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सड़कों के गड्ढे दे रहे दर्द, बढ़ रहे कमर व गर्दन के मरीज
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उखड़ी पड़ी तिंदवारी-गोधनी संपर्क मार्ग।
- फोटो : BANDA
बांदा। हाईवे और जिले की सड़कों पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। ये गड्ढे राहगीरों बीमार कर रहे हैं। बड़े गड्ढों और उखड़ी गिट्टियों से वाहनों की रफ्तार तो सुस्त हो ही रही है, साथ में राहगीर इनमें लगने वाले झटकों से कमर और गर्दन दर्द के मरीज हो रहे हैं। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों के पास गर्दन और कमर दर्द के बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं।
बारिश के बाद शहर से लेकर देहात तक की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। हाल ही में मंडलायुक्त ने समीक्षा बैठक में पीडब्ल्यूडी और हाईवे के अभियंताओं को 10 नवंबर तक सड़कों को गड्ढामुक्त करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल मौजूदा में सड़क के गड्ढे राहगीरों को दर्द दे रहे हैं। दुपहिया और चार पहिया वाहन हिचकोले खाते हुए चलते हैं। जरा सी चूक राहगीरों को चुटहिल कर देती है।
शहर में कालूकुआं, चमरौडी से ईदगाह रोड, जेल रोड, इंदिरा नगर, सर्वोदय नगर की सड़कें खस्ताहाल हैं। इनके अलावा बांदा-टांडा नेशनल हाईवे, बांदा-बहराइच राज्य मार्ग सहित जिले के संपर्क मार्ग भी ध्वस्त हैं। बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शैलेंद्र यादव ने बताया कि रोजाना कमर और गर्दन दर्द के 15-20 मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। पहले इनकी संख्या बमुश्किल 8-10 होती थी।
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झटकों से डिस्क खिसकने का खतरा
रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. शैलेंद्र यादव ने बताया कि तेज झटकों से कमर की डिस्क खिसकने का खतरा रहता है। रीढ़ व कमर दर्द के मरीजों के लिए गड्ढों भरी सड़क पर सफर और दर्द बढ़ा सकती है। इसके अलावा सर्वाइकल से गर्दन में दर्द हो सकता है। इसके लक्षण होने पर सुरक्षित यात्रा ही बचाव है। बाइक आदि के सफर से परहेज करना होगा। ट्रेन की यात्रा करें।
कमर दर्द की हो गई शिकायत
गंछा गांव निवासी अमर पाल का कहना है कि वह रोजाना बाइक से शहर दूध बेचने आता-जाता है। सड़क में बहुत गड्ढे हैं। झटकों के चलते कुछ दिनों से उसे कमर में दर्द की शिकायत हो गई। मेडिकल कालेज में इलाज करा रहा है।
गर्दन में भी रहने लगा दर्द
महोखर गांव के राजेश सिंह का कहना है कि वह बोरों की खरीद-फरोख्त करता है। रोजाना शहर आना-जाना रहता है। सड़क बहुत खस्ताहाल है। कमर के साथ गर्दन में भी दर्द रहने लगा है। मेडिकल कालेज के डाक्टर ने गले में पट्टा पहनने की सलाह दी है।
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बारिश के बाद शहर से लेकर देहात तक की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। हाल ही में मंडलायुक्त ने समीक्षा बैठक में पीडब्ल्यूडी और हाईवे के अभियंताओं को 10 नवंबर तक सड़कों को गड्ढामुक्त करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल मौजूदा में सड़क के गड्ढे राहगीरों को दर्द दे रहे हैं। दुपहिया और चार पहिया वाहन हिचकोले खाते हुए चलते हैं। जरा सी चूक राहगीरों को चुटहिल कर देती है।
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शहर में कालूकुआं, चमरौडी से ईदगाह रोड, जेल रोड, इंदिरा नगर, सर्वोदय नगर की सड़कें खस्ताहाल हैं। इनके अलावा बांदा-टांडा नेशनल हाईवे, बांदा-बहराइच राज्य मार्ग सहित जिले के संपर्क मार्ग भी ध्वस्त हैं। बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शैलेंद्र यादव ने बताया कि रोजाना कमर और गर्दन दर्द के 15-20 मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। पहले इनकी संख्या बमुश्किल 8-10 होती थी।
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झटकों से डिस्क खिसकने का खतरा
रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. शैलेंद्र यादव ने बताया कि तेज झटकों से कमर की डिस्क खिसकने का खतरा रहता है। रीढ़ व कमर दर्द के मरीजों के लिए गड्ढों भरी सड़क पर सफर और दर्द बढ़ा सकती है। इसके अलावा सर्वाइकल से गर्दन में दर्द हो सकता है। इसके लक्षण होने पर सुरक्षित यात्रा ही बचाव है। बाइक आदि के सफर से परहेज करना होगा। ट्रेन की यात्रा करें।
कमर दर्द की हो गई शिकायत
गंछा गांव निवासी अमर पाल का कहना है कि वह रोजाना बाइक से शहर दूध बेचने आता-जाता है। सड़क में बहुत गड्ढे हैं। झटकों के चलते कुछ दिनों से उसे कमर में दर्द की शिकायत हो गई। मेडिकल कालेज में इलाज करा रहा है।
गर्दन में भी रहने लगा दर्द
महोखर गांव के राजेश सिंह का कहना है कि वह बोरों की खरीद-फरोख्त करता है। रोजाना शहर आना-जाना रहता है। सड़क बहुत खस्ताहाल है। कमर के साथ गर्दन में भी दर्द रहने लगा है। मेडिकल कालेज के डाक्टर ने गले में पट्टा पहनने की सलाह दी है।