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डेंगू के दो और मरीज मिले
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एलाइजा मशीन।
- फोटो : BANDA
बांदा। जिले में डेंगू के दो नए मरीज सामने आए हैं। इनमें एक का जिला अस्पताल और दूसरे का लखनऊ में इलाज चल रहा है। यह खुलासा स्वास्थ्य विभाग ने किया है। डेंगू मरीजों के इलाकों पर मलेरिया विभाग की दो टीमों द्वारा मच्छर/लार्वा निरोधात्मक कार्रवाई की गई है।
जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार ने बताया कि मंगलवार को शहर के खुटला निवासी रामस्वरूप के पुत्र हरीओम (5) में डेंगू की पुष्टि हुई। उसे जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। उधर, कोतवाली नगर के पास रहने वाले इब्राहीम के पुत्र अफजल (12) का लखनऊ के अस्पताल में इलाज चल रहा है। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई है।
दोनों मरीजों के घरों के आसपास फागिंग और दवा छिड़काव आदि निरोधात्मक कार्रवाई की गई है। उधर, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में डेंगू के लक्षण मिलने पर 30 वर्षीय युवक को भर्ती किया गया है। किट से जांच में पुष्टि होने पर उसका डेंगू का इलाज किया जा रहा है। मलेरिया अधिकारी के मुताबिक अब तक जिले में छह डेंगू के मामले मिल चुके हैं।
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बांदा। डेंगू टेस्ट के नाम पर मरीजों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल सहित जिले में कहीं भी एलाइजा (एंजाइम लिंक्ड इम्युनो सोरवेंट एस्से) जांच नहीं हो रही है। एनएस-1 किट से डेंगू की जांचकर इलाज किया जा रहा है, जबकि एलाइजा टेस्ट के बाद ही डेंगू की प्रमाणिक पुष्टि होती है।
इन दिनों अस्पतालों में बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द से पीड़ित मरीजों की भीड़ है। मच्छरों से फैलने वाले डेंगू के भय से मरीज सरकारी और निजी पैथोलॉजी में खून की जांच करा रहे हैं। इनमें परीक्षण के नाम पर सिर्फ रेपिड टेस्ट करवाया जा रहा है। ये जांच एक कार्ड के माध्यम से की जाती है। किट में रक्त का रंग बदलने पर डेंगू पॉजिटिव मानकर इलाज शुरू कर दिया जाता है।
रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज को शुरू हुए छह साल हो गए, लेकिन यहां एलाइजा मशीन के जरिये डेंगू की जांच नहीं होती। कमोवेश यही स्थिति जिला अस्पताल की है। यहां एलाइजा मशीन है, लेकिन ओएसकेआर प्रोग्रामिंग न होने से डेंगू की जांच नहीं हो रही है। दोनों अस्पतालों में किट के जरिये जांच की जा रही है।
वर्जन...
डेंगू की प्रमाणिक पुष्टि एलाइजा मशीन से जांच होने पर होती है, लेकिन यहां मशीन नहीं है। एनएस-1 किट के जरिये जांच की जाती है। इसमें पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर डेंगू मानकर डॉक्टर इलाज करते हैं। एलाइजा टेस्ट के लिए शासन को कई बार पत्र भेजा गया है। -डॉ. मुकेश कुमार यादव, प्राचार्य रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज।
जिला अस्पताल की लैब में एलाइजा मशीन है, लेकिन ओएसकेआर प्रोग्रामिंग न होने से डेंगू की जांच नहीं हो पा रही। लगभग एक पखवारे से जांच बंद है। नई मशीन के लिए शासन को पत्र भेजा है। जल्द एलाइजा टेस्ट शुरू होगा। अभी किट से डेंगू की जांच की जा रही है।-डा.एसएन मिश्र
सीएमएस, जिला अस्पताल, बांदा।
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जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार ने बताया कि मंगलवार को शहर के खुटला निवासी रामस्वरूप के पुत्र हरीओम (5) में डेंगू की पुष्टि हुई। उसे जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। उधर, कोतवाली नगर के पास रहने वाले इब्राहीम के पुत्र अफजल (12) का लखनऊ के अस्पताल में इलाज चल रहा है। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई है।
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दोनों मरीजों के घरों के आसपास फागिंग और दवा छिड़काव आदि निरोधात्मक कार्रवाई की गई है। उधर, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में डेंगू के लक्षण मिलने पर 30 वर्षीय युवक को भर्ती किया गया है। किट से जांच में पुष्टि होने पर उसका डेंगू का इलाज किया जा रहा है। मलेरिया अधिकारी के मुताबिक अब तक जिले में छह डेंगू के मामले मिल चुके हैं।
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बांदा। डेंगू टेस्ट के नाम पर मरीजों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल सहित जिले में कहीं भी एलाइजा (एंजाइम लिंक्ड इम्युनो सोरवेंट एस्से) जांच नहीं हो रही है। एनएस-1 किट से डेंगू की जांचकर इलाज किया जा रहा है, जबकि एलाइजा टेस्ट के बाद ही डेंगू की प्रमाणिक पुष्टि होती है।
इन दिनों अस्पतालों में बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द से पीड़ित मरीजों की भीड़ है। मच्छरों से फैलने वाले डेंगू के भय से मरीज सरकारी और निजी पैथोलॉजी में खून की जांच करा रहे हैं। इनमें परीक्षण के नाम पर सिर्फ रेपिड टेस्ट करवाया जा रहा है। ये जांच एक कार्ड के माध्यम से की जाती है। किट में रक्त का रंग बदलने पर डेंगू पॉजिटिव मानकर इलाज शुरू कर दिया जाता है।
रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज को शुरू हुए छह साल हो गए, लेकिन यहां एलाइजा मशीन के जरिये डेंगू की जांच नहीं होती। कमोवेश यही स्थिति जिला अस्पताल की है। यहां एलाइजा मशीन है, लेकिन ओएसकेआर प्रोग्रामिंग न होने से डेंगू की जांच नहीं हो रही है। दोनों अस्पतालों में किट के जरिये जांच की जा रही है।
वर्जन...
डेंगू की प्रमाणिक पुष्टि एलाइजा मशीन से जांच होने पर होती है, लेकिन यहां मशीन नहीं है। एनएस-1 किट के जरिये जांच की जाती है। इसमें पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर डेंगू मानकर डॉक्टर इलाज करते हैं। एलाइजा टेस्ट के लिए शासन को कई बार पत्र भेजा गया है। -डॉ. मुकेश कुमार यादव, प्राचार्य रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज।
जिला अस्पताल की लैब में एलाइजा मशीन है, लेकिन ओएसकेआर प्रोग्रामिंग न होने से डेंगू की जांच नहीं हो पा रही। लगभग एक पखवारे से जांच बंद है। नई मशीन के लिए शासन को पत्र भेजा है। जल्द एलाइजा टेस्ट शुरू होगा। अभी किट से डेंगू की जांच की जा रही है।-डा.एसएन मिश्र
सीएमएस, जिला अस्पताल, बांदा।