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बेटे को बाप ने जंजीरों में जकड़ा
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बांदा। मंडल और जिले के आला अफसरों के रोजाना गुजरने वाले रास्ते महाराणा प्रताप चौक चौराहे पर लोहे की जंजीरों से जकड़ा युवक अक्सर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। मगर वाहनों पर सवार अफसरों की शायद उस पर नजर नहीं पड़ती।
कड़ाके की ठंड में भी इस युवक के जिस्म पर नाममात्र को कपड़े रहे। परिजनों की दलील है कि छुट्टा रखने पर यह राहगीरों और सामने पड़ने वालों पर हमला कर देता है।
शहर के गायत्री नगर निवासी विशंभर साहू महाराणा प्रताप चौक पर सब्जी की दुकान किए है। घर में उनका 25 वर्षीय बेटा पवन साहू दिन रात जंजीरों में जकड़ा रहता है। इंसान को जानवर की तरह बांधने के पीछे पिता की दलील है कि वह लोगों के साथ मारपीट करता है। अप्रिय घटना से बचने के लिए उसे बांधकर रखते हैं। पिता के मुताबिक पवन वर्ष 2000 तक ठीकठाक था। 8वीं में पढ़ रहा था।
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तभी कचहरी में साइकिल चोरी के आरोप में भीड़ ने उसे गलतफहमी में बुरी तरह मारापीटा। तभी से वह दिमागी रूप से कमजोर हो गया। याददाश्त भी चली गई। लोगों के साथ मारपीट करने लगा। हालांकि ग्वालियर और कानपुर में उसका लगातार लंबा इलाज कराया। इसके लिए उसे अपने पैतृक गांव हस्तम में अपना मकान डेढ़ लाख रुपये में बेचना पड़ा। फिर भी उसका बेटा स्वस्थ नहीं हुआ। विशंभर बताते हैं कि विक्षिप्त पुत्र रात को बहुत कम सोता है। खाना नहीं मांगता। खुद ही किचेन से निकालकर खा लेता है।
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कड़ाके की ठंड में भी इस युवक के जिस्म पर नाममात्र को कपड़े रहे। परिजनों की दलील है कि छुट्टा रखने पर यह राहगीरों और सामने पड़ने वालों पर हमला कर देता है।
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शहर के गायत्री नगर निवासी विशंभर साहू महाराणा प्रताप चौक पर सब्जी की दुकान किए है। घर में उनका 25 वर्षीय बेटा पवन साहू दिन रात जंजीरों में जकड़ा रहता है। इंसान को जानवर की तरह बांधने के पीछे पिता की दलील है कि वह लोगों के साथ मारपीट करता है। अप्रिय घटना से बचने के लिए उसे बांधकर रखते हैं। पिता के मुताबिक पवन वर्ष 2000 तक ठीकठाक था। 8वीं में पढ़ रहा था।
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तभी कचहरी में साइकिल चोरी के आरोप में भीड़ ने उसे गलतफहमी में बुरी तरह मारापीटा। तभी से वह दिमागी रूप से कमजोर हो गया। याददाश्त भी चली गई। लोगों के साथ मारपीट करने लगा। हालांकि ग्वालियर और कानपुर में उसका लगातार लंबा इलाज कराया। इसके लिए उसे अपने पैतृक गांव हस्तम में अपना मकान डेढ़ लाख रुपये में बेचना पड़ा। फिर भी उसका बेटा स्वस्थ नहीं हुआ। विशंभर बताते हैं कि विक्षिप्त पुत्र रात को बहुत कम सोता है। खाना नहीं मांगता। खुद ही किचेन से निकालकर खा लेता है।