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Banda News: बुंदेलखंड के पर्यावरण योद्धाओं ने बक्सवाहा सम्मान ठुकराया
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बांदा। बुंदेलखंड के महत्वपूर्ण हरियाली क्षेत्र बकस्वाहा जंगल को एमपी सरकार द्वारा उजाड़ने की कोशिश के विरोध में लंबे अरसे तक चले आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले बुंदेलखंड के दो पर्यावरण प्रहरी अमित भटनागर और आशीष सागर दीक्षित ने इस आंदोलन से जुड़े लोगों को दिए जा रहे ‘पर्यावरण योद्धा’ सम्मान लेने से इनकार कर दिया है। रविवार को भोपाल में आयोजित समारोह का बहिष्कार भी किया।
बुंदेलखंड के बकस्वाहा (छतरपुर, एमपी ) में 382 हेक्टेयर क्षेत्रफल के घने जंगल को एमपी सरकार ने हीरा खदान के लिए एक बड़ी कंपनी को पट्टे पर दे दिया है। जंगल के दो लाख 15 हजार से ज्यादा हरे भरे पेड़ कटने की नौबत आ गई थी। यूपी-एमपी के बुंदेलखंड के कई पर्यावरण संगठनों तथा स्वयं सेवियों ने इसके विरोध में लंबे अरसे तक आंदोलन चलाया। इसपर एनजीटी और हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया और रोक लगा दी।
आंदोलन से जुड़े कुछ संगठनों ने रविवार (20 अक्तूबर ) को भोपाल में '''' राष्ट्रीय पर्यावरण संसद एवं बक्सवाहा सम्मान समारोह'''' आयोजित किया। इसमें बांदा के पर्यावरण प्रहरी आशीष सागर दीक्षित और बिजावर (छतरपुर) के अमित भटनागर को भी ‘पर्यावरण योद्धा’ सम्मान दिया जाना था, लेकिन इन दोनों पर्यावरण पैरोकारों ने यह सम्मान लेने से इनकार करते हुए समारोह का बहिष्कार कर दिया।
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आशीष सागर का कहना है कि बकस्वाहा आंदोलन में महती भूमिका निभाने वाले हाईकोर्ट अधिवक्ता पीजी नाज पांडेय को शामिल नहीं किया गया। जिनका आंदोलन में कोई सहयोग नहीं रहा कई ऐसे लोगों को को शामिल किया गया। कहा कि रेवड़ी की तरह सम्मान बांटे गए।
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बुंदेलखंड के बकस्वाहा (छतरपुर, एमपी ) में 382 हेक्टेयर क्षेत्रफल के घने जंगल को एमपी सरकार ने हीरा खदान के लिए एक बड़ी कंपनी को पट्टे पर दे दिया है। जंगल के दो लाख 15 हजार से ज्यादा हरे भरे पेड़ कटने की नौबत आ गई थी। यूपी-एमपी के बुंदेलखंड के कई पर्यावरण संगठनों तथा स्वयं सेवियों ने इसके विरोध में लंबे अरसे तक आंदोलन चलाया। इसपर एनजीटी और हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया और रोक लगा दी।
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आंदोलन से जुड़े कुछ संगठनों ने रविवार (20 अक्तूबर ) को भोपाल में '''' राष्ट्रीय पर्यावरण संसद एवं बक्सवाहा सम्मान समारोह'''' आयोजित किया। इसमें बांदा के पर्यावरण प्रहरी आशीष सागर दीक्षित और बिजावर (छतरपुर) के अमित भटनागर को भी ‘पर्यावरण योद्धा’ सम्मान दिया जाना था, लेकिन इन दोनों पर्यावरण पैरोकारों ने यह सम्मान लेने से इनकार करते हुए समारोह का बहिष्कार कर दिया।
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आशीष सागर का कहना है कि बकस्वाहा आंदोलन में महती भूमिका निभाने वाले हाईकोर्ट अधिवक्ता पीजी नाज पांडेय को शामिल नहीं किया गया। जिनका आंदोलन में कोई सहयोग नहीं रहा कई ऐसे लोगों को को शामिल किया गया। कहा कि रेवड़ी की तरह सम्मान बांटे गए।