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बांदा : आठ सौ छात्राएं चार कमरों में जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर

Tue, 13 Dec 2022 11:46 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 13 Dec 2022 11:46 PM IST
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Banda: 800 girl students forced to sit on the ground in four rooms
तिंदवारी (बांदा)। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में 50-50 की क्षमता वाले चार कक्षों में 868 छात्राएं जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रही हैं। एक करोड़ 30 लाख खर्च कर बनाए गए दो अलग-अलग भवन 20 वर्ष से अधूरे पड़े हैं। जिम्मेदार इन भवनों को पूरा कराने को लेकर बेपरवाह हैं। बिल्डिंग अधूरी होने की जानकारी शासन को होने की बात बोलकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।
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राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में अतिरिक्ति भवन निर्माण के लिए वर्ष 2004 में तत्कालीन सांसद रामसजीवन सिंह ने सांसद-निधि से 75 लाख रुपये दिये थे। निर्माण दायी संस्था पैक्सफेड ने आठ कमरों, दो हाल, कार्यालय, प्रधानाचार्य कक्ष का निर्माण शुरू कर वर्ष 2006 में 75 लाख खर्च कर सिर्फ दीवारें खड़ी कर दीं दी। इसके बाद पैसा न होने की बात कहकर काम बंद कर चलती बनी।
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वर्ष 2008 में शासन ने अधूरे निर्माण को पूरा कराने के लिए 65 लाख रुपये जारी किए। निर्माण कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम को दिया गया। उसने पूर्व में पैक्सफेड द्वारा अधूरी बिल्डिंग को पूरा करने के बजाय छह कमरों, दो हॉल, कार्यालय, प्रधानाचार्य कक्ष, शौचालय का निर्माण नये सिरे से शुरू किया। वर्ष 2015 तक 65 लाख रुपये खर्च कर काम बंद यह निर्माण एजेंसी भी चलती बनी। इस कारण निर्माण कार्य अधूरा रहा।
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वर्ष 2013 में माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत 30 लाख रुपये राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के भवन का निर्माण करने के लिए मिले। इस बार तीसरी नई निर्माण संस्था ग्रामीण अभियंत्रण विभाग बांदा को वर्ष 2013-14 में जिम्मेदारी मिली। इस कंपनी ने अगस्त 2015 में दोनों अधूरी पड़ी बिल्डिंग के पास छह नये कमरे बनाकर तैयार किए। छह में से दो कमरों में स्टाफ और प्रधानाचार्य कार्यालय है। बाकी के चार कमरों में नौ से 12 तक की 868 छात्राएं जमीन पर बैठकर पढ़ती हैं।

कोट्स-
प्रोजेक्ट अलंकार के तहत अधूरी बिल्डिंग को पूरा करने के लिए शासन को स्टीमेट भेजा है। मंजूरी मिलते ही काम पूरा किया जाएगा। कार्यदायी संस्थाओं ने किस प्रकार से दो-दो बार अधूरा निर्माण किया, इसकी जानकारी शासन को है।
-विनोद सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक
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