव निवासी जगदेव निषाद ने 7 दिसंबर 2010 को दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि खेत से फसल लेकर घर आते समय गांव के नजदीक शुभकरन निषाद ने ललकारते हुए शिवरोमन (40) की गोली मारकर हत्या कर दी।
ग्रामीणों के इकट्ठे होने पर धमकी देते हुए अभियुक्त भाग निकला। बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर तमंचा बरामद किया। जांच के बाद विवेचना अधिकारी ने शुभकरन के विरुद्ध अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
प्रभारी सत्र न्यायाधीश केके अस्थाना की अदालत में सुनवाई के दौरान सहायक शासकीय अधिवक्ता मूलचंद्र कुशवाहा ने छह गवाह पेश किए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस व पत्रावलियों के अवलोकन के बाद शुभकरन को दोषी पाया।
बृहस्पतिवार को 27 पृष्ठीय फैसले में न्यायाधीश ने हत्या के मामले में आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना व शस्त्र अधिनियम में तीन वर्ष की कठोर कारावास व 5000 रुपये जुर्माना सुनाया।
जुर्माना अदा न करने पर दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समायोजित होगी।
बबेरू कोतवाली क्षेत्र के भटौली (मझीवां) गांव निवासी जगदेव निषाद ने 7 दिसंबर 2010 को दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि खेत से फसल लेकर घर आते समय गांव के नजदीक शुभकरन निषाद ने ललकारते हुए शिवरोमन (40) की गोली मारकर हत्या कर दी।
ग्रामीणों के इकट्ठे होने पर धमकी देते हुए अभियुक्त भाग निकला। बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर तमंचा बरामद किया। जांच के बाद विवेचना अधिकारी ने शुभकरन के विरुद्ध अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
प्रभारी सत्र न्यायाधीश केके अस्थाना की अदालत में सुनवाई के दौरान सहायक शासकीय अधिवक्ता मूलचंद्र कुशवाहा ने छह गवाह पेश किए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस व पत्रावलियों के अवलोकन के बाद शुभकरन को दोषी पाया।
बृहस्पतिवार को 27 पृष्ठीय फैसले में न्यायाधीश ने हत्या के मामले में आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना व शस्त्र अधिनियम में तीन वर्ष की कठोर कारावास व 5000 रुपये जुर्माना सुनाया।
जुर्माना अदा न करने पर दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समायोजित होगी।