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बांदा : 24 साल चला हत्या का केस, सभी आरोपी बरी
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24 साल चला हत्या का केस, सभी आरोपी बरी
खेत से चना उखाड़ने के विवाद में हुई थी हत्या
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। खेत से चने का पौधा उखाड़ने के विवाद में हुई अनुसूचित जाति के युवक की हत्या का मामला न्यायालय में 24 साल तक चला। करीब 300 तारीखें पड़ीं। अधिवक्ता दिवंगत भी हो गए। अब आरोपी बेकसूर साबित हुए और दोषमुक्त करार दिए गए।
मामला गिरवां थाना क्षेत्र के मनोहर पुरवा का है। यहां भइया लाल की खेत से चना का पौधा उखाड़ने की रंजिश में 26 अप्रैल 1998 की रात गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसके बेटे लक्ष्मी ने अज्ञात लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने विवेचना के दौरान प्रकाश में आने पर चार आरोपियों दयाशंकर, नत्थू, राजेश आदि को आरोपी बनाया गया है। जिसमें तीन आरोपियों की जमानत हो गई। नत्थू अभी भी जेल में है। बचाव पक्ष से अधिवक्ता व सांसद रामरतन थे। जिनकी 2016 में मुकदमे के दरम्यान मौत हो गई। बाद में इस मुकदमे की पैरवी उनके बेटे अशोक त्रिपाठी ने की। मंगलवार को मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट मोहम्मद कमरूज्जमा खान ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ता जावित्री व महेंद्र द्विवेदी ने पैरवी की। आरोपियों के परिजनों ने न्यायालय का फैसला आने के बाद कहा कि न्याय की जीत होती है।
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खेत से चना उखाड़ने के विवाद में हुई थी हत्या
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। खेत से चने का पौधा उखाड़ने के विवाद में हुई अनुसूचित जाति के युवक की हत्या का मामला न्यायालय में 24 साल तक चला। करीब 300 तारीखें पड़ीं। अधिवक्ता दिवंगत भी हो गए। अब आरोपी बेकसूर साबित हुए और दोषमुक्त करार दिए गए।
मामला गिरवां थाना क्षेत्र के मनोहर पुरवा का है। यहां भइया लाल की खेत से चना का पौधा उखाड़ने की रंजिश में 26 अप्रैल 1998 की रात गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसके बेटे लक्ष्मी ने अज्ञात लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने विवेचना के दौरान प्रकाश में आने पर चार आरोपियों दयाशंकर, नत्थू, राजेश आदि को आरोपी बनाया गया है। जिसमें तीन आरोपियों की जमानत हो गई। नत्थू अभी भी जेल में है। बचाव पक्ष से अधिवक्ता व सांसद रामरतन थे। जिनकी 2016 में मुकदमे के दरम्यान मौत हो गई। बाद में इस मुकदमे की पैरवी उनके बेटे अशोक त्रिपाठी ने की। मंगलवार को मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट मोहम्मद कमरूज्जमा खान ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ता जावित्री व महेंद्र द्विवेदी ने पैरवी की। आरोपियों के परिजनों ने न्यायालय का फैसला आने के बाद कहा कि न्याय की जीत होती है।
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