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बांदा : टेस्टिंग में फट जा रही पेयजल पाइप लाइन, ग्रामीणों ने लगाया घटिया पाइप लाइन डालने का आरोप
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बांदा। जल संस्थान की ओर से अछरौड़ में ट्यूबवेल स्थापित कर पेयजल आपूर्ति के लिए डाली गई पाइप लाइन टेस्टिंग के दौरान ही फट जा रही है। ग्रामीणों ने बुधवार को जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी कलक्ट्रेट को दिया।
बताया कि अछरौड़, उजरेहटा, मरौली, सरौली के गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए अछरौड़ खदान के बाद केन किनारे नलकूप की स्थापना की है। इसके लिए गांव में प्लास्टिक की रिजेक्टेड पाइप लाइन डाल दी गई है। यह टेस्टिंग के दौरान ही जगह-जगह से फट रही है। ग्रामीणों ने नलकूप की स्थापना व पाइप लाइन डालने की जांच कराए जाने सहित प्लास्टिक के स्थान पर लोहे की पाइप लाइन डलवाए जाने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में विमल कुमार, मूलचंद्र, संत कुमार, बच्चा विश्वकर्मा, दिनेश शुक्ला आदि मौजूद रहे।
घटिया स्तर की लगी पाइपें
प्रधान विनोद यादव का कहना है कि ग्रामीण दशकों से पेयजल संकट से जूझ रहे थे। ट्यूबवेल की स्थापना होने से लोगों में खुशी है, लेकिन घटिया स्तर की पाइप लाइन ग्रामीणों के लिए सिरदर्द बनी रहेगी।
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चोर उचक्के तोड़ देते पाइप
जेई राघवेंद्र यादव का कहना है कि गांवों को पेयजल की आपूर्ति भूरागढ़ से होती थी। गांव में पाइप लाइन पहले से पड़ी है। भूरागढ़ से गांव की दूरी करीब 18 किलोमीटर होने से पानी गांव तक नहीं पहुंच पा रहा था। चोर उच्चके रास्ते में पाइप लाइन तोड़ देते थे। इस समस्या के निजात के लिए नया ट्यूबवेल स्थापित किया गया है। ट्यूबवेल से सीडब्लूआर टंकी के लिए पाइप लाइन डाली जा रही है। प्लास्टिक की पाइप लाइन छह एमएम की गुणवत्तायुक्त है।
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बताया कि अछरौड़, उजरेहटा, मरौली, सरौली के गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए अछरौड़ खदान के बाद केन किनारे नलकूप की स्थापना की है। इसके लिए गांव में प्लास्टिक की रिजेक्टेड पाइप लाइन डाल दी गई है। यह टेस्टिंग के दौरान ही जगह-जगह से फट रही है। ग्रामीणों ने नलकूप की स्थापना व पाइप लाइन डालने की जांच कराए जाने सहित प्लास्टिक के स्थान पर लोहे की पाइप लाइन डलवाए जाने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में विमल कुमार, मूलचंद्र, संत कुमार, बच्चा विश्वकर्मा, दिनेश शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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घटिया स्तर की लगी पाइपें
प्रधान विनोद यादव का कहना है कि ग्रामीण दशकों से पेयजल संकट से जूझ रहे थे। ट्यूबवेल की स्थापना होने से लोगों में खुशी है, लेकिन घटिया स्तर की पाइप लाइन ग्रामीणों के लिए सिरदर्द बनी रहेगी।
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चोर उचक्के तोड़ देते पाइप
जेई राघवेंद्र यादव का कहना है कि गांवों को पेयजल की आपूर्ति भूरागढ़ से होती थी। गांव में पाइप लाइन पहले से पड़ी है। भूरागढ़ से गांव की दूरी करीब 18 किलोमीटर होने से पानी गांव तक नहीं पहुंच पा रहा था। चोर उच्चके रास्ते में पाइप लाइन तोड़ देते थे। इस समस्या के निजात के लिए नया ट्यूबवेल स्थापित किया गया है। ट्यूबवेल से सीडब्लूआर टंकी के लिए पाइप लाइन डाली जा रही है। प्लास्टिक की पाइप लाइन छह एमएम की गुणवत्तायुक्त है।