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लॉकडाउन में भी नहीं साफ हुआ केन नदी का पानी
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केन नदी में फेंका गया कचरा।
- फोटो : BANDA
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बांदा। लॉकडाउन से पर्यावरण के साथ देश-प्रदेश की तमाम नदियां साफ हो गईं, लेकिन शहर से गुजरी केन नदी पर कोई फर्क नहीं पड़ा। शहर के नालों का गंदा पानी सीधे नदी में जा रहा है। नतीजतन केन का पानी काला नजर आ रहा है। कूड़ा-करकट भी उतरा रहा है।
मध्य प्रदेश की ओर से आई केन नदी जिले के चिल्ला गांव स्थित यमुना में मिलती है। बांदा शहर सहित सैकड़ों गांवों के लिए केन नदी का बड़ा महत्व है। लॉकडाउन से जहां नदियों का पानी स्वच्छ हो गया है, वहीं केन नदी प्रदूषण मुक्त नहीं हो सकी। शहर में निम्नी नाला समेत कई बड़े नालों का गंदा पानी सीधे नदी में पहुंच रहा है।
प्रदूषण का आलम यह है कि रेल और सड़क पुल के पास केन नदी का पानी काला नजर आने लगा है। कचरा फेंकने की प्रवृत्ति पर भी लगाम नहीं लगी। लोग बेहिचक नदी में कूड़ा फेंक रहे हैं। प्रदूषण के चलते नदी का पानी सीधे पीने योग्य नहीं है। घाटों पर गंदगी है। केन पुल के नजदीक दो इंटेकवेल हैं।, जिनसे शहर को जलापूर्ति की जाती है।
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केन नदी का पानी स्वच्छ करने के लिए पूर्व डीएम हीरालाल ने केन आरती की शुरुआत की थी। इससे काफी हद तक नदी साफ-सुथरी हो गई थी, लेकिन उनके स्थानांतरण और लॉकडाउन से आरती बंद हो गई और फिर नदी का पानी प्रदूषित हो गया। जल संस्थान अधिशासी अभियंता वीके श्रीवास्तव का कहना है कि नदी में कचरा न फेंकने संबंधित चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। फिर भी लोग चोरी-छिपे कचरा फेंक रहे हैं। पकड़े जाने पर जुर्माना आदि की कार्रवाई की जाएगी।
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मध्य प्रदेश की ओर से आई केन नदी जिले के चिल्ला गांव स्थित यमुना में मिलती है। बांदा शहर सहित सैकड़ों गांवों के लिए केन नदी का बड़ा महत्व है। लॉकडाउन से जहां नदियों का पानी स्वच्छ हो गया है, वहीं केन नदी प्रदूषण मुक्त नहीं हो सकी। शहर में निम्नी नाला समेत कई बड़े नालों का गंदा पानी सीधे नदी में पहुंच रहा है।
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प्रदूषण का आलम यह है कि रेल और सड़क पुल के पास केन नदी का पानी काला नजर आने लगा है। कचरा फेंकने की प्रवृत्ति पर भी लगाम नहीं लगी। लोग बेहिचक नदी में कूड़ा फेंक रहे हैं। प्रदूषण के चलते नदी का पानी सीधे पीने योग्य नहीं है। घाटों पर गंदगी है। केन पुल के नजदीक दो इंटेकवेल हैं।, जिनसे शहर को जलापूर्ति की जाती है।
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केन नदी का पानी स्वच्छ करने के लिए पूर्व डीएम हीरालाल ने केन आरती की शुरुआत की थी। इससे काफी हद तक नदी साफ-सुथरी हो गई थी, लेकिन उनके स्थानांतरण और लॉकडाउन से आरती बंद हो गई और फिर नदी का पानी प्रदूषित हो गया। जल संस्थान अधिशासी अभियंता वीके श्रीवास्तव का कहना है कि नदी में कचरा न फेंकने संबंधित चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। फिर भी लोग चोरी-छिपे कचरा फेंक रहे हैं। पकड़े जाने पर जुर्माना आदि की कार्रवाई की जाएगी।