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बालिकाओं के हाथों बने बप्पा बिराजेंगे
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एसीडी स्टूडियो में गणेश प्रतिमा की स्थापना करते भक्त।
- फोटो : BANDA
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बांदा। शनिवार से गणेश चतुर्थी का त्योहार शुरू हो रहा है। गणपति 10 दिन के लिए भक्तों के घरों में विराजमान होंगे। इस वर्ष कोलकाता से मूर्तिकार नहीं आए। भक्तों को गणेश प्रतिमाएं नहीं मिल सकीं, लेकिन एसीडी स्टूडियो की निर्देशक निशा गुप्ता के नेतृत्व में स्टूडियो की बालिकाओं ने अपने हाथों से मिट्टी की आकर्षक गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं।
शहर के गणेश भवन सहित भक्तों के घरों में ये प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं। निशा का कहना है कि अबकी दुश्मन (कोरोना) अदृश्य है, पर एक अदृश्य दिव्य शक्ति (गणेश) भी हैं।
हम मंदिर नहीं जा सकते, बड़े पंडाल नहीं लगा सकते पर बप्पा की लघु मूर्तियां तो अपने घर ला सकते हैं। बताया कि पांच साल से बप्पा की मूर्तियां स्टूडियो में रखती आ रही हैं।
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मूर्तियों की खास बात यह है कि यह शुद्ध मिट्टी की पूरी तरह इको फ्रेंडली हैं। जिन्हें हम चाहे तो घर पर भी विसर्जित कर सकते हैं। मूर्तियां विभिन्न स्वरूपों में हैं। निशा का कहना है कि बप्पा अनमोल हैं। हम कभी उनका मोल नहीं लगा सकते। मूर्ति बनाने में सूर्यांश, शशांक, अलका, मुस्कान, स्नेहा, कंचन आदि का भरपूर साथ मिला। शुक्रवार को कई स्थलों के लिए श्रद्धालुओं ने मूर्तियां ग्रहण कीं।
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शहर के गणेश भवन सहित भक्तों के घरों में ये प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं। निशा का कहना है कि अबकी दुश्मन (कोरोना) अदृश्य है, पर एक अदृश्य दिव्य शक्ति (गणेश) भी हैं।
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हम मंदिर नहीं जा सकते, बड़े पंडाल नहीं लगा सकते पर बप्पा की लघु मूर्तियां तो अपने घर ला सकते हैं। बताया कि पांच साल से बप्पा की मूर्तियां स्टूडियो में रखती आ रही हैं।
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मूर्तियों की खास बात यह है कि यह शुद्ध मिट्टी की पूरी तरह इको फ्रेंडली हैं। जिन्हें हम चाहे तो घर पर भी विसर्जित कर सकते हैं। मूर्तियां विभिन्न स्वरूपों में हैं। निशा का कहना है कि बप्पा अनमोल हैं। हम कभी उनका मोल नहीं लगा सकते। मूर्ति बनाने में सूर्यांश, शशांक, अलका, मुस्कान, स्नेहा, कंचन आदि का भरपूर साथ मिला। शुक्रवार को कई स्थलों के लिए श्रद्धालुओं ने मूर्तियां ग्रहण कीं।