{"_id":"62aa205ff62fc84d6134f701","slug":"bundelkhand-will-get-relief-from-drought-banda-news-knp7025502102","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुंदेलखंड को मिलेगी सूखे से राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुंदेलखंड को मिलेगी सूखे से राहत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। केन-बेतवा लिंक परियोजना की कार्य योजना लगभग तैयार हो गई है। इस परियोजना का निर्माण कार्य आठ साल में पूरा होगा। केन का पानी बेतवा नदी में लाने के लिए करीब 220 किलोमीटर लंबी केन-बेतना लिंक नहर बनेगी। इस प्रोजेक्ट से सूखे से जूझ रहे बांदा, महोबा, ललितपुर और झांसी के साथ ही एमपी के छतरपुर, पन्ना, शिवपुरी, दामोह, दतिया जिले के 63 लाख लोगों को फायदा होगा।
परियोजना की पूरी डिजाइन व ड्राइंग के लिए 730 दिन और टेंडर प्रक्रिया के लिए 640 दिन का समय तय किया गया है। प्रीकंस्ट्रक्शन और इनवेस्ट सर्वे के लिए 243 दिन का समय दिया गया है। 730 दिन में जमीन अधिग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, मार्ग के लिए 487 दिन, प्रोजेक्ट रोड के लिए 488 दिन, ऑफिस व कर्मचारी निवास के लिए 518 दिन और बिजली उपलब्ध कराने के लिए 549 दिन का लक्ष्य रखा गया है।
कॉम्पलेक्स बनाने में लगेंगे 912 दिन
टेंडर की प्रक्रिया के बाद नहर की खुदाई के लिए 182 दिन का समय तय किया गया है। कंक्रीट व कॉफर डैम निर्माण के लिए भी 182 दिन का समय लगेगा। बांध के फाउंडेशन कार्य में ही पांच साल का समय लगेगा। अंत में पावर हाउस कॉॅॅम्पलेक्स का निर्माण होगा, जिसमें 912 दिन का समय लगेगा। इस तरह से परियोजना के संपूर्ण निर्माण कार्य में करीब आठ साल का समय लग जाएगा।
विज्ञापन
वन्यजीवों को प्रतिस्थापित करने का काम शुरू
बाघों को बचाने के लिए उत्तर प्रदेश के रानीपुर अभयारण्य, नौरादेही अभयारण्य व दुर्गावती अभयारण्य, के बीच कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। प्रोजेक्ट से जुड़े अभियंता एसके सिंह का कहना है कि वन्यजीवों की प्रतिस्थापित करने पर काम शुरू कर दिया गया है।
21 गांवों के लोग होंगे विस्थापित
करीब 542 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले पन्ना टाइगर रिजर्व का करीब 50 फीसदी हिस्सा पानी में डूब जाएगा। इसके लिए पार्क से सटे 21 गांवों के लोगों को विस्थापित किया जाएगा।
विज्ञापन
परियोजना की पूरी डिजाइन व ड्राइंग के लिए 730 दिन और टेंडर प्रक्रिया के लिए 640 दिन का समय तय किया गया है। प्रीकंस्ट्रक्शन और इनवेस्ट सर्वे के लिए 243 दिन का समय दिया गया है। 730 दिन में जमीन अधिग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, मार्ग के लिए 487 दिन, प्रोजेक्ट रोड के लिए 488 दिन, ऑफिस व कर्मचारी निवास के लिए 518 दिन और बिजली उपलब्ध कराने के लिए 549 दिन का लक्ष्य रखा गया है।
विज्ञापन
कॉम्पलेक्स बनाने में लगेंगे 912 दिन
टेंडर की प्रक्रिया के बाद नहर की खुदाई के लिए 182 दिन का समय तय किया गया है। कंक्रीट व कॉफर डैम निर्माण के लिए भी 182 दिन का समय लगेगा। बांध के फाउंडेशन कार्य में ही पांच साल का समय लगेगा। अंत में पावर हाउस कॉॅॅम्पलेक्स का निर्माण होगा, जिसमें 912 दिन का समय लगेगा। इस तरह से परियोजना के संपूर्ण निर्माण कार्य में करीब आठ साल का समय लग जाएगा।
विज्ञापन
वन्यजीवों को प्रतिस्थापित करने का काम शुरू
बाघों को बचाने के लिए उत्तर प्रदेश के रानीपुर अभयारण्य, नौरादेही अभयारण्य व दुर्गावती अभयारण्य, के बीच कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। प्रोजेक्ट से जुड़े अभियंता एसके सिंह का कहना है कि वन्यजीवों की प्रतिस्थापित करने पर काम शुरू कर दिया गया है।
21 गांवों के लोग होंगे विस्थापित
करीब 542 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले पन्ना टाइगर रिजर्व का करीब 50 फीसदी हिस्सा पानी में डूब जाएगा। इसके लिए पार्क से सटे 21 गांवों के लोगों को विस्थापित किया जाएगा।