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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   Banda: Three-year-old tigress found dead in Panna Tiger Reserve

तीन साल की बाघिन की प्राकृतिक मौत: पन्ना टाइगर रिजर्व में 9 दिन पहले ही किया जा चुका है एक बाघ का शिकार 

Thu, 11 Nov 2021 10:08 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Thu, 11 Nov 2021 10:08 PM IST
सार

पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में आज एक और बाघिन की मौत हो गई। एक माह के अंदर बाघ की मौत की यह दूसरी घटना है। पिछले माह शिकारियों ने करंट से युवा बाघ का शिकार कर खाल निकालकर शव तालाब में फेेंक दिया था।

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Banda: Three-year-old tigress found dead in Panna Tiger Reserve
पन्ना टाइगर रिजर्व में एक और बाघ की मौत - फोटो : amar ujala

विस्तार

बुंदेलखंड के पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में 2 नवंबर को ही एक बाघ के शिकार के बाद अब एक बाघिन की मौत हो गई। जंगल में तीन वर्ष की बाघिन मृत मिली है। हालांकि पार्क प्रबंधन ने बाघिन की मौत को प्राकृतिक  मौत बताया और कहा कि बाघिन के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसका दाह संस्कार कर दिया गया है।
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दूसरे मामले में कुछ दिन पहले ही शिकारियों ने करंट से युवा बाघ का शिकार कर खाल निकालकर शव तालाब में फेेंक दिया था। सीमावर्ती पन्ना (एमपी) जिले में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में बाघिन के मरने की घटना उस समय हुई, जब बाघों की गणना होनी है।
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पी-213 (63) नंबर से पंजीकृत इस बाघिन का शव 10 नवंबर को पार्क में गश्त कर रही टीम को रात करीब एक बजे अमान गंज बफर की बीट रमपुरा के कक्ष संख्या 1357 में पड़ा मिला। कुछ ही देर बाद पार्क के संचालक, उप संचालक, वन्य प्राणी चिकित्सक और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण के प्रतिनिधि भी मौके पर पहुंच गए।
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पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि पन्ना टाइगर रिजर्व में जन्मी व पली बढ़ी बाघिन पी-213 की मृत्यु पर मौके पर कोई अवैध गतिविधि के साक्ष्य नहीं पाए गए हैं। 

बाघिन की उम्र ज्यादा होती तो स्वाभाविक मौत का तथ्य माना जा सकता था। महज तीन साल की उम्र में स्वाभाविक मौत संभव नहीं है। हो सकता है कि वह पहले से बीमार रही हो या फिर कोई और दिक्कत हुई हो। पोस्टमार्टम में किन बिंदुओं के आधार पर स्वाभाविक मौत बताई गई, यह रिपोर्ट देखने के बाद ही स्पष्ट किया जा सकता है। 
डॉ. आरके सिंह, वन्यजीव विशेषज्ञ, कानपुर प्राणि उद्यान

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