{"_id":"630bac76d4bd7f168c01c5d9","slug":"banda-household-book-ration-over-spent-the-night-hungry-banda-news-knp7151433138","type":"story","status":"publish","title_hn":"बांदा : गृहस्थी बही, राशन खत्म, भूखे पेट गुजारी रात, बाढ़ पीड़ित खुले आसमान के नीचे खेतों में रहने को मजबूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बांदा : गृहस्थी बही, राशन खत्म, भूखे पेट गुजारी रात, बाढ़ पीड़ित खुले आसमान के नीचे खेतों में रहने को मजबूर
विज्ञापन
28 बीएनडीपी27 बाढ़ के पानी में डूबा चिल्ला परिषदीय स्कूल।
- फोटो : BANDA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा/खप्टिहा कलां। केन व यमुना का जलस्तर भले ही दो मीटर कम हो गया हो, लेकिन तलहटी में बसे गांवों के लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों के अधिकतर घरों में पानी भरा है। लोग बीते पांच दिन से खेत-खलिहानों व ऊंचे टीलों पर डेरा डाले हैं। बाढ़ और बारिश में भीगने से बीमार होने लगे हैं। उन तक स्वास्थ्य विभाग की टीमें नहीं पहुंच पा रही हैं। खाने पीने का सामान खत्म होने लगा है। कई परिवार खुले आसमान के नीचे भूखे पेट गुजार रात गुजारने को मजबूर हैं। हालात बता रहे हैं कि अब लोगों की आंखों में आंसुओं की बाढ़ है और दुश्वारियों के पहाड़ हैं। पढ़िए अमर उजाला की पड़ताल।
चावल में नमक मिलाकर खाया
खप्टिहा कलां में केन नदी के पानी से घिरे शंकर पुरवा के लोग खेतों में डेरा डाले हैं। जयंती ने बताया कि अभी तक उनके पास प्रशासन की मदद नहीं पहुंची है। राशन खत्म हो चुका है। एक दो दिन चावल में नमक मिलाकर खाया। अब वो भी नहीं है। खुले में पड़े हैं, कितना राशन लेकर आएं। राजादेवी का कहना है कि खुले आसमान के नीचे सोने से दो बच्चों को दो दिन से बुखार आ रहा है। मजबूरी में उफनाई केन नदी नाव से पार करके प्राइवेट डॉक्टर के यहां गए और इलाज कराया।
चारा खराब, पशु सड़क किनारे बंधे
सिमरन डेरा में पानी घुसने से लोग पशुओं को सड़क किनारे बांधकर ऊंचे स्थानों पर पहुंच गए हैं। यहां के रज्जू ने बताया कि पांच दिनों से यहां पड़े हैं। घर में भूसा व राशन सामग्री पानी से खराब हो गई है। जानवर भूखे हैं। शिवराम का पुरवा के रामचरन ने बताया कि लोगों से उधार पैसा लेकर खप्टिहा से राशन ला रहे है। यही स्थिति नरी की रमपतिया की है। बताया खेत में रामभरोसे पड़े हैं। दो दिन से चावल खाकर दिन गुजार रहे हैं। चिल्ला कस्बे के मकानों में आठ से दस फिट पानी भरा है। लोग खेतों में पॉलिथीन लगाकर रात काट रहे है।
विज्ञापन
राशन के लिए जान की परवाह नहीं
केन के पानी से प्रभावित गांव शंकर पुरवा, छनिया डेरा, शिवराम का पुरवा, डोलन डेरा, गणेश नगर, मुरलिया डेरा, पंडितन डेरा छनिया डेरा के लोगों का राशन खप्टिहा कलां में स्थित राशन की दुकान में मिलता है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार कर राशन लेने जा रहे हैं। नाव में मानक से अधिक लोग बैठाए जा रहे हैं। पुलिस सिर्फ तमाशा देख रही है। बीते दिनों मरका में नाव पटलने से 17 लोगों की डूबकर मौत हो गई थी।
प्राथमिक विद्यालय व बरात घर डूबे
यमुना के पानी में चिल्ला का प्राथमिक विद्यालय भाग-2 व बरात घर पानी में डूब गया। यहां के रजोला व तुर्री ने बताया कि घरों में पानी भरने से खुले आसमान के नीचे खेतों में रह रहे हैं। छह दिन हो गए। घर से जो राशन लाए थे, वह खत्म हो गया। ईंधन का भी प्रबंधन नहीं है। रात में अंधेरा होने से कीडे़ मकूड़ों के काटने का खतरा है।
केन की बाढ़ से जलमग्न गांव
बाढ़ से बांदा व पैलानी क्षेत्र के 50 गांव प्रभावित हैं। करीब 150 एकड़ खेती पानी में डूब गई है। केन की बाढ़ से पैलानी डेरा, खप्टिहाकला, नांदादेव, पडोहरा, आमारा, गडरिया, सिंधनकला, पडेरी, लसडा, पिपरोदर, पंचकौरी, खजुरी, शंकर पुरवा, बरेहटा, शिवराम का पुरवा, सिमरन छेरा, छनिया डेरा, करिंदा डेरा, शिवपाल का डेरा, नरी, सिंधन खुर्द, डोलन डेरा, गणेश नगर, मुरलिया डेरा, पंडितन डेरा प्रभावित हैं।
यमुना की बाढ़ से जलमग्न गांव
गुरगवां, अदरी, बसधरी, झझरी पुरवा, ललौली, पडेरी, शबादा, इच्छवर, चंदवारा, महावरा, तगड़ा डेरा, कंघी डेरा, जौहरपुर, बेंदा, कटार, खेरा, जोरवरपुर, चरका, बीरा, लखनपुर, औदहा, बाघा, चंदवारा, महबरा, मडौलीकला, गलौती, बड़ा गांव, पिपरोदर, लसड़ा, लोमर, बड़ागांव, इछावर आदि।
------
कोटे की राशन सामग्री प्रभावित गांवों में भेजकर बंटवाने के लिए डीएसओ से बात करेंगे। डॉक्टरों की टीम जहां तक पहुंच सकती है, गांव में जाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाएं दे रही है। नावों में अधिक लोग न बैठे इसलिए पुलिस लगाई गई है।
उमाकांत अपर जिलाधिकारी, बांदा
विज्ञापन
चावल में नमक मिलाकर खाया
खप्टिहा कलां में केन नदी के पानी से घिरे शंकर पुरवा के लोग खेतों में डेरा डाले हैं। जयंती ने बताया कि अभी तक उनके पास प्रशासन की मदद नहीं पहुंची है। राशन खत्म हो चुका है। एक दो दिन चावल में नमक मिलाकर खाया। अब वो भी नहीं है। खुले में पड़े हैं, कितना राशन लेकर आएं। राजादेवी का कहना है कि खुले आसमान के नीचे सोने से दो बच्चों को दो दिन से बुखार आ रहा है। मजबूरी में उफनाई केन नदी नाव से पार करके प्राइवेट डॉक्टर के यहां गए और इलाज कराया।
विज्ञापन
चारा खराब, पशु सड़क किनारे बंधे
सिमरन डेरा में पानी घुसने से लोग पशुओं को सड़क किनारे बांधकर ऊंचे स्थानों पर पहुंच गए हैं। यहां के रज्जू ने बताया कि पांच दिनों से यहां पड़े हैं। घर में भूसा व राशन सामग्री पानी से खराब हो गई है। जानवर भूखे हैं। शिवराम का पुरवा के रामचरन ने बताया कि लोगों से उधार पैसा लेकर खप्टिहा से राशन ला रहे है। यही स्थिति नरी की रमपतिया की है। बताया खेत में रामभरोसे पड़े हैं। दो दिन से चावल खाकर दिन गुजार रहे हैं। चिल्ला कस्बे के मकानों में आठ से दस फिट पानी भरा है। लोग खेतों में पॉलिथीन लगाकर रात काट रहे है।
विज्ञापन
राशन के लिए जान की परवाह नहीं
केन के पानी से प्रभावित गांव शंकर पुरवा, छनिया डेरा, शिवराम का पुरवा, डोलन डेरा, गणेश नगर, मुरलिया डेरा, पंडितन डेरा छनिया डेरा के लोगों का राशन खप्टिहा कलां में स्थित राशन की दुकान में मिलता है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार कर राशन लेने जा रहे हैं। नाव में मानक से अधिक लोग बैठाए जा रहे हैं। पुलिस सिर्फ तमाशा देख रही है। बीते दिनों मरका में नाव पटलने से 17 लोगों की डूबकर मौत हो गई थी।
प्राथमिक विद्यालय व बरात घर डूबे
यमुना के पानी में चिल्ला का प्राथमिक विद्यालय भाग-2 व बरात घर पानी में डूब गया। यहां के रजोला व तुर्री ने बताया कि घरों में पानी भरने से खुले आसमान के नीचे खेतों में रह रहे हैं। छह दिन हो गए। घर से जो राशन लाए थे, वह खत्म हो गया। ईंधन का भी प्रबंधन नहीं है। रात में अंधेरा होने से कीडे़ मकूड़ों के काटने का खतरा है।
केन की बाढ़ से जलमग्न गांव
बाढ़ से बांदा व पैलानी क्षेत्र के 50 गांव प्रभावित हैं। करीब 150 एकड़ खेती पानी में डूब गई है। केन की बाढ़ से पैलानी डेरा, खप्टिहाकला, नांदादेव, पडोहरा, आमारा, गडरिया, सिंधनकला, पडेरी, लसडा, पिपरोदर, पंचकौरी, खजुरी, शंकर पुरवा, बरेहटा, शिवराम का पुरवा, सिमरन छेरा, छनिया डेरा, करिंदा डेरा, शिवपाल का डेरा, नरी, सिंधन खुर्द, डोलन डेरा, गणेश नगर, मुरलिया डेरा, पंडितन डेरा प्रभावित हैं।
यमुना की बाढ़ से जलमग्न गांव
गुरगवां, अदरी, बसधरी, झझरी पुरवा, ललौली, पडेरी, शबादा, इच्छवर, चंदवारा, महावरा, तगड़ा डेरा, कंघी डेरा, जौहरपुर, बेंदा, कटार, खेरा, जोरवरपुर, चरका, बीरा, लखनपुर, औदहा, बाघा, चंदवारा, महबरा, मडौलीकला, गलौती, बड़ा गांव, पिपरोदर, लसड़ा, लोमर, बड़ागांव, इछावर आदि।
------
कोटे की राशन सामग्री प्रभावित गांवों में भेजकर बंटवाने के लिए डीएसओ से बात करेंगे। डॉक्टरों की टीम जहां तक पहुंच सकती है, गांव में जाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाएं दे रही है। नावों में अधिक लोग न बैठे इसलिए पुलिस लगाई गई है।
उमाकांत अपर जिलाधिकारी, बांदा