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बबुली गैंग से मुठभेड़ में दरोगा शहीद, तीन पकड़े

Thu, 24 Aug 2017 11:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट Updated Thu, 24 Aug 2017 11:55 PM IST
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Dowoga martyr in encounter with the bull gang, three arrested
शहीद दरोगा जेपी ‌सिंह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

मानिकपुर (चित्रकूट)। थाने के निही गांव के औदर जंगल में गुरुवार तड़के पुलिस की पांच लाख तीस हजार के इनामी डकैत बबुली कोल गैंग से मुठभेड़ हो गई। इसमें रैपुरा थाने में तैनात दरोगा जयप्रकाश शहीद हो गए। डकैतों की गोलियों से बहिलपुरवा थाने के दरोगा वीरेंद्र त्रिपाठी भी घायल हुए हैं। पुलिस ने घेरा कसते हुए तीन डकैतों को धर दबोचा है। इनमें एक डकैत राजू कोल को पुलिस की गोली लगी है। गैंग सरगना समेत अन्य डकैत भाग निकले। एडीजी, डीआईजी समेत कई थानों की फोर्स जंगल में कांबिंग कर रही है। पुलिस का दावा है कि बबुली कोल और 50 हजार के इनामी लवलेश कोल को भी गोली लगी है।

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बुधवार देर शाम निही चिरैया गांव में बबुली गैंग की मौजूदगी की सूचना पर एसपी प्रताप गोपेंद्र सिंह व एएसपी बलवंत चौधरी दो टीमें लेकर पहुंचे। डकैत गांव के बाहर औदर जंगल से सटे एक पुराने घर में थे। पुलिस ने देर रात तक उन पर निगाह रखी। गुरुवार तड़के लगभग चार बजे पुलिस टीम आगे बढ़ी। पुलिस की भनक पाकर डकैतों ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी पोजीशन लेकर गोलियां चलाईं। इस बीच डकैतों की गोली से दरोगा जयप्रकाश उर्फ जेपी सिंह और दरोगा वीरेंद्र त्रिपाठी घायल हो गए। अस्पताल में इलाज के दौरान जेपी सिंह की मौत हो गई।
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इधर, पुलिस की गोली से औदर निही निवासी डाकू राजू कोल पुत्र ददुआ कोल भी घायल हो गया। पुलिस ने घेरा कसते हुए उसे तथा डकैत सुग्रीव कोल पुत्र महेश कोल निवासी घाटाकोलान और गुड्डन उर्फ श्रीपाल को दबोच लिया। मौके पर एक स्वचालित राइफल सहित तीन असलहे व कारतूस मिले। मुठभेड़ की जानकारी होते ही एडीजी बीएन सावंत, डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी के साथ इलाहाबाद व बांदा की पुलिस फोर्स व पीएसी जंगल में पहुंच गई। सतना एसपी राजेश हिंगडकर की टीम ने भी मध्य प्रदेश के इलाके में डकैतों की घेराबंदी की, पर अन्य डकैत बच निकले। नागर से लेकर निही के जंगलों में देर शाम तक कांबिंग जारी थी। घायल दरोगा वीरेंद्र त्रिपाठी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। एडीजी बीएन सावंत ने बताया कि मुठभेड़ स्थल पर मिले खून के निशानों से स्पष्ट है कि सरगना बबुली, लवलेश समेत कई डाकुओं को गोली लगी है।
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शहीद के परिजनों को 25 लाख की मदद
शहीद दरोगा जयप्रकाश के शव को लेकर पुलिस टीम मुख्यालय पहुंची। पोस्टमार्टम के बाद कमिश्नर अजय शुक्ला, डीएम शिवाकांत द्विवेदी की मौजूदगी में गार्ड ऑफ ऑनर देकर उनके शव को सम्मानपूर्वक पैतृक गांव भेजा गया। एडीजी बीएन सावंत ने बताया कि शहीद दरोगा की पत्नी और बच्चों को 20 लाख और उनके माता-पिता को पांच लाख की आर्थिक मदद दी जाएगी।


जौनपुर के थे दरोगा जयप्रकाश
शहीद दरोगा जयप्रकाश मूलरूप से जौनपुर जिले के नेवढ़िया थाने के बनेवरा गांव के रहने वाले थे। उनकी भर्ती 1991 में कांस्टेबल के रूप में हुई थी। उनका इसी माह गोरखपुर रेंज में ट्रांसफार्मर हुआ था, लेकिन स्टाफ कम होने और ट्रेेनिंग देने जाने के कारण उन्हें रिलीव नहीं किया जा सका था।

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