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दो विवेचकों पर कार्रवाई के अदालत ने दिए आदेश
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बांदा। काफी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ बरामदगी के केस में अभियोजन की स्वीकृति लिए बिना अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने पर पुलिस के दो विवेचकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के आदेश अदालत ने दिए हैं। जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया है कि कार्रवाई के लिए प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को अग्रसारित करें।
गिरवां थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष चंद्रभान सिंह और उप निरीक्षक अब्दुल जब्बार ने थाने के अन्य पुलिस कर्मियों के साथ 6 सितंबर 2008 को दिन में करीब साढ़े 3 बजे थाना क्षेत्र के गोविंदपुर गांव के पास गिरवां गांव निवासी विक्कू उर्फ विकास अवस्थी पुत्र विश्वनाथ व रज्जू पुत्र अंबिका प्रसाद तिवारी को बाइक पर जाते समय पकड़ा था।
इन दोनों के पास तीन फ्यूज वायर, 200 एक्सप्लोसिव छड़ और 25 एमएम एक्सप्लोसिव ग्लास आदि विस्फोटक सामग्री बरामद की थी। पुलिस ने दोनों पर विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर चालान किया था। इस केस की सुनवाई कर रहे प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्मद अशरफ अंसारी ने मंगलवार को इस मामले में अपना आदेश/फैसला सुनाया।
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न्यायाधीश ने पुलिस के दोनों विवेचकों (तत्कालीन थानाध्यक्ष) जेपी सिंह व प्रदीप कुमार चौधरी द्वारा अभियोजन की स्वीकृति लिए बिना आरोप पत्र दाखिल करने और बाद में लैब से आई जांच रिपोर्ट भेजने पर दोनों के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए हैं। पुलिस विवेचकों की इस चूक का फायदा अभियुक्तों को मिला। न्यायालय ने दोनों को बरी कर दिया। अभियुक्तों की पैरवी फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक दीक्षित व अभिसार दीक्षित ने की।
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गिरवां थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष चंद्रभान सिंह और उप निरीक्षक अब्दुल जब्बार ने थाने के अन्य पुलिस कर्मियों के साथ 6 सितंबर 2008 को दिन में करीब साढ़े 3 बजे थाना क्षेत्र के गोविंदपुर गांव के पास गिरवां गांव निवासी विक्कू उर्फ विकास अवस्थी पुत्र विश्वनाथ व रज्जू पुत्र अंबिका प्रसाद तिवारी को बाइक पर जाते समय पकड़ा था।
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इन दोनों के पास तीन फ्यूज वायर, 200 एक्सप्लोसिव छड़ और 25 एमएम एक्सप्लोसिव ग्लास आदि विस्फोटक सामग्री बरामद की थी। पुलिस ने दोनों पर विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर चालान किया था। इस केस की सुनवाई कर रहे प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्मद अशरफ अंसारी ने मंगलवार को इस मामले में अपना आदेश/फैसला सुनाया।
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न्यायाधीश ने पुलिस के दोनों विवेचकों (तत्कालीन थानाध्यक्ष) जेपी सिंह व प्रदीप कुमार चौधरी द्वारा अभियोजन की स्वीकृति लिए बिना आरोप पत्र दाखिल करने और बाद में लैब से आई जांच रिपोर्ट भेजने पर दोनों के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए हैं। पुलिस विवेचकों की इस चूक का फायदा अभियुक्तों को मिला। न्यायालय ने दोनों को बरी कर दिया। अभियुक्तों की पैरवी फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक दीक्षित व अभिसार दीक्षित ने की।