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बांदा : गांवों में फैली बीमारी, उल्टी-दस्त व बुखार से लोग बीमार
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29बीएनडीपी 25 - यमुना की बाढ़ से डूब गईं फसलें।
- फोटो : BANDA
बांदा। केन के बाद अब यमुना का भी जलस्तर कम होने लगा है। मगर उतरती बाढ़ की दुश्वारियां बढ़ने लगी हैं। जिन जिन गांवों से पानी कम हुआ है, वहां बदबू आ रही है। उमस भरा माहौल है। इससे ग्रामीण बड़ी तेजी से उल्टी, दस्त, जुकाम और बुखार की चपेट में आ रहे हैं। हर घर में एक दो बीमार हैं। माना जा रहा है कि सड़ांध की वजह से संक्रामक रोगों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। समय से इलाज नहीं मिल पाने के कारण महिला की मौत हो गई।
अमर उजाला की टीम ने सोमवार को इन बाढ़ प्रभावित इलाकों का आंखों देखा हाल जाना। तलहटी में बसे 50 से अधिक गांवों में अभी भी पानी भरा है। यहां भी संक्रामक रोगियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन इलाज के लिए अस्पताल तक नहीं जा पा रहे हैं।
ऐसे में प्रशासनिक अफसर और डॉक्टरों की टीम नाव से उन तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। ग्रामीणों की फसलें नष्ट हो चुकी हैं। खेत तालाब बन गए हैं। यहां पानी कम होने में चार से पांच दिन का समय लग सकता है। जिलाधिकारी अनुराग पटेल का कहना है कि ग्रामीणों को दवा के साथ राशन और अन्य सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। डॉक्टरों की टीम भी पहुंच रही है। मरीजों को दवाइयां भी बांटी जा रही हैं।
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पैलानी तहसील के बाढ़ प्रभावित गांव रेहुटा में चार दिन से बुखार से पीड़ित सावित्री की मौत हो गई। पति महेश निषाद ने बताया कि गांव में पानी भरा होने की वजह से पत्नी को इलाज के लिए शहर नहीं ले सके। यहीं निजी निजी चिकित्सक से दवा करा रहे थे। हालत अधिक खराब होने पर वह बीती रात ई-रिक्शा से करीब 40 किमी दूर रास्ते से होकर पत्नी को डॉक्टर के पास जा रहे थे, तभी रास्ते में उनकी मौत हो गई।
ग्रामीणों का कहना है कि बीमार व्यक्ति को नाव से ले जाने में अतिरिक्त किराया देना पड़ता है। जिला मुख्यालय तक जाने के लिए टैक्सी चालक लोगों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। ग्रामीण रमेश चंद्र, शिवकरन ने बताया कि मियादी बुखार से बचने के लिए लोग किराने की दुकान से दवा लेकर खा रहे हैं।
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अमर उजाला की टीम ने सोमवार को इन बाढ़ प्रभावित इलाकों का आंखों देखा हाल जाना। तलहटी में बसे 50 से अधिक गांवों में अभी भी पानी भरा है। यहां भी संक्रामक रोगियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन इलाज के लिए अस्पताल तक नहीं जा पा रहे हैं।
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ऐसे में प्रशासनिक अफसर और डॉक्टरों की टीम नाव से उन तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। ग्रामीणों की फसलें नष्ट हो चुकी हैं। खेत तालाब बन गए हैं। यहां पानी कम होने में चार से पांच दिन का समय लग सकता है। जिलाधिकारी अनुराग पटेल का कहना है कि ग्रामीणों को दवा के साथ राशन और अन्य सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। डॉक्टरों की टीम भी पहुंच रही है। मरीजों को दवाइयां भी बांटी जा रही हैं।
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पैलानी तहसील के बाढ़ प्रभावित गांव रेहुटा में चार दिन से बुखार से पीड़ित सावित्री की मौत हो गई। पति महेश निषाद ने बताया कि गांव में पानी भरा होने की वजह से पत्नी को इलाज के लिए शहर नहीं ले सके। यहीं निजी निजी चिकित्सक से दवा करा रहे थे। हालत अधिक खराब होने पर वह बीती रात ई-रिक्शा से करीब 40 किमी दूर रास्ते से होकर पत्नी को डॉक्टर के पास जा रहे थे, तभी रास्ते में उनकी मौत हो गई।
ग्रामीणों का कहना है कि बीमार व्यक्ति को नाव से ले जाने में अतिरिक्त किराया देना पड़ता है। जिला मुख्यालय तक जाने के लिए टैक्सी चालक लोगों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। ग्रामीण रमेश चंद्र, शिवकरन ने बताया कि मियादी बुखार से बचने के लिए लोग किराने की दुकान से दवा लेकर खा रहे हैं।

29बीएनडीपी 26 - शंकरपुर गांव से गृहस्थी लेकर सुरक्षित स्थान पर जाती महिला।- फोटो : BANDA

29बीएनडीपी 27- घरों में पांच फिट तक भरा पानी- फोटो : BANDA