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नहर टूटी, 200 बीघा फसल डूबी
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हर से खेत में हुए जलभराव में डूबकर बर्बाद हुई धान की कटी फसल।
- फोटो : BANDA
अतर्रा। बारिश के बावजूद नहर में छोड़े गए पानी ने दर्जनों किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। रात में टूटी नहर के पानी ने लगभग 200 बीघा फसल चौपट कर दी। इससे किसानों में हाहाकार है। उधर, सिंचाई विभाग की दलील है कि किसानों की मांग पर ही नहर चालू की गई थी, लेकिन चंद घंटे बाद ही बंद कर दी गई है।
दो दिन हुई बारिश से खेतों को पर्याप्त पानी मिल गया था। इसके बाद भी केन केनाल प्रखंड ने मंगलवार को बरियारपुर वीयर/बांध से केन नहर में पानी छोड़ दिया। नहर का यह पानी बुधवार को नरैनी और अतर्रा तहसीलों में पहुंचा।
जर्जर नहर और कई जगहों से टूटी पटरी से उफनाए पानी ने गिरवां क्षेत्र के अंगद पुरवा, दरबारी पुरवा, अतर्रा क्षेत्र के फौजदार का पुरवा, गोखिया, तिंदुही, रहूसत, नगनेधी आदि के किसानों के खेतों को रातोंरात पानी से लबालब कर दिया। गेहूं, चना, अरहर आदि की फसलें बर्बाद हो गईं। कई खेतों में धान की कटी फसल भी पानी में डूबकर चौपट हो गई।
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गुरुवार को सुबह किसान खेत पहुंचे तो कोहराम मच गया। आनन-फानन फावड़े लेकर पानी निकालने की कवायदें शुरू कीं। कटी पड़ी धान की फसल को बचाने की कोशिश की। किसान राजाभइया राजपूत, जगप्रसाद, दयाराम, विनोद, हरप्रसाद, ईश्वरी प्रसाद, बारेलाल, रमेश, राजाभइया यादव, अंगद, ब्रह्मदत्त शुक्ला, राजनारायण गर्ग, हेमंत तिवारी आदि प्रभावित किसानों के सिंचाई विभाग के प्रति रोष है।
इन किसानों का कहना है कि जब पानी की जरूरत थी तब दिया नहीं। अब बारिश के बीच पानी छोड़ा, वह भी बिना बताए। किसानों ने दोषियों पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग की। किसानों ने आरोप लगाया कि जेसीबी से हाल ही में नहर की सफाई की औपचारिकता की गई है। असलियत और तथ्य छिपाने के लिए जानबूझकर नहर में पानी छोड़ा गया है।
किसानों की मांग पर ही चलाई थी नहर
केन केनाल प्रखंड के अधिशासी अभियंता अरविंद पांडेय का कहना है कि नहर चलाने की मांग क्षेत्रीय किसानों ने ही की थी। पारा और ओरन आदि क्षेत्रों के किसानों ने पानी की जरूरत बताई थी। इसीलिए 7 जनवरी को नहर चालू की गई। अधिशासी अभियंता ने कहा कि बारिश हो जाने से चंद घंटे बाद नहर बंद कर दी गई। खेतों में नहर के पानी से हुए जलभराव और बर्बादी से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि किसी किसान ने जानकारी नहीं दी है। वे सहायक अभियंता और अवर अभियंता को मौके पर भेजकर पूरी स्थिति का पता लगवा रहे हैं।
22 अवर अभियंताओं का काम दो के हवाले
केन केनाल डिवीजन के अतर्रा क्षेत्रीय अभियंता गरुण देव विश्वकर्मा ने नहरों से खेत जलमग्न होने पर अपने ऊपर काम के बोझ का रोना रोया। कहा कि विभाग में 22 अवर अभियंता के पद हैं, लेकिन सिर्फ दो ही कार्यरत हैं। उन पर ही पूरे जिले की जिम्मेदारी है। कहा कि एक अवर अभियंता का कार्य क्षेत्र 80 किलोमीटर का दायरा होता है, लेकिन मौजूदा में उन्हें 580 किलोमीटर क्षेत्रफल का काम देखना पड़ रहा है। कहा कि रनगवां बांध से छोड़ा गया पानी बरियारपुर वीयर आ गया था। उसी से नहर चलाई गई है। अब बंद करा दिया गया है।
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दो दिन हुई बारिश से खेतों को पर्याप्त पानी मिल गया था। इसके बाद भी केन केनाल प्रखंड ने मंगलवार को बरियारपुर वीयर/बांध से केन नहर में पानी छोड़ दिया। नहर का यह पानी बुधवार को नरैनी और अतर्रा तहसीलों में पहुंचा।
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जर्जर नहर और कई जगहों से टूटी पटरी से उफनाए पानी ने गिरवां क्षेत्र के अंगद पुरवा, दरबारी पुरवा, अतर्रा क्षेत्र के फौजदार का पुरवा, गोखिया, तिंदुही, रहूसत, नगनेधी आदि के किसानों के खेतों को रातोंरात पानी से लबालब कर दिया। गेहूं, चना, अरहर आदि की फसलें बर्बाद हो गईं। कई खेतों में धान की कटी फसल भी पानी में डूबकर चौपट हो गई।
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गुरुवार को सुबह किसान खेत पहुंचे तो कोहराम मच गया। आनन-फानन फावड़े लेकर पानी निकालने की कवायदें शुरू कीं। कटी पड़ी धान की फसल को बचाने की कोशिश की। किसान राजाभइया राजपूत, जगप्रसाद, दयाराम, विनोद, हरप्रसाद, ईश्वरी प्रसाद, बारेलाल, रमेश, राजाभइया यादव, अंगद, ब्रह्मदत्त शुक्ला, राजनारायण गर्ग, हेमंत तिवारी आदि प्रभावित किसानों के सिंचाई विभाग के प्रति रोष है।
इन किसानों का कहना है कि जब पानी की जरूरत थी तब दिया नहीं। अब बारिश के बीच पानी छोड़ा, वह भी बिना बताए। किसानों ने दोषियों पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग की। किसानों ने आरोप लगाया कि जेसीबी से हाल ही में नहर की सफाई की औपचारिकता की गई है। असलियत और तथ्य छिपाने के लिए जानबूझकर नहर में पानी छोड़ा गया है।
किसानों की मांग पर ही चलाई थी नहर
केन केनाल प्रखंड के अधिशासी अभियंता अरविंद पांडेय का कहना है कि नहर चलाने की मांग क्षेत्रीय किसानों ने ही की थी। पारा और ओरन आदि क्षेत्रों के किसानों ने पानी की जरूरत बताई थी। इसीलिए 7 जनवरी को नहर चालू की गई। अधिशासी अभियंता ने कहा कि बारिश हो जाने से चंद घंटे बाद नहर बंद कर दी गई। खेतों में नहर के पानी से हुए जलभराव और बर्बादी से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि किसी किसान ने जानकारी नहीं दी है। वे सहायक अभियंता और अवर अभियंता को मौके पर भेजकर पूरी स्थिति का पता लगवा रहे हैं।
22 अवर अभियंताओं का काम दो के हवाले
केन केनाल डिवीजन के अतर्रा क्षेत्रीय अभियंता गरुण देव विश्वकर्मा ने नहरों से खेत जलमग्न होने पर अपने ऊपर काम के बोझ का रोना रोया। कहा कि विभाग में 22 अवर अभियंता के पद हैं, लेकिन सिर्फ दो ही कार्यरत हैं। उन पर ही पूरे जिले की जिम्मेदारी है। कहा कि एक अवर अभियंता का कार्य क्षेत्र 80 किलोमीटर का दायरा होता है, लेकिन मौजूदा में उन्हें 580 किलोमीटर क्षेत्रफल का काम देखना पड़ रहा है। कहा कि रनगवां बांध से छोड़ा गया पानी बरियारपुर वीयर आ गया था। उसी से नहर चलाई गई है। अब बंद करा दिया गया है।

नहर के पानी से डूबी गेहूं की फसल।- फोटो : BANDA