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ट्रूनेट मशीन से मात्र दो घंटे में होगी कोरोना की जांच
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बांदा। गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीजों की कोरोना जांच अब जिले में ही हो सकेगी। जिला अस्पताल में ट्रूनैट मशीन चालू हो गई। इस मशीन से मात्र दो घंटे में पता चल जाएगा कि मरीज कोरोना संक्रमित है या नहीं। एक बार में दो सैंपल की जांच हो सकेगी। फिलहाल इसका इस्तेमाल गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों तथा सर्जरी मरीजों के लिए किया जाएगा।
गंभीर रूप बीमार लोगों के इलाज से पहले उसका सैंपल कोरोना जांच के लिए झांसी लैब भेजा जाता था। वहां से रिपोर्ट आने में लगभग 2 से 3 दिन लग जाते थे। ऐसे में गंभीर मरीजों की मौत पर बन आती थी।
अब ट्रूनैट मशीन संचालित होने से मात्र दो घंटे में ही जांच रिपोर्ट हासिल हो जाएगी और मरीजों को तुरंत इलाज मिल जाएगा। गुरुवार को जिला अस्पताल के पैथालॉजी विभाग में मशीन लगा दी गई है। ड्यूटी के लिए निर्धारित समय सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक ट्रू-नैट मशीन से लगभग 10 से 12 नमूनों की जांच हो जाएगी।
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मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसएन मिश्र ने दो लैब टेक्नीशियन डॉ. दिनेश कुमार और डॉ. शशांक सहित स्वास्थ्य कर्मियों की ड्यूटी लगा दी है। उन्होंने बताया कि ट्रूनैट मशीन का उपयोग आपात सेवा के मरीजों के लिए किया जाएगा। अन्य मरीजों की कोरोना जांच मशीन से नहीं होगी।
पॉजिटिव रिपोर्ट आई तो आरटीपीसीआर टेस्ट जरूरी
बांदा। किडनी, बीपी, शुगर, एक्सीडेंट या ऑपरेशन से संबंधित मरीज का स्वैब लेकर ट्रूनैट मशीन से कोरोना जांच की जाएगी। पहली बार में रिपोर्ट निगेटिव आई तो मरीज का तुरंत इलाज शुरू हो जाएगा। किसी मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो दूसरी बार फिर सैंपल लेकर जांच की जाएगी।
दोबारा फिर पॉजिटिव आने पर उस मरीज को संक्रमित मानते हुए आरटीपीसीआर जांच के लिए कोविड-19 हॉस्पिटल रेफर किया जाएगा। सीएमएस ने बताया कि आरटीपीसीआर की रिपोर्ट आने के बाद ही मरीज के पॉजिटिव या निगेटिव की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
तीन दिनों में एक भी सैंपल की नहीं हुई जांच
बांदा। जिला अस्पताल के पैथालॉजी विभाग में स्थित टीबी जांच कक्ष में स्थापित ट्रूनैट मशीन फिलहाल शोपीस बनी है। लखनऊ से आए इंजीनियरों द्वारा इसे तीन दिन पूर्व इंस्टाल किया गया था, लेकिन अब तक एक भी सैंपल की जांच नहीं हुई।
इस बाबत सीएमएस डॉ. एसएन मिश्र का कहना है कि टीबी जांच कक्ष में मशीन लगने से मुश्किल हो रही है। शुक्रवार को मशीन को ट्रामा सेंटर के ऊपरी भवन में स्थित आइसोलेशन विभाग में लगाया जाएगा। तभी जांच शुरू होगी।
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गंभीर रूप बीमार लोगों के इलाज से पहले उसका सैंपल कोरोना जांच के लिए झांसी लैब भेजा जाता था। वहां से रिपोर्ट आने में लगभग 2 से 3 दिन लग जाते थे। ऐसे में गंभीर मरीजों की मौत पर बन आती थी।
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अब ट्रूनैट मशीन संचालित होने से मात्र दो घंटे में ही जांच रिपोर्ट हासिल हो जाएगी और मरीजों को तुरंत इलाज मिल जाएगा। गुरुवार को जिला अस्पताल के पैथालॉजी विभाग में मशीन लगा दी गई है। ड्यूटी के लिए निर्धारित समय सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक ट्रू-नैट मशीन से लगभग 10 से 12 नमूनों की जांच हो जाएगी।
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मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसएन मिश्र ने दो लैब टेक्नीशियन डॉ. दिनेश कुमार और डॉ. शशांक सहित स्वास्थ्य कर्मियों की ड्यूटी लगा दी है। उन्होंने बताया कि ट्रूनैट मशीन का उपयोग आपात सेवा के मरीजों के लिए किया जाएगा। अन्य मरीजों की कोरोना जांच मशीन से नहीं होगी।
पॉजिटिव रिपोर्ट आई तो आरटीपीसीआर टेस्ट जरूरी
बांदा। किडनी, बीपी, शुगर, एक्सीडेंट या ऑपरेशन से संबंधित मरीज का स्वैब लेकर ट्रूनैट मशीन से कोरोना जांच की जाएगी। पहली बार में रिपोर्ट निगेटिव आई तो मरीज का तुरंत इलाज शुरू हो जाएगा। किसी मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो दूसरी बार फिर सैंपल लेकर जांच की जाएगी।
दोबारा फिर पॉजिटिव आने पर उस मरीज को संक्रमित मानते हुए आरटीपीसीआर जांच के लिए कोविड-19 हॉस्पिटल रेफर किया जाएगा। सीएमएस ने बताया कि आरटीपीसीआर की रिपोर्ट आने के बाद ही मरीज के पॉजिटिव या निगेटिव की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
तीन दिनों में एक भी सैंपल की नहीं हुई जांच
बांदा। जिला अस्पताल के पैथालॉजी विभाग में स्थित टीबी जांच कक्ष में स्थापित ट्रूनैट मशीन फिलहाल शोपीस बनी है। लखनऊ से आए इंजीनियरों द्वारा इसे तीन दिन पूर्व इंस्टाल किया गया था, लेकिन अब तक एक भी सैंपल की जांच नहीं हुई।
इस बाबत सीएमएस डॉ. एसएन मिश्र का कहना है कि टीबी जांच कक्ष में मशीन लगने से मुश्किल हो रही है। शुक्रवार को मशीन को ट्रामा सेंटर के ऊपरी भवन में स्थित आइसोलेशन विभाग में लगाया जाएगा। तभी जांच शुरू होगी।