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Banda News: चार लाख की दवाएं खराब होने के मामले में अधिकारी मौन
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बांदा। विभागीय समेत प्रशासन के उच्चाधिकारियों की अनदेखी के चलते करीब चार लाख रुपये की खराब हो गईं। आयुर्वेदिक दवाओं के जिम्मेदार बेफिक्र हैं। हैरत की बात यह है कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई तो दूर अब तक जांच के आदेश भी नहीं हुए। प्रभारी चिकित्साधिकारी द्वारा डीएम और विभागीय अधिकारियों को असलियत बताने के बाद भी जिम्मेदार मामले में जांच कराने से बच रहे हैं।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. नीरज सोनी ने करीब पांच दिन पूर्व डीएम को पत्र सौंपकर दवाओं के बर्बाद होने के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की थी। सिटी मजिस्ट्रेट से जांच का अनुरोध किया था, लेकिन पूर्व की तरह यह पत्र भी शायद ठंडे बस्ते में चला गया है।
डॉ. सोनी के पत्र में कहा गया है कि उनके स्टोर में भरतकूप (चित्रकूट) स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल की दवाएं रखी थीं। जिन्हें चूहे खा गए या एक्सपायरी होकर बर्बाद हो गईं। इनकी कीमत लगभग चार लाख रुपये थी। उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर कई बार दवाएं बांटने की अनुमति मांगी गई, लेकिन मंजूरी नहीं मिली।
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इतनी बड़ी तादाद में दवाएं खराब होने के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। फिलहाल डीएम ने अभी तक इस मामले में कोई जांच या कार्रवाई के आदेश नहीं दिए हैं।
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प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. नीरज सोनी ने करीब पांच दिन पूर्व डीएम को पत्र सौंपकर दवाओं के बर्बाद होने के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की थी। सिटी मजिस्ट्रेट से जांच का अनुरोध किया था, लेकिन पूर्व की तरह यह पत्र भी शायद ठंडे बस्ते में चला गया है।
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डॉ. सोनी के पत्र में कहा गया है कि उनके स्टोर में भरतकूप (चित्रकूट) स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल की दवाएं रखी थीं। जिन्हें चूहे खा गए या एक्सपायरी होकर बर्बाद हो गईं। इनकी कीमत लगभग चार लाख रुपये थी। उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर कई बार दवाएं बांटने की अनुमति मांगी गई, लेकिन मंजूरी नहीं मिली।
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इतनी बड़ी तादाद में दवाएं खराब होने के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। फिलहाल डीएम ने अभी तक इस मामले में कोई जांच या कार्रवाई के आदेश नहीं दिए हैं।