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शहरों और मोहल्लों में शोर से नहीं बनेगा बुंदेलखंड राज्य
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सर्किट हाउस में मीडिया से वार्ता करते बुंदेलखंड विकास परिषद उपाध्यक्ष व फिल्म अभिनेता राजा बुंद
- फोटो : BANDA
बांदा। बुंदेलखंड विकास बोर्ड उपाध्यक्ष और भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य राजा बुंदेला ने कहा कि शहरों और मोहल्लों में बुंदेलखंड राज्य बनाओ का शोर मचाने से राज्य नहीं बनेगा। इस आंदोलन में जुड़े 18 से 20 संगठन दिल्ली में जंतर-मंतर जाकर एक साथ बैठें। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को ज्ञापन दें। कहा कि यहां होने वाले आंदोलनों की एलआईयू रिपोर्ट तक दिल्ली और लखनऊ नहीं पहुंचती।
नवाब टैंक स्थित डाक बंगले में बृहस्पतिवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि बुंदेलखंड की जनता, नेता और कारोबारी, यही समझ बैठे हैं कि जो चल रहा है वही सही है। कहा कि उनका लक्ष्य बुंदेलखंड राज्य है। राजधानी, मुख्यमंत्री और कौन सी पार्टी चलाएगी यह सारी बातें बाद की हैं। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हैं कि बड़े राज्य नहीं चल पा रहे। एक पार्टी जिसकी सरकार में तीन राज्य बने हैं, उसके साथ सामंजस्य बनाकर वह बात मनवाने की कोशिश कर रहे हैं। कहा कि घर-परिवार जब बड़ा हो जाता है तो मुखिया सुविधा के अनुसार बंटवारा कर देता है।
बुंदेला ने बुंदेलखंड राज्य आंदोलन में बुद्धिजीवियों के आगे आने का आह्वान किया। यह भी कहा कि इस आंदोलन के लिए वह अपना घर जलाकर देख चुके हैं। मुंबई में उनका मकान और दुकान बिक गया। आंदोलन के अगुवा शंकरलाल मल्होत्रा को भी इस आंदोलन में काफी कुछ कुर्बानी देनी पड़ी। इस मौके पर भारतीय जनता युवा मोर्चा नेता पंकज चौधरी और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शोध छात्र रामबाबू तिवारी भी मौजूद थे।
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नवाब टैंक स्थित डाक बंगले में बृहस्पतिवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि बुंदेलखंड की जनता, नेता और कारोबारी, यही समझ बैठे हैं कि जो चल रहा है वही सही है। कहा कि उनका लक्ष्य बुंदेलखंड राज्य है। राजधानी, मुख्यमंत्री और कौन सी पार्टी चलाएगी यह सारी बातें बाद की हैं। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हैं कि बड़े राज्य नहीं चल पा रहे। एक पार्टी जिसकी सरकार में तीन राज्य बने हैं, उसके साथ सामंजस्य बनाकर वह बात मनवाने की कोशिश कर रहे हैं। कहा कि घर-परिवार जब बड़ा हो जाता है तो मुखिया सुविधा के अनुसार बंटवारा कर देता है।
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बुंदेला ने बुंदेलखंड राज्य आंदोलन में बुद्धिजीवियों के आगे आने का आह्वान किया। यह भी कहा कि इस आंदोलन के लिए वह अपना घर जलाकर देख चुके हैं। मुंबई में उनका मकान और दुकान बिक गया। आंदोलन के अगुवा शंकरलाल मल्होत्रा को भी इस आंदोलन में काफी कुछ कुर्बानी देनी पड़ी। इस मौके पर भारतीय जनता युवा मोर्चा नेता पंकज चौधरी और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शोध छात्र रामबाबू तिवारी भी मौजूद थे।
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