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बृजेश के स्वर हमेशा रहे बगावती
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विधायक बृजेश प्रजापति।
- फोटो : BANDA
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बांदा। तिंदवारी से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए बृजेश अपनी तल्ख बयानी और हावभाव से शुरू से ही सुर्खियों में रहे। भाजपा नेताओं से उनकी बहुत अच्छी नहीं पटी। अक्तूबर 2014 में बृजेश ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए थे। आरोप लगाया था कि इस सरकार में भ्रष्ट अफसरों का सिंडीकेट हावी है। ब्यूरोक्रेसी सरकार पर हावी होती है तो लोकतंत्र खतरे में होता है।
बृजेश विधायक रहते हुए कई खनन माफिया और बांदा में ठेका हथियाने वाली बड़ी कंपनियों के भी विरोधी रहे। अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर देर रात खुद चेकिंग करने पहुंच गए। नौबत ये आ गई कि तत्कालीन खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने विधायक और उनके खास लोगों पर मारपीट की एफआईआर करा दी। इसके बाद विधायक का सुरक्षाकर्मी बदल दिया गया। इससे नाराज बृजेश ने अपनी सुरक्षा वापस कर दी।
उन्होंने यह भी कहा था कि ई-रिक्शा और बैलगाड़ियों पर अवैध खनन की बड़ी कार्रवाई दिखाई जा रही है, जबकि माफिया और अफसरों का सिंडीकेट अवैध खनन करा रहा है, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। विधायक ने खनिज अधिकारी पर रिश्तेदारों को खदानों में पट्टे और खनिज विभाग में नौकरी दिलाने के आरोप लगाए थे। अगस्त 2020 में लखनऊ में उन पर हुए हमले की घटना में भी वह सुर्खियों में रहे।
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शुरू से ही ‘स्वामी’ के समर्थक रहे हैं बृजेश
बांदा। स्वामी प्रसाद मौर्य के मंत्रिमंडल व भाजपा से इस्तीफा देने के बाद से बांदा में भी राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मौर्य के समर्थक और तिंदवारी क्षेत्र से भाजपा विधायक बृजेश कुमार प्रजापति ने भी उनके समर्थन में भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। माना जा रहा है कि दोनों ही सपा का परचम थामेंगे।
निवर्तमान विधायक बृजेश शुरू से ही स्वामी प्रसाद के समर्थक माने जाते रहे हैं।
यह चर्चा थी कि तिंदवारी क्षेत्र से बीजेपी का टिकट भी उन्हें मौर्य की हिस्सेदारी वाली सीटों में ही मिला था। अब यह बात और साफ हो गई है। मंगलवार को मौर्य की ओर से इस्तीफा देने के फौरन बाद बृजेश ने भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को अपने लेटर पैड पर त्यागपत्र भेज दिया। इस इस्तीफे की भाषा भी काफी हद तक स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे वाले पत्र से मिलती-जुलती है।
इस्तीफे में उन्होंने कहा है कि पांच वर्षों के दौरान दलित, पिछड़ों, अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं व जनप्रतिनिधियों को भाजपा सरकार ने कोई तवज्जो नहीं दी। न ही उन्हें उचित सम्मान दिया गया। इसके अलावा बृजेश ने बेरोजगार नौजवानों और छोटे व मध्यम व्यापारियों की घोर उपेक्षा का भी आरोप लगाया। कहा कि प्रदेश सरकार के इस कूटनीति परक रवैये से ही वह भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य शोषित पीड़ितों की आवाज हैं। उनके नेता हैं। वे उन्हीं के साथ हैं। इस्तीफे की प्रति भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी भेजी है।
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बृजेश विधायक रहते हुए कई खनन माफिया और बांदा में ठेका हथियाने वाली बड़ी कंपनियों के भी विरोधी रहे। अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर देर रात खुद चेकिंग करने पहुंच गए। नौबत ये आ गई कि तत्कालीन खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने विधायक और उनके खास लोगों पर मारपीट की एफआईआर करा दी। इसके बाद विधायक का सुरक्षाकर्मी बदल दिया गया। इससे नाराज बृजेश ने अपनी सुरक्षा वापस कर दी।
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उन्होंने यह भी कहा था कि ई-रिक्शा और बैलगाड़ियों पर अवैध खनन की बड़ी कार्रवाई दिखाई जा रही है, जबकि माफिया और अफसरों का सिंडीकेट अवैध खनन करा रहा है, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। विधायक ने खनिज अधिकारी पर रिश्तेदारों को खदानों में पट्टे और खनिज विभाग में नौकरी दिलाने के आरोप लगाए थे। अगस्त 2020 में लखनऊ में उन पर हुए हमले की घटना में भी वह सुर्खियों में रहे।
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शुरू से ही ‘स्वामी’ के समर्थक रहे हैं बृजेश
बांदा। स्वामी प्रसाद मौर्य के मंत्रिमंडल व भाजपा से इस्तीफा देने के बाद से बांदा में भी राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मौर्य के समर्थक और तिंदवारी क्षेत्र से भाजपा विधायक बृजेश कुमार प्रजापति ने भी उनके समर्थन में भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। माना जा रहा है कि दोनों ही सपा का परचम थामेंगे।
निवर्तमान विधायक बृजेश शुरू से ही स्वामी प्रसाद के समर्थक माने जाते रहे हैं।
यह चर्चा थी कि तिंदवारी क्षेत्र से बीजेपी का टिकट भी उन्हें मौर्य की हिस्सेदारी वाली सीटों में ही मिला था। अब यह बात और साफ हो गई है। मंगलवार को मौर्य की ओर से इस्तीफा देने के फौरन बाद बृजेश ने भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को अपने लेटर पैड पर त्यागपत्र भेज दिया। इस इस्तीफे की भाषा भी काफी हद तक स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे वाले पत्र से मिलती-जुलती है।
इस्तीफे में उन्होंने कहा है कि पांच वर्षों के दौरान दलित, पिछड़ों, अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं व जनप्रतिनिधियों को भाजपा सरकार ने कोई तवज्जो नहीं दी। न ही उन्हें उचित सम्मान दिया गया। इसके अलावा बृजेश ने बेरोजगार नौजवानों और छोटे व मध्यम व्यापारियों की घोर उपेक्षा का भी आरोप लगाया। कहा कि प्रदेश सरकार के इस कूटनीति परक रवैये से ही वह भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य शोषित पीड़ितों की आवाज हैं। उनके नेता हैं। वे उन्हीं के साथ हैं। इस्तीफे की प्रति भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी भेजी है।