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बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे : जमीन खरीद में रोड़ा बने मंदिर और मदरसे

Thu, 29 Aug 2019 11:51 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 29 Aug 2019 11:51 PM IST
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Bundelkhand Express-Way: Temples and Madarsas impede land purchase
बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे की प्रतीकात्मक फोटो। - फोटो : BANDA
बांदा। मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी परियोजना बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे की भूमि खरीद में मदरसे और मंदिरों की जमीनें रोड़ा बन गई हैं। वारिसों की सही पहचान और प्रमाण न मिलने से बैनामे नहीं हो पा रहे हैं। उधर, चित्रकूटधाम मंडल में दो दर्जन से अधिक ऐसे भी किसान हैं, जिनकी जमीनें एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहीत तो कर ली गईं, लेकिन भू-स्वामी का अता-पता नहीं है।
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अक्तूबर में बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे निर्माण की मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद से अधिग्रहित जमीनों के बैनामों में रफ्तार आ गई। चित्रकूटधाम मंडल में भूमि खरीद मामले में तीन दर्जन से अधिक मदरसा और मंदिरों तथा गायब किसानों की जमीनें रोड़ा अटका रही हैं। बैनामे नहीं हो पा रहे। सदर तहसील के चहितारा गांव स्थित प्राचीन रामजानकी मंदिर की 1.804 हेक्टेअर भूमि एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहीत की गई है, लेकिन संरक्षक राम रामंद दास के निधन के बाद वारिस की सही पहचान नहीं हो पाने से बैनामा प्रक्रिया अटकी है। इसी तरह मदरसा इस्लामिया हथौरा में वारिस का मामला कोर्ट में चल रहा है।
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उधर, जमालपुर गांव के बिजइया पत्नी रामआसरे की गांव में स्थित .055 हेक्टेअर, चहितारा के शिवबदन पुत्र भग्गू की .032 और जगदेव पुत्र गौरीशंकर की .012 हेक्टेअर, बरगहनी के किसान भागवत पुत्र रामदास की जारी गांव स्थित .0750 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की गई है, लेकिन मालिकाना हक के संबंध में सही पहचान नहीं हो पा रही। राजस्व विभाग का कहना है कि अर्से से जमीन मालिक गांव में नजर नहीं आए हैं। रिश्तेदारों में भी पता किया गया, लेकिन जानकारी नहीं हुई।
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कृषि विश्वविद्यालय जमीन की नहीं मिली अनुमति
बांदा। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे में मंडल मुख्यालय में स्थित बांदा कृषि विश्वविद्यालय की 2.112 हेक्टेअर जमीन अधिग्रहीत की गई है। शासन से इस जमीन के बैनामे के लिए अनुमति न मिलने से इसके खरीद-फरोख्त का मामला अटका है। सदर तहसीलदार अवधेश निगम ने बताया कि इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन व जिलाधिकारी स्तर से शासन को पत्र लिखा गया है। अनुमति मिलने के बाद ही जमीन का बैनामा कराया जाएगा।

क्या कहते हैं अधिकारी
मंदिर व मदरसा की जमीनों के मामले में असली वारिस की पहचान कराई जा रही है। पहचान संभव न होने पर कोर्ट द्वारा जारी आदेश के बाद ही बैनामा की कार्रवाई की जाएगी। गुमशुदा किसानों की भी तलाश कराई जा रही है। -संतोष बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकारी, बांदा।
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