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बारिश आ गई, खेतों में नहीं खुद पाए तालाब
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 17 Jun 2016 11:24 PM IST
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बांदा जिले के निवादा गांव में खेत तालाब योजना में खोदा गया तालाब
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। सूखे बुंदेलखंड में जोरशोर से लागू की गई खेत-तालाब योजना का भी वही हश्र हो रहा है, जो अन्य योजनाओं का होता रहा है। मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट होने के बाद भी इसमें लापरवाही बरती जा रही है। यही कारण है कि यह किसानों के लिए फायदेमंद साबित होती नहीं नजर आ रही। इसकी बानगी के लिए यही काफी है कि मानसून का मौसम शुरू हो चुका है, लेकिन खेतों में सिर्फ 34 फीसदी तालाब खुद पाए हैं। बारिश से पहले तालाब तैयार न हुए तो पानी कहां संचित किया जाएगा।
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खेत-तालाब योजना में मुख्यमंत्री खुद भी दिलचस्पी ले रहे हैं। इस योजना का जायजा लेने के लिए हाल ही में वे लिए महोबा जिले के चरखारी आए थे। उधर, चित्रकूटधाम मंडल में वर्ष 2016-17 के लिए कुल 1230 तालाब खोदवाने का लक्ष्य रखा गया है। तालाबों को बारिश के पहले तैयार करना था, ताकि बारिश शुरू होते ही इनमें पानी का भंडारण होने लगे, लेकिन सरकार की यह मंशा धरी रह गई है। मानसूनी मौसम (15 जून से) शुरू हो चुका है। बारिश ने भी दस्तक दी है। इसी हफ्ते मानसून पूरी तरह सक्रिय होने का अनुमान है, लेकिन मंडल के चारों जिलों में कहीं भी लक्ष्य के मुताबिक तालाब नहीं खुद पाए।
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चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा में इस वर्ष 1230 तालाब खोदने का लक्ष्य है। लेकिन सरकारी आंकड़ों में अभी तक सिर्फ 423 तालाब पूरे हुए हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि 153 तालाबों में काम चल रहा है। बरसात तक खोदाई पूरी होने का दावा किया है। यदि बारिश शुरू हो गई तो तालाबों की खोदाई नहीं हो पाएगी। इसके साफ आसार हैं कि निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक तालाब नहीं खुद पाएंगे। इन तालाबों के लिए शासन ने पूरे मंडल को दो करोड़ 42 लाख 23 हजार रुपये आवंटित कर दिए हैं। तालाबों में अब तक 73,76,270 रुपये खर्च होना बताया गया है।
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चित्रकूटधाम मंडल में पूरे और अधूरे तालाब और आवंटित धन
जनपद लक्ष्य खोदे गए अधूरे आवंटित धन
बांदा 230 107 38 48,00,000
चित्रकूट 250 73 44 51,00,000
हमीरपुर 250 94 41 51,00,000
महोबा 750 243 71 92,23,000
योग 1230 423 153 2,42,23,000
भूमि संरक्षण विभाग को जिम्मा
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में खेतों में तालाब खोदने का काम भूमि संरक्षण विभाग को ज्यादा मिला है। इस विभाग के यूनिट मैदानी प्रथम व द्वितीय, राष्ट्रीय जलागम और हमीरपुर में ईसी को तालाब खोदाई का काम दिया गया है। चारों जिलों में कहीं भी अभी तक 50 फीसदी तालाब भी नहीं खुद पाए, जबकि प्री मानसून की बारिश शुरू हो गई है। किसी भी दिन से झमाझम बारिश शुरू हो सकती है।
बड़े तालाबों की होड़ में पिछड़े छोटे तालाब
अचानक बड़े तालाबों का काम शुरू हो जाने से किसानों के खेतों में छोटे तालाबों का काम पिछड़ गया है। तालाब खोदाई में जेसीबी मशीन इस्तेमाल की जा रही है। जेसीबी वाले काम और किराया ज्यादा मिलने के चक्कर में छोटे तालाबों को दरकिनार कर बड़े तालाबों की खोदाई में लग गए हैं। कुछ अधिकारी भी इस मामले में संवेदनशील नहीं है, जबकि यह मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट नहीं है।
-पुष्पेंद्र भाई, संयोजक अपना तालाब बनाओ, चित्रकूटधाम मंडल।