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प्रशासन को भाया ‘अपना तालाब’ अभियान
ब्यूरो/ अमर उजाला, बांदा
Updated Mon, 02 Mar 2015 11:52 PM IST
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‘अपना तालाब’ अभियान अब प्रशासन को भी पसंद आ गया है।
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किसानों द्वारा अपने खेतों में तालाब खोदकर बारिश के इकट्ठा पानी से खेत
सींचने के नतीजे अच्छे मिले हैं।
नतीजतन महोबा जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने शासन को बाकायदा लिखित सुझाव भेजा। इसमें कहा है कि बुंदेलखंड में चेकडैम पर खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपये के स्थान पर सार्वजनिक तालाब/जल संचय बांध को अनुमति दी जाए।
जल संकट से निपटने को लगातार काम करने वाले स्वयंसेवी पुष्पेंद्र कुमार ने कुछ अर्से पहले साथियों के सहयोग से ‘अपना तालाब अभियान समिति’ का गठन किया।
समिति ने बुंदेलखंड के सबसे ज्यादा जल संकट वाले जनपद महोबा में काम शुरू किया। किसानों को प्रेरित कर उन्हें अपने खेतों में तालाब खोदने को राजी किया। करीब दो साल से चल रहे इस अभियान में महोबा में लगभग 400 तालाब खोदे गए। इन तालाबों में बारिश का पानी इकट्ठा किया गया है।
तालाब खोदने वाले किसानों का कहना है कि यह बेहद सस्ता सिंचाई का साधन है। तालाब के कारण फसलों का उत्पादन 4 से 5 गुना तक बढ़ा है। साथ ही भूगर्भ जलस्तर में भी इजाफा हुआ है। कबरई ब्लाक के बरबई, चरखारी ब्लाक के कीरतपुरा, काकुन और सूपा समेत करीब 40 गांवों के किसानों ने अपने खेतों में तालाब खोदे हैं।
किसानों का कहना है कि मात्र एक कुएं की लागत से बनने वाले तालाबों में 12 से 15 हजार घन मीटर वर्षा का पानी एकत्र किया जा सकता है। इस पानी से 10 हेक्टेयर फसल दो बार सींची जा सकती है। दूसरा तर्क है कि सरकार द्वारा बनाए जाने वाले एक चेकडैम की औसत लागत 30 लाख रुपये है। इससे बमुश्किल 50 हेक्टेयर की सींच हो पाती है।
तमाम दलीलों और अनुरोधों पर महोबा के डीएम वीरेश्वर सिंह ने प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव कृषि को पत्र भेजकर कहा है कि किसानों द्वारा बनाए गए तालाबों के परिणाम उत्साहवर्धक हैं।
इन तालाबों से कम लागत में वर्षा जल संचयन कर अतिरिक्त सिंचाई, भूजल रिचार्ज और मत्स्य पालन और बागवानी बेहतर हो सकती है। डीएम ने उदाहरण दिया कि वर्ष 2013-14 में ‘अपना तालाब’ अभियान के अंतर्गत कृषि विभाग ने 54 लाख रुपये खर्च कर खेतों में 90 तालाब बनवाए।
इनमें लगभग 1.25 लाख घन मीटर पानी सिंचाई के लिए उपलब्ध है। इससे तकरीबन 40-50 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र की सिंचाई की जा सकेगी। डीएम ने सुझाव दिया कि वर्ष 2014-15 में कृषि विभाग को बुंदेलखंड पैकेज से 24 चेकडैम निर्माण के लिए 3.20 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
चेकडैम के स्थान पर खेत में तालाब/सार्वजनिक तालाब का निर्माण कराया जाए। इससे अधिक किसानों को लाभ होगा। महोबा के उप कृषि निदेशक आरपी चौधरी ने सीडीओ और डीएम को इस आशय का पत्र भेजा था। इसके बाद डीएम ने शासन को पत्र भेजा है।
अब किसानों की फायदेमंद ‘अपना तालाब’ योजना की गेंद सरकार के पाले में है। इस योजना को बजट मिला तो बुंदेलखंड के किसानों की तकदीर बदल जाएगी।
नतीजतन महोबा जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने शासन को बाकायदा लिखित सुझाव भेजा। इसमें कहा है कि बुंदेलखंड में चेकडैम पर खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपये के स्थान पर सार्वजनिक तालाब/जल संचय बांध को अनुमति दी जाए।
जल संकट से निपटने को लगातार काम करने वाले स्वयंसेवी पुष्पेंद्र कुमार ने कुछ अर्से पहले साथियों के सहयोग से ‘अपना तालाब अभियान समिति’ का गठन किया।
समिति ने बुंदेलखंड के सबसे ज्यादा जल संकट वाले जनपद महोबा में काम शुरू किया। किसानों को प्रेरित कर उन्हें अपने खेतों में तालाब खोदने को राजी किया। करीब दो साल से चल रहे इस अभियान में महोबा में लगभग 400 तालाब खोदे गए। इन तालाबों में बारिश का पानी इकट्ठा किया गया है।
तालाब खोदने वाले किसानों का कहना है कि यह बेहद सस्ता सिंचाई का साधन है। तालाब के कारण फसलों का उत्पादन 4 से 5 गुना तक बढ़ा है। साथ ही भूगर्भ जलस्तर में भी इजाफा हुआ है। कबरई ब्लाक के बरबई, चरखारी ब्लाक के कीरतपुरा, काकुन और सूपा समेत करीब 40 गांवों के किसानों ने अपने खेतों में तालाब खोदे हैं।
किसानों का कहना है कि मात्र एक कुएं की लागत से बनने वाले तालाबों में 12 से 15 हजार घन मीटर वर्षा का पानी एकत्र किया जा सकता है। इस पानी से 10 हेक्टेयर फसल दो बार सींची जा सकती है। दूसरा तर्क है कि सरकार द्वारा बनाए जाने वाले एक चेकडैम की औसत लागत 30 लाख रुपये है। इससे बमुश्किल 50 हेक्टेयर की सींच हो पाती है।
तमाम दलीलों और अनुरोधों पर महोबा के डीएम वीरेश्वर सिंह ने प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव कृषि को पत्र भेजकर कहा है कि किसानों द्वारा बनाए गए तालाबों के परिणाम उत्साहवर्धक हैं।
इन तालाबों से कम लागत में वर्षा जल संचयन कर अतिरिक्त सिंचाई, भूजल रिचार्ज और मत्स्य पालन और बागवानी बेहतर हो सकती है। डीएम ने उदाहरण दिया कि वर्ष 2013-14 में ‘अपना तालाब’ अभियान के अंतर्गत कृषि विभाग ने 54 लाख रुपये खर्च कर खेतों में 90 तालाब बनवाए।
इनमें लगभग 1.25 लाख घन मीटर पानी सिंचाई के लिए उपलब्ध है। इससे तकरीबन 40-50 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र की सिंचाई की जा सकेगी। डीएम ने सुझाव दिया कि वर्ष 2014-15 में कृषि विभाग को बुंदेलखंड पैकेज से 24 चेकडैम निर्माण के लिए 3.20 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
चेकडैम के स्थान पर खेत में तालाब/सार्वजनिक तालाब का निर्माण कराया जाए। इससे अधिक किसानों को लाभ होगा। महोबा के उप कृषि निदेशक आरपी चौधरी ने सीडीओ और डीएम को इस आशय का पत्र भेजा था। इसके बाद डीएम ने शासन को पत्र भेजा है।
अब किसानों की फायदेमंद ‘अपना तालाब’ योजना की गेंद सरकार के पाले में है। इस योजना को बजट मिला तो बुंदेलखंड के किसानों की तकदीर बदल जाएगी।